बांधवगढ़ से 250 किमी दूर प्रयागराज तक पहुंचे दो हाथियों में एक की मऊगंज में करंट से मौत, वन अमले में मचा हड़कंप; दूसरे की बढ़ाई निगरानी
बांधवगढ़ से निकलकर प्रयागराज तक विचरण कर चुके दो हाथियों में से एक की मऊगंज में करंट लगने से मौत ...और पढ़ें

हाथी की करंट से मौत।
HighLights
बांधवगढ़ से निकले एक हाथी की करंट लगने से मौत।
मऊगंज क्षेत्र में बिजली लाइन की चपेट में आया हाथी।
वन विभाग दूसरे हाथी की सुरक्षा को लेकर हुआ सतर्क।
डिजिटल डेस्क, उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगलों से निकलकर करीब 250 किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर प्रयागराज की ओर बढ़े दो हाथियों में से एक की मऊगंज क्षेत्र में करंट लगने से मौत हो गई। शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात खेतों के आसपास घूमते समय हाथी बिजली लाइन की चपेट में आ गया। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया। अब दूसरे हाथी की सुरक्षा को लेकर अमला अलर्ट है।
रेडियो कॉलर से रखी जा रही थी नजर
बांधवगढ़ से निकलने के बाद दोनों हाथियों की गतिविधियों पर रेडियो कॉलर के जरिए लगातार निगरानी रखी जा रही थी। दोनों हाथी मध्य प्रदेश से निकलकर रीवा और मिर्जापुर होते हुए प्रयागराज की दिशा में आगे बढ़े थे। वन विभाग की टीमें उनके मूवमेंट पर लगातार नजर बनाए हुए थीं।
हाथियों का यह सफर बांधवगढ़ से निकलकर 250 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला। इसी दौरान मऊगंज क्षेत्र में एक हाथी बिजली लाइन के संपर्क में आ गया और करंट लगने से उसकी मौत हो गई।
बिजली लाइन और घटनास्थल की जांच
हाथी की मौत की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू की। आसपास की बिजली लाइन और परिस्थितियों का भी परीक्षण किया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हाथी किस तरह विद्युत तार के संपर्क में आया।
मृत हाथी के शव का नियमानुसार परीक्षण और पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद मौत की परिस्थितियों और बिजली लाइन से जुड़े घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
दूसरे हाथी की सुरक्षा बड़ी चुनौती
एक हाथी की मौत के बाद अब वन विभाग के सामने दूसरे हाथी को सुरक्षित रखने की चुनौती है। उसकी लोकेशन पर लगातार नजर रखी जा रही है। कोशिश है कि वह आबादी, खेतों या विद्युत लाइनों वाले संवेदनशील इलाकों में न पहुंचे। हाथी की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को भी सतर्क रहने की अपील की गई है।
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बढ़ रहा हाथियों की आवाजाही का दायरा
बांधवगढ़ क्षेत्र में पिछले कुछ समय से हाथियों की आवाजाही का दायरा बढ़ा है। वन विभाग और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की ओर से हाथियों के कॉरिडोर, आवास उपयोग और मानव-हाथी संघर्ष वाले क्षेत्रों को लेकर अध्ययन भी किया जा रहा है। रेडियो कॉलर से मिलने वाली लोकेशन के जरिए वन अमले को हाथियों की गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी।
विशेषज्ञों के अनुसार हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों में अब खेत, सड़क, रेलवे लाइन, आबादी और बिजली की लाइनें आ गई हैं। ऐसे में लंबी दूरी तय करने वाले हाथियों के लिए विद्युत लाइनें बड़ा जोखिम बन सकती हैं। मऊगंज की घटना ने एक बार फिर हाथियों के सुरक्षित कॉरिडोर और बिजली लाइनों से जुड़े खतरे को सामने ला दिया है।
