बालाघाट के बैहर से बॉलीवुड तक गूंजा था नाम, ‘मेरी एक टांग नकली है...’ संवाद से घर-घर में मशहूर हुए अभिनेता मुश्ताक खान का निधन
अभिनेता मुश्ताक खान का 56 वर्ष की आयु में कैंसर से निधन हो गया, जिससे उनके पैतृक नगर बैहर और ...और पढ़ें

अभिनेता मुश्ताक खान। (सौजन्य- इंटरनेट मीडिया)
HighLights
बालाघाट जिले के बैहर में हुआ था अभिनेता मुश्ताक खान का जन्म।
मुश्ताक खान का परिवार होटल व्यवसाय से जुड़ा हे, बैहर में 'एमके होटल'।
'वेलकम' फिल्म के संवाद "मेरी एक टांग नकली है..." को काफी पसंद किया गया।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के छोटे से कस्बे बैहर से निकलकर हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता मुश्ताक खान का 56 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। कैंसर से जूझ रहे मुश्ताक पिछले करीब 15 दिनों से मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती थे। पांच साल पहले उन्हें इस बीमारी का पता चला था। हाल ही में कैंसर के दोबारा उभरने के बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। कल मुंबई में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
मुश्ताक खान के निधन की खबर से उनके पैतृक नगर बैहर और पूरे बालाघाट जिले में शोक का माहौल है। मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से निकलकर फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले मुश्ताक ने अपने अभिनय से दर्शकों के बीच खास जगह बनाई थी।
बैहर में बीता बचपन, परिवार का होटल कारोबार
मुश्ताक खान का जन्म बालाघाट जिले के बैहर में एक मध्यमवर्गीय मुस्लिम परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें अभिनय में रुचि थी। उनका परिवार लंबे समय से होटल व्यवसाय से जुड़ा है। बैहर में उनका पारिवारिक होटल ‘एमके होटल’ के नाम से जाना जाता है। मुश्ताक समय-समय पर अपने पैतृक निवास बैहर आते रहते थे।
उनके निधन पर बैहर विधायक संजय उईके ने शोक जताते हुए इसे अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि मुश्ताक एक बेहतरीन कलाकार थे। बालाघाट जैसे छोटे जिले से निकलकर उन्होंने अपनी अदाकारी के दम पर बॉलीवुड में पहचान बनाई और बैहर व बालाघाट का नाम रोशन किया।
‘मेरी एक टांग नकली है...’ संवाद ने दिलाई खास पहचान
मुश्ताक खान ने हिंदी फिल्मों और टेलीविजन में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। वर्ष 2007 में रिलीज हुई फिल्म ‘वेलकम’ में उनका संवाद ‘मेरी एक टांग नकली है...’ काफी लोकप्रिय हुआ था। इस संवाद ने उन्हें दर्शकों के बीच खास पहचान दिलाई।
उन्होंने ‘आशिकी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘गदर: एक प्रेम कथा’ और ‘जोड़ी नंबर 1’ जैसी फिल्मों में भी अभिनय किया। ज्यादातर सहायक भूमिकाओं में नजर आने वाले मुश्ताक ने अपने सहज और प्रभावशाली अभिनय से फिल्म जगत में अलग मुकाम बनाया।
यह भी पढ़ें- MP में साल के जंगलों को खोखला कर रहे 19 लाख बोरर कीटों का दहन, 4 DFO की मौजूदगी में 8 केंद्रों पर सजी चिताएं
छोटे शहर से बड़े पर्दे तक बनाई पहचान
मुश्ताक खान का सफर उन कलाकारों की कहानी है, जिन्होंने छोटे शहर से निकलकर हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनाई। उनके निधन से भारतीय मनोरंजन जगत के साथ-साथ उनके गृह जिले बालाघाट ने भी अपना एक कलाकार खो दिया है।
