झीरम नरसंहार में निशाने पर थे महेंद्र कर्मा, घेरकर मारे गए कांग्रेस नेता; 77 लाख के इनामी माओवादी ने खोले खौफनाक राज
झीरम घाटी नरसंहार में 77 लाख के इनामी माओवादी सोमा सोढ़ी ने खुलासा किया है कि महेंद्र कर्मा मुख्य निशाना ...और पढ़ें

झीरम घाटी में माओवादी हमला (फाइल फोटो)
HighLights
माओवादी सोमा सोढ़ी ने झीरम नरसंहार के खौफनाक राज खोले।
कहा- महेंद्र कर्मा 'सलवा जुडूम' के कारण मुख्य निशाना थे।
250 माओवादियों ने मिलकर रची थी बड़े हमले की योजना।
योगेश गौतम, बालाघाट। पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नरसंहार में अदालत द्वारा दस माओवादियों को मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद एक बार फिर यह कांड चर्चा में है। इस कांड में छत्तीसगढ़ के उस दौर का समूचा कांग्रेस नेतृत्व माओवादियों की गोली शिकार हो गया था। इसमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल समेत 32 लोगों की हत्या हुई थी।
मेन टारगेट थे महेंद्र कर्मा
इस नरसंहार में शामिल रहे 77 लाख के इनामी सोमा सोढ़ी उर्फ सुरेंद्र उर्फ कबीर ने नरसंहार की कहानी साझा की। सोमा ने दिसंबर 2025 में मध्य प्रदेश की बालाघाट पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। उसने बताया कि माओवादी हिंसा के खिलाफ शुरू किए गए ‘सलवा जुडूम’ (शांति यात्रा) में कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा की प्रमुख भूमिका थी, इस कारण निशाने पर वही थे। उन्हीं को मारने के लिए जाल बिछाया गया था जिसमें कांग्रेस के अन्य नेता गेहूं में घुन की तरह पिस गए।
हमले में 250 माओवादी थे शामिल
सोमा सोढ़ी उर्फ सुरेंद्र उर्फ कबीर ने बताया कि महेंद्र को दरभा डिवीजन ने खत्म करने की कई बार कोशिश की थी। आरनपुर घाटी, बीजापुर-दंतेवाड़ा के बीच जंगल में अनेक ब्लास्ट किए, लेकिन हर बार महेंद्र कर्मा बच निकले। झीरम हत्याकांड की योजना दलम के 20 बड़े माओवादियों ने बनाई थी। इसमें करीब 250 माओवादी शामिल थे। सभी अलग-अलग समूह में घाटी के चारों तरफ फैल गए थे।
कांग्रेस नेताओं को मारने की नहीं थी योजना
सोमा सोढ़ी ने कहा कि मैं जिस समूह में था, उसके टारगेट पर महेंद्र कर्मा और सलवा जुडूम से जुड़े लोग थे। कांग्रेस नेताओं की हत्या की कोई योजना नहीं थी, वे निर्दोष थे। उनकी हत्या का मुझे दुख है।
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पहले से बिछा रखे थे बारूद
सुरेंद्र ने बताया कि झीरम घाटी में लगभग तीन घंटे तक फायरिंग चली। हमने पहले से जगह-जगह बारूद बिछा रखे थे। इसलिए घटना स्थल तक समय पर फोर्स नहीं पहुंच सकी। हमें कवर देने के लिए हमारे साथी घटनास्थल को चारों तरफ से घेरे हुए थे। फायरिंग रुकने के बाद महेंद्र कर्मा को हमने जिंदा पकड़ा था, फिर हमारे समूह ने उनकी हत्या की थी।
दूसरे समूह के साथियों ने कांग्रेस के बड़े नेताओं की हत्या कर दी। अन्य साथियों ने कांग्रेसियों को क्यों मारा, मुझे इसकी जानकारी नहीं थी। मैं उस जगह से लगभग एक किमी दूर था, जहां महेंद्र कर्मा को टारगेट कर मारा गया। बता दें कि झीरम घाटी कांड में 39 माओवादी नामजद थे, जिनमें से दस को सजा सुनाई गई है।
