एक नंबर कम पड़ा तो अटक गया MBBS छात्र का साल! MP हाई कोर्ट ने यूनिवर्सिटी से पूछा- क्या ग्रेस देकर बचाया जा सकता है शैक्षणिक वर्ष?
ग्वालियर के एक एमबीबीएस छात्र राम नरेश कुशवाहा का एक अंक कम होने के कारण पूरा शैक्षणिक वर्ष खतरे में ...और पढ़ें

मप्र हाई कोर्ट भवन। (फाइल फोटो)
HighLights
MBBS छात्र राम नरेश कुशवाहा का एक अंक से साल अटका।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय से ग्रेस मार्क्स पर जवाब मांगा।
कुलाधिपति को असाधारण मामलों में ग्रेस मार्क्स देने का अधिकार।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। सिर्फ एक अंक की कमी किसी मेडिकल छात्र का पूरा शैक्षणिक वर्ष रोक सकती है? ग्वालियर के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्र राम नरेश कुशवाहा की याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इसी अहम सवाल पर गंभीरता दिखाई है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के चांसलर से जवाब तलब किया है।
कोर्ट ने विश्वविद्यालय से जानना चाहा है कि क्या असाधारण परिस्थिति में छात्र को महज एक अंक ग्रेस देकर उसका शैक्षणिक वर्ष बचाया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
प्रथम वर्ष में एक अंक कम, अगले एग्जाम पर संकट
याचिका के अनुसार राम नरेश कुशवाहा एमबीबीएस सेकंड प्रोफेशनल की नियमित पढ़ाई कर रहा है। प्रथम वर्ष की परीक्षा में वह निर्धारित अंक से सिर्फ एक अंक पीछे रह गया। इस मामूली अंतर के कारण अब उसके सामने आगामी परीक्षा में शामिल होने से वंचित होने और पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित होने का संकट खड़ा हो गया है।
छात्र की ओर से कोर्ट से आग्रह किया गया है कि उसे नियमों के तहत एक अंक का ग्रेस मार्क्स देकर अगले चरण की पढ़ाई और परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाए।
है ग्रेस मार्क्स का प्रावधान
सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश यूनिवर्सिटीज कॉमन आर्डिनेंस नंबर-6 के क्लॉज 32 का प्रावधान कोर्ट के सामने रखा गया। इसमें असाधारण और कठिन मामलों में कुलाधिपति को ग्रेस मार्क्स देने की शक्ति का उल्लेख है।
इसी प्रावधान के आधार पर युगलपीठ ने चांसलर से स्पष्ट जवाब मांगा है कि क्या इस मामले में छात्र को एक अंक ग्रेस दिया जा सकता है?
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अभी ग्रेस देने का आदेश नहीं
हाई कोर्ट ने फिलहाल छात्र को ग्रेस मार्क्स देने का कोई आदेश जारी नहीं किया है। अब विश्वविद्यालय के जवाब से यह स्पष्ट होगा कि संबंधित नियम इस मामले में लागू हो सकता है या नहीं और क्या सिर्फ एक अंक की कमी के कारण अटके मेडिकल छात्र का एक साल बचाने का कानूनी रास्ता मौजूद है।
15 सितंबर की सुनवाई में विश्वविद्यालय का जवाब इस मामले की दिशा तय कर सकता है।
