खेत की मेड़, रेलवे पुल और डेढ़ किमी पैदल सफर… दमोह में एंबुलेंस नहीं पहुंची तो गर्भवती महिला का सड़क किनारे प्रसव
दमोह में एक गर्भवती महिला को एंबुलेंस न मिलने के कारण खेत से डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक ...और पढ़ें

HighLights
गर्भवती महिला ने एंबुलेंस न मिलने पर सड़क किनारे बच्चे को जन्म दिया।
खेत से मुख्य सड़क तक डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर पहुंची महिला।
घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य और परिवहन सेवाओं पर गंभीर सवाल उठाए।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में स्वास्थ्य और ग्रामीण परिवहन व्यवस्था की मुश्किलों को सामने लाने वाली घटना सामने आई है। प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद एक गर्भवती महिला को खेत की मेड़ों और रेलवे पुल से होते हुए करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ा। यहां पहुंचने के बाद भी एंबुलेंस समय पर नहीं आई। प्रसव पीड़ा बढ़ती गई और आखिरकार महिला ने सड़क किनारे ही बच्चे को जन्म दे दिया।
प्रसव के बाद मौके पर एंबुलेंस पहुंची और जच्चा-बच्चा को बांदकपुर के सरकारी अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया। फिलहाल दोनों का उपचार किया गया।
कच्चे रास्ते के कारण मुख्य सड़क तक बुलाया
घटना ग्राम पंचायत खड़ेरा की रहने वाली 22 वर्षीय कुमकुम बाई पत्नी सुदामा रैकवार के साथ हुई। कुमकुम बाई खेत में रखवाली करती हैं। गुरुवार को खेत में ही उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। उस समय उनके पति सुदामा रैकवार किसी काम से दमोह गए हुए थे।
प्रसव पीड़ा बढ़ने पर सुदामा ने एंबुलेंस के लिए फोन किया। बताया गया कि खेत तक पहुंचने वाला रास्ता कच्चा होने के कारण एंबुलेंस वहां नहीं आ सकती। चालक ने उन्हें मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए कहा।
खेत की मेड़ों से रेलवे पुल तक पैदल चली महिला
एंबुलेंस का इंतजार किए बिना कुमकुम बाई की जेठानी देवकी बाई एक अन्य महिला के साथ सुबह करीब नौ बजे खेत से उन्हें लेकर पैदल रवाना हुईं। प्रसव पीड़ा से परेशान कुमकुम को खेतों की मेड़ों से होते हुए आगे ले जाया गया।
इस दौरान उन्हें घटेरा-ब्यारमा नदी पर बने रेलवे पुल को भी पैदल पार करना पड़ा। करीब डेढ़ किलोमीटर का रास्ता तय करने के बाद वे किसी तरह मुख्य सड़क तक पहुंचीं।
सड़क पर बढ़ी प्रसव पीड़ा, वहीं जन्मा बच्चा
मुख्य सड़क तक पहुंचने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि अब एंबुलेंस जल्द मिल जाएगी, लेकिन इंतजार बढ़ता गया। इसी दौरान करीब 10 बजे कुमकुम बाई की प्रसव पीड़ा तेज हो गई। मदद मिलने से पहले ही उन्होंने सड़क किनारे बच्चे को जन्म दे दिया।
प्रसव के बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंची। इसके बाद जच्चा और बच्चे को बांदकपुर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां दोनों को भर्ती कराया गया। घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
