BJP सांसद हिमाद्री सिंह का पति नरेंद्र मरावी से तलाक, 5 साल से रह रहे थे अलग; बेटी रहेगी मां के साथ
भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और उनके पति नरेंद्र सिंह मरावी का वैवाहिक रिश्ता अब आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया ...और पढ़ें

हिमाद्री सिंह व नरेंद्र सिंह मरावी(
HighLights
सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी का वैवाहिक रिश्ता खत्म।
अनूपपुर न्यायालय ने 3 सितंबर 2026 को तलाक डिक्री दी।
बेटी मां हिमाद्री के साथ रहेगी, गुजारा भत्ता नहीं मांगा।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। शहडोल से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और उनके पति नरेंद्र सिंह मरावी का वैवाहिक रिश्ता अब आधिकारिक रूप से खत्म हो गया है। अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम न्यायालय ने दोनों की आपसी सहमति के आधार पर 3 सितंबर 2026 को हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के तहत तलाक की डिक्री पारित की।
दोनों का विवाह 23 नवंबर 2017 को राजेंद्रग्राम में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। शादी के करीब नौ साल बाद दोनों का विवाह विच्छेद हुआ है।
2021 से अलग रह रहे थे
कोर्ट में प्रस्तुत तथ्यों के मुताबिक विवाह के बाद दोनों राजेंद्रग्राम में साथ रहे। 20 जून 2019 को उनकी बेटी गिरिशा सिंह का जन्म हुआ। इसके बाद पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर मतभेद होने लगे।
धीरे-धीरे विवाद बढ़ता गया और दोनों के बीच मिलना-जुलना भी बंद हो गया। इसके बाद 5 मई 2021 से दोनों अलग-अलग रह रहे थे।
हिमाद्री सिंह की ओर से कोर्ट में कहा गया कि अब दोनों के बीच साथ रहने की कोई संभावना नहीं है और वैवाहिक दाम्पत्य जीवन समाप्त हो चुका है। दोनों ने अपनी सहमति से विवाह विच्छेद की मांग की। दस्तावेजों में एक-दूसरे के खिलाफ कोई विशेष आरोप नहीं लगाया गया।
बेटी हिमाद्री के साथ रहेगी, नहीं मांगा गुजारा भत्ता
कोर्ट के समक्ष यह भी बताया गया कि बेटी गिरिशा सिंह अपनी मां हिमाद्री सिंह के साथ रह रही है। उसके पालन-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य में विवाह से जुड़े खर्च की जिम्मेदारी हिमाद्री सिंह उठाएंगी।
हिमाद्री ने अपने और बेटी के लिए नरेंद्र सिंह मरावी से किसी तरह के भरण-पोषण या गुजारा भत्ते की मांग नहीं की। दोनों पक्षों ने यह भी स्पष्ट किया कि विवाह के दौरान दिए गए उपहार और जेवरात को लेकर उनके बीच कोई विवाद नहीं है।
कोर्ट ने दिया था छह महीने का समय
आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया के दौरान न्यायालय ने दोनों को सुलह और पुनर्मिलाप के लिए छह महीने का समय दिया था। इस अवधि में साथ आने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं बन सकी।
समय पूरा होने के बाद दोनों ने कोर्ट को बताया कि पति-पत्नी के रूप में साथ रहना संभव नहीं है और वे अपनी इच्छा से विवाह विच्छेद चाहते हैं। इसके बाद न्यायालय ने माना कि दाम्पत्य जीवन को आगे निभाना संभव नहीं है और दोनों की सहमति के आधार पर तलाक की डिक्री पारित कर दी।
