जबलपुर-भोपाल-इंदौर कॉरिडोर बनेगा ग्रोथ इंजन, 4 इंडस्ट्रियल एरिया और स्किल सिटी का प्लान; दो लाख लोगों को मिलेगा रोजगार
मध्य प्रदेश में जबलपुर-भोपाल और भोपाल-इंदौर कॉरिडोर को औद्योगिक विकास और रोजगार के नए इंजन के रूप में विकसित किया ...और पढ़ें

-एआई से निर्मित इमेज।
HighLights
जबलपुर-भोपाल-इंदौर कॉरिडोर से विकास को मिलेगी रफ्तार।
चार औद्योगिक क्षेत्र, स्किल सिटी से दो लाख रोजगार सृजित होंगे।
सुगम परिवहन सेवा 350 बसों से शुरू होगी, 14,981 बसों का लक्ष्य।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को औद्योगिक विकास और रोजगार से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। जबलपुर-भोपाल और भोपाल-इंदौर कॉरिडोर को सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था के नए ग्रोथ इंजन के रूप में विकसित करने जा रही है। 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक के इस बड़े प्रोजेक्ट के दोनों कॉरिडोर पर चार बड़े औद्योगिक क्षेत्र, इंडस्ट्रियल टाउनशिप और युवाओं के लिए स्किल सिटी विकसित की जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में कैबिनेट बैठक से पहले मंत्रियों को प्रोजेक्ट की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कॉरिडोर पर विकसित होने वाली स्किल सिटी विकसित मध्य प्रदेश की नई पहचान बनेगी। यहां हर साल 50 हजार से अधिक युवाओं का कौशल विकास और क्षमता संवर्धन किया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्रों के विकास से आने वाले वर्षों में दो लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
भोपाल-इंदौर का सफर ढाई घंटे में
भोपाल-इंदौर कॉरिडोर की लंबाई करीब 161 किलोमीटर होगी। छह लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय करीब चार घंटे से घटकर दो से ढाई घंटे रह जाएगा।
नया एक्सप्रेस-वे मौजूदा आबादी वाले क्षेत्रों और भारी यातायात से अलग बनाया जाएगा। इससे तेज आवाजाही के साथ औद्योगिक गतिविधियों के लिए नए क्षेत्र विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
भोपाल-जबलपुर कॉरिडोर पर 14,105 करोड़ का प्रस्ताव
भोपाल-जबलपुर कॉरिडोर की लंबाई करीब 255 किलोमीटर प्रस्तावित है। इसकी अनुमानित लागत 14,105 करोड़ रुपये बताई गई है। कॉरिडोर तैयार होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय करीब छह घंटे से घटकर तीन से साढ़े तीन घंटे रह जाएगा।
सरकार की योजना इन दोनों कॉरिडोर को केवल परिवहन परियोजना तक सीमित रखने की नहीं है। इनके आसपास औद्योगिक क्षेत्र और टाउनशिप विकसित कर निवेश, उत्पादन और रोजगार के नए अवसर तैयार करने पर जोर है।
25 सितंबर से 350 बसों के साथ सुगम परिवहन सेवा
प्रदेश में करीब दो दशक बाद सार्वजनिक बस परिवहन व्यवस्था को नए स्वरूप में शुरू किया जा रहा है। 25 सितंबर को भोपाल से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा का शुभारंभ होगा। इस मौके पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 350 बसों को हरी झंडी दिखाएंगे।
कैबिनेट बैठक में परिवहन विभाग ने योजना का प्रस्तुतीकरण दिया। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप ने बताया कि मध्य प्रदेश सड़क परिवहन निगम के बंद होने के बाद पिछले करीब 20 वर्षों से राज्य में संगठित लोक परिवहन व्यवस्था की कमी थी। मुख्यमंत्री की पहल पर सुगम बस सेवा की योजना तैयार की गई है।
2030-31 तक 14,981 बसें चलाने का लक्ष्य
योजना के तहत मार्च 2028 तक करीब एक हजार बसों के एग्रीमेंट करने का लक्ष्य रखा गया है। बसों का संचालन निजी बस ऑपरेटरों के माध्यम से किया जाएगा। यात्रियों की जरूरत के अनुसार रूट तय किए जा रहे हैं और ऑपरेटरों से भी चर्चा की जा रही है।
इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने वाले ऑपरेटरों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। सरकार ने वर्ष 2030-31 तक 14,981 बसें संचालित करने का लक्ष्य रखा है।
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गांव से शहर और प्रदेश की सीमा तक कनेक्टिविटी
सुगम परिवहन सेवा का नेटवर्क गांवों से लेकर शहरों और अंतरराज्यीय मार्गों तक फैलाया जाएगा। योजना के तहत करीब 150 सिटी रूट, 450 इंटरसिटी रूट और 436 अंतरराज्यीय रूट विकसित किए जाएंगे।
यात्रियों की सुरक्षा के लिए बसों में सीसीटीवी कैमरे और आधुनिक जीपीएस सिस्टम लगाया जाएगा। इससे बस की लोकेशन ऑनलाइन ट्रैक की जा सकेगी और यात्रियों को उसके पहुंचने के संभावित समय की जानकारी भी मिल सकेगी।
इस तरह सरकार की दोनों प्रमुख योजनाओं में एक ओर एक्सप्रेस-वे के जरिए तेज कनेक्टिविटी, उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देने की तैयारी है, तो दूसरी ओर सुगम परिवहन सेवा के जरिए गांव से शहर तक सार्वजनिक परिवहन का नेटवर्क विस्तार करने की योजना है।
