विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बालाघाट के वनांचल में डेढ़ वर्षीय मासूम की मौत, स्वास्थ्य विभाग ने जताई दूध श्वासनली में जाने की आशंका

Published: Mon, 26 Oct 2026 10:25 PM (IST)

बालाघाट के वनांचल में डेढ़ वर्षीय बच्ची परदेसी मेरावी की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने दूध श्वासनली में जाने ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. बालाघाट में डेढ़ वर्षीय बच्ची परदेसी मेरावी की मौत।

  2. दूध श्वासनली में जाने (एस्पिरेशन) की आशंका।

  3. चार दिन में दूसरी मौत से वनांचल में चिंता।

डिजिटल डेस्क, बालाघाट। जिले के वनांचल क्षेत्र में बच्चों की मौत के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। बिरसा विकासखंड की घुम्मुर पंचायत के खैरटोला (चिखाली) में सोमवार को डेढ़ साल की बच्ची परदेसी मेरावी की मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, सुबह मां उसे दूध पिला रही थी, तभी उसे लगातार खांसी होने लगी। करीब दो घंटे के घटनाक्रम के बाद बच्ची ने दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य विभाग ने दूध पीते समय श्वासनली में दूध जाने यानी एस्पिरेशन को मौत का संभावित कारण बताया है। हालांकि, मौत की वास्तविक वजह की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

दूध पिलाते समय शुरू हुई लगातार खांसी

परदेसी के पिता समारू मेरावी ने स्वास्थ्य अधिकारियों को बताया कि रविवार रात बच्ची को हल्की खांसी आई थी। सोमवार सुबह करीब सात बजे जब मां उसे दूध पिला रही थी, तभी उसे लगातार खांसी होने लगी। लगभग एक घंटे तक खांसी जारी रही और करीब नौ बजे बच्ची की मौत हो गई।

सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जानकारी जुटाई। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद बच्ची का शव परिजनों को सौंप दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, मौत के कारणों की जांच की जा रही है।

जांच में स्वस्थ मिली थी बच्ची, टीकाकरण भी पूरा

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया के मुताबिक, स्वास्थ्य दल ने 23 और 24 अक्टूबर को परदेसी की जांच की थी। उस दौरान बच्ची चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ पाई गई थी। उसमें बुखार, खांसी, जुकाम या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण नहीं मिले थे।

टीकाकरण रिकॉर्ड के अनुसार, बच्ची को पेंटावैलेंट और खसरा-रूबेला के टीके भी लगाए जा चुके थे। डॉ. दाहिया ने बताया कि दूध पीते समय खांसी शुरू होने की जानकारी के आधार पर एस्पिरेशन को मौत का एक संभावित कारण माना जा रहा है। अंतिम कारण की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

यह भी पढ़ें- बालाघाट में दो और आदिवासी बच्चों की मौत, कारणों का पता लगाने में जुटा स्वास्थ्य विभाग

चार दिन में दूसरी बच्ची की मौत से बढ़ी चिंता

खैरटोला में इससे पहले 23 अक्टूबर को तीन वर्षीय बच्ची रेखा की भी मौत हुई थी। उसकी मौत का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है। अब परदेसी की मौत के बाद क्षेत्र में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

वनांचल क्षेत्रों में मलेरिया और कुपोषण जैसी समस्याओं के बीच बच्चों की मौत के कारणों का पता लगाना स्वास्थ्य विभाग के लिए अहम है। दोनों बच्चियों की मौत के कारणों को अलग-अलग जांच के आधार पर स्पष्ट किया जाना जरूरी है। फिलहाल परदेसी की मौत में एस्पिरेशन की आशंका जताई गई है, जबकि रेखा की मौत का कारण अज्ञात बना हुआ है।