जबलपुर में बेशकीमती खनिजों का खजाना! टाइटेनियम-वेनेडियम के बड़े भंडार से विकास की उम्मीद, लेकिन नीलामी से पहले जमीन का पेंच
जबलपुर के धनगवां क्षेत्र में टाइटेनियम और वेनेडियम जैसे बहुमूल्य खनिजों के बड़े भंडार मिले हैं, जिससे इलाके में विकास ...और पढ़ें

जबलपुर के सिहोरा (धनगवां) में टाइटेनियम व वेनेडियम खनिज भंडार वाले प्रस्तावित क्षेत्र का सर्वेक्षण।
HighLights
जबलपुर के धनगवां में टाइटेनियम-वेनेडियम के बड़े भंडार मिले।
खनिज दोहन से क्षेत्र में आर्थिक विकास और रोजगार की उम्मीद।
नीलामी से पहले भूमि स्वामित्व और रिकॉर्ड मिलान की चुनौती।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। प्रदेश के जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील के धनगवां क्षेत्र में टाइटेनियम और वेनेडियम जैसे रणनीतिक एवं बहुमूल्य खनिजों के बड़े भंडार मिलने से इलाके में विकास की नई संभावनाएं बनी हैं। इन खनिजों के व्यावसायिक दोहन से क्षेत्र को आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के स्तर पर फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, खनिज ब्लॉक की नीलामी से पहले जमीन के स्वामित्व, सीमांकन और विभागीय रिकॉर्ड के मिलान की चुनौती सामने आ गई है।
289 हेक्टेयर में मिला खनिज विस्तार
जीएसआई और अन्य सर्वेक्षणों के मुताबिक धनगवां क्षेत्र में खनिज भंडार का संभावित विस्तार करीब 289 हेक्टेयर में है। आबादी क्षेत्र को अलग करने के बाद खनन के लिए उपयोगी क्षेत्र लगभग 230 हेक्टेयर रह जाता है। इसमें करीब 63 हेक्टेयर निजी भूमि और लगभग 70 हेक्टेयर वन विभाग की जमीन शामिल है। यानी उपयोगी खनन क्षेत्र में करीब 133 हेक्टेयर भूमि निजी और वन श्रेणी में आती है।
नीलामी से पहले भूमि रिकॉर्ड का पेंच
खनिज ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले प्रशासन भूमि की स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करना चाहता है। निजी जमीन पर खनन के लिए स्वामित्व और अन्य वैधानिक पहलुओं का समाधान जरूरी होगा। वहीं, वन भूमि के मामले में संबंधित केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से आवश्यक स्वीकृतियां हासिल करना भी अहम होगा।
इसी को देखते हुए राजस्व, वन और खनिज विभाग के भू-अभिलेखों का आपस में मिलान और सत्यापन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जमीन की वास्तविक स्थिति, स्वामित्व और सीमांकन को लेकर किसी भी तरह की अस्पष्टता दूर करना है।
बाद में विवाद न हो, इसलिए पहले पूरी होगी प्रक्रिया
प्रशासन और खनिज विभाग का जोर इस बात पर है कि नीलामी शुरू होने से पहले खनन योग्य क्षेत्र की कानूनी और विभागीय स्थिति साफ हो जाए। अधिकारियों का मानना है कि रिकॉर्ड और सीमांकन में स्पष्टता रहने से भविष्य में कानूनी विवाद अथवा तकनीकी अड़चनों की संभावना कम होगी।
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सत्यापन के बाद तय होगा अंतिम क्षेत्र
जबलपुर के जिला खनिज अधिकारी सतीश मिश्रा के अनुसार खनन क्षेत्र में जमीन का प्रारंभिक चिन्हांकन किया जा चुका है। अब राजस्व, वन और निजी भूमि से जुड़े रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है। इसके बाद ही खनन के लिए अंतिम क्षेत्र निर्धारित किया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी कर आगे की कार्रवाई शुरू की जाए।
