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बालाघाट में दो और आदिवासी बच्चों की मौत, कारणों का पता लगाने में जुटा स्वास्थ्य विभाग

Published: Sun, 25 Oct 2026 09:20 PM (IST)

बालाघाट के बिरसा विकासखंड में दो और आदिवासी बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग ने एक ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. बिरसा में दो आदिवासी बच्चों की मौत हुई।

  2. एक बच्चे की मौत दूध श्वास नली में जाने से।

  3. स्वास्थ्य विभाग कारणों की विस्तृत जांच कर रहा।

डिजिटल डेस्क, बालाघाट। मलेरिया, कुपोषण सहित अन्य बीमारी के प्रकोप से हो रही बच्चों की मौत के बीच बिरसा विकासखंड के आदिवासी गांवों में शुक्रवार को और दो बच्चों (एक बालिका व एक बालक) की मौत का मामला सामने आया है। बिरसा के घुम्मुर पंचायत के खैरटोला निवासी तीन वर्षीय रेखा पिता मनतू की मौत की वजह सामने नहीं आई है। जबकि, सुंदरवाही (सोनगुड्डा सेक्टर) निवासी दो माह 23 दिन के शिवम उइके की मौत श्वास नली में दूध जाने से होना बताया है।

दोनों बच्चों का हो चुका था टीकाकरण

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया ने बताया कि मृतका रेखा और शिवम उइके दोनों स्वस्थ थे। उनका टीकाकरण भी हुआ था। शिवम के मामले में पता चला है कि स्तनपान के वक्त उसकी श्वास नली में दूध जाने से उनकी मौत हुई है, लेकिन रेखा की मौत किन कारणों से हुई है, ये स्पष्ट नहीं है।

सीएमएचओ ने बाल मृत्यु समीक्षा (चाइल्ड डेथ रिव्यू) कराने की बात कही है। उन्होंने बताया कि मौत किन परिस्थितियों और किन वास्तविक कारणों से हुई है, इसकी विस्तृत जांच की जा रही है।

वहीं, 21 अक्टूबर को बिरसा के मातला गांव के बिसरू परते की छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ अस्तपाल में हुई मौत के मामले में ये बात सामने आई है कि बिसरू को मलेरिया था। जांच में वह पीएफ पॉजिटिव पाया गया था। सीएमएचओ ने बताया कि खैरागढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से बिसरू की रिपोर्ट मांगी गई है।

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नवजात को दूध पिलाने के बाद दिलाएं डकार

सीएमएचओ डॉ. दाहिया ने बताया कि बच्चे को स्तनपान के बाद हमेशा डकार दिलाना चाहिए। बच्चे अक्सर स्तनपान के दौरान दूध मुंह में रखते हैं। सोते वक्त यही दूध उनकी आहार या भोजन नली में जाने के बाद श्वास नली में चला जाता है। माताओं को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं इसके लिए जागरूक करती हैं।