'भैया, क्रूज में पानी भर रहा है…' बरगी हादसे की दिल दहलाने वाली कहानी, आंखों के सामने बिखर गए परिवार
जबलपुर के बरगी डैम क्रूज हादसे में बचे लोगों ने आपबीती सुनाई। यात्रियों ने बताया कि क्रूज में क्षमता से ...और पढ़ें

बरगी हादसे में बिखर गए परिवार (AI Generated Image)

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। बरगी डैम में हुआ क्रूज हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उन सैकड़ों पलों का दर्दनाक सिलसिला है, जिसने कई परिवारों को हमेशा के लिए तोड़ दिया। इस हादसे में जो बच गए, उनकी आंखों में अब भी खौफ जिंदा है और जो अपनों को खो चुके हैं, उनके लिए यह त्रासदी जीवनभर का जख्म बन गई है।
नीचे खतरे को लेकर चेताया, तो बोले- ऊपर आ जाओ
सिविल लाइन्स के सांई मंदिर क्षेत्र में रहने वाले मनोज सेन के लिए गुरुवार की शाम एक सामान्य सैर से शुरू हुई थी, लेकिन कुछ ही मिनटों में यह जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी में बदल गई। मेडिकल कॉलेज की कैजुअल्टी के बाहर पत्नी ज्योति सेन के शव के पास खड़े मनोज की आवाज बार-बार भर्रा रही थी। उन्होंने बताया, “क्रूज जैसे ही आगे बढ़ा, नीचे वाले हिस्से में पानी भरने लगा। मैंने घबराकर स्टाफ से कहा—भैया, नीचे पानी भर रहा है, कुछ करो… लेकिन जवाब मिला—घबराओ मत, ऊपर आ जाओ।”
मनोज के मुताबिक, इसके बाद हालात इतनी तेजी से बिगड़े कि संभलने का मौका ही नहीं मिला। तेज आंधी और बारिश ने स्थिति और भयावह कर दी। “क्रूज डगमगाने लगा और देखते ही देखते डूबने लगा। मैं किसी तरह अपने बेटे को लेकर बाहर निकल पाया, लेकिन मेरी पत्नी हमेशा के लिए छूट गई,” यह कहते हुए मनोज फफक पड़े।
परिवार के सात में तीन सदस्य लापता
इस हादसे ने कई परिवारों को एक झटके में बिखेर दिया। कामराज परिवार की कहानी इस त्रासदी की गंभीरता को और गहराई से बयान करती है। परिवार के सात सदस्य क्रूज में सवार थे, जिनमें से तीन अब भी लापता हैं। परिवार की दो महिलाओं—कार्यकुलम और भाग्ययम—की मौत हो चुकी है, जबकि दो छोटे बच्चे किसी तरह सुरक्षित बचा लिए गए। हादसे के बाद इन बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी उनके पिता के सहकर्मियों ने उठाई। अर्नव दासगुप्ता और उनके साथियों ने न सिर्फ हादसे के दौरान मदद की, बल्कि बच्चों को ढांढस बंधाकर सुरक्षित घर भी पहुंचाया।
क्रूज में नहीं थे सुरक्षा इंतजाम
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, क्रूज में यात्रियों की संख्या तय सीमा से कहीं ज्यादा थी। पाटन बायपास निवासी 11 वर्षीय तनिष्क, जो अपनी बहन तनिष्का और पिता के साथ पहली बार क्रूज की सैर पर गया था, आज भी उस खौफनाक मंजर को याद कर सिहर उठता है। उसने बताया, “क्रूज थोड़ी ही दूर गया था कि तेज हवा में बुरी तरह हिलने लगा। हम बहुत डर गए थे। कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं था। बाद में राहत टीम ने हमें बचाया।” दोनों बच्चों को मामूली चोटें आईं, लेकिन मानसिक रूप से वे अभी भी उस सदमे से उबर नहीं पाए हैं।
क्रूज में मची थी चीख-पुकार
कोतवाली क्षेत्र की अनामिका और समृद्धि ने भी उस भयावह पल को करीब से देखा। उन्होंने बताया कि अचानक मौसम बदलते ही तेज लहरें उठने लगीं और क्रूज में पानी भरने लगा। “हम नीचे के फ्लोर पर थे। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई थी। लोग एक-दूसरे से मदद की गुहार लगा रहे थे। हम किसी तरह ऊपर भागे, जहां थोड़ी राहत नजर आई। बाद में बचाव नौका ने हमें सुरक्षित बाहर निकाला,” उन्होंने बताया।
60-65 लोग थे क्रूज में, लाइफ जैकेट नहीं
हादसे में बचे एडवोकेट आनंद की आपबीती इस पूरे मामले में गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करती है। उनके अनुसार, क्रूज में करीब 60 से 65 लोग सवार थे, लेकिन किसी को भी लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी। “शाम करीब 5:15 बजे यात्रा शुरू हुई थी। शुरुआत में मौसम सामान्य था, लेकिन सुरक्षा इंतजामों की कमी साफ नजर आ रही थी। वापसी के दौरान अचानक मौसम बिगड़ा और स्थिति बेकाबू हो गई,” उन्होंने बताया।
क्रूज पायलट पानी में कूदकर भागा
आनंद के मुताबिक, सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि संकट के समय क्रूज का चालक घबरा गया और यात्रियों को छोड़कर खुद कूद गया। “जब क्रूज डगमगाने लगा, तो मैंने लोगों से नीचे जाकर संतुलन बनाने की अपील की, लेकिन तभी नाव का एक हिस्सा टूट गया और पानी तेजी से अंदर भरने लगा। लोग डस्टबिन से पानी बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हालात नियंत्रण से बाहर हो चुके थे,” उन्होंने कहा।
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आखिरकार, जब क्रूज पलट गया, तो अफरा-तफरी मच गई। आनंद ने अपनी पत्नी के साथ डूबते केबिन से बाहर निकलने के लिए कांच की खिड़की तोड़ी। “मैं आखिरी तक रेलिंग पर खड़ा रहा और लोगों को बचाने की कोशिश करता रहा,” उन्होंने भावुक होकर बताया।
हादसे से उठे गंभीर सवाल
बरगी डैम का यह हादसा कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है— क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? क्या यात्रियों की संख्या नियंत्रित थी? और सबसे अहम, क्या ऐसी त्रासदी को टाला जा सकता था?
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