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रेल यात्रियों को मिलेगा ‘ग्रीन मील’ अनुभव, वंदे भारत समेत प्रीमियम ट्रेनों में बायोडिग्रेडेबल थालियों में भोजन परोसने की तैयारी

Published: Fri, 09 Jan 2026 01:56 PM (IST)

आईआरसीटीसी मार्च से वंदे भारत सहित चुनिंदा प्रीमियम ट्रेनों में यात्रियों को बायोडिग्रेडेबल थालियों में भोजन परोसेगा। फल-सब्जियों के छिलकों ...और पढ़ें

वंदे भारत एक्सप्रेस (प्रतीकात्मक चित्र)

वंदे भारत एक्सप्रेस (प्रतीकात्मक चित्र)

HighLights

  1. मार्च से वंदे भारत सहित प्रीमियम ट्रेनों में बायोडिग्रेडेबल थालियां।

  2. फल-सब्जियों के छिलकों से बनी, पर्यावरण के अनुकूल थालियां।

  3. प्लास्टिक कचरा कम होगा, यात्रियों को सुरक्षित भोजन मिलेगा।

डिजिटल डेस्क, इंदौर। रेल यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल सुविधा देने की दिशा में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) ने बड़ा कदम उठाया है। आगामी मार्च से वंदे भारत एक्सप्रेस सहित चुनिंदा प्रीमियम ट्रेनों में यात्रियों को भोजन अब पारंपरिक प्लास्टिक की थालियों की जगह बायोडिग्रेडेबल थालियों में परोसा जाएगा।

फल-सब्जियों के छिलकों, कागज और अन्य प्राकृतिक तत्वों से तैयार ये थालियां पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। पहले चरण में सफल रहने पर इस व्यवस्था को अन्य प्रीमियम और लंबी दूरी की ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा।

आईआरसीटीसी पश्चिम क्षेत्र के जनसंपर्क अधिकारी एके सिंह के अनुसार, यह नई व्यवस्था इंदौर से चलने वाली ट्रेनों में भी लागू होगी। रेलवे और आईआरसीटीसी लंबे समय से रेल परिसरों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के अभियान पर काम कर रहे हैं और यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्लास्टिक कचरे का निस्तारण मुश्किल

हर दिन हजारों यात्रियों को भोजन परोसने के कारण रेलवे में हर माह भारी मात्रा में डिस्पोजेबल प्लास्टिक कचरा निकलता है, जिसके निपटान में समय, पैसा और संसाधन खर्च होते हैं। बायोडिग्रेडेबल थालियों के इस्तेमाल से यह समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। इससे न केवल कचरे का बोझ कम होगा, बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में भी कमी आएगी।

तीन से छह महीने में मिट्टी में मिल जाती है थाली

बायोडिग्रेडेबल थालियों की खासियत यह है कि उपयोग के बाद ये तीन से छह महीने में गलकर मिट्टी में मिल जाती हैं, जबकि प्लास्टिक की थालियों को नष्ट होने में कई वर्ष लग जाते हैं। प्लास्टिक के टूटने से बनने वाला माइक्रोप्लास्टिक मिट्टी, पानी और खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर मानव स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाता है, जो इन थालियों के उपयोग से पूरी तरह रोका जा सकेगा।

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इसके अलावा प्लास्टिक की थालियों में गर्म भोजन परोसने से हानिकारक रसायनों के निकलने का खतरा रहता है। बायोडिग्रेडेबल थालियों से यह जोखिम भी समाप्त हो जाएगा, जिससे यात्रियों को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर भोजन मिलेगा।

पहले से प्लास्टिक कप-थैलियों पर रोक

रेलवे पहले ही प्लास्टिक कप और थैलियों पर रोक लगाकर कागज के विकल्प अपना चुका है। अब बायोडिग्रेडेबल थालियों के उपयोग से यह प्रयास और मजबूत होगा। आईआरसीटीसी ने जन आहार और फूड प्लाजा संचालकों को भी केवल पर्यावरण-अनुकूल सामग्री के इस्तेमाल के निर्देश दिए हैं।

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टेंडर प्रक्रिया जारी

आईआरसीटीसी अधिकारियों के अनुसार इस योजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। टेंडर पूर्ण होने के बाद मार्च से चुनिंदा ट्रेनों में इसकी शुरुआत की जाएगी और बाद में इसे सभी लंबी दूरी की ट्रेनों में लागू किया जाएगा। इस पहल से एक ओर प्लास्टिक कचरे की समस्या कम होगी, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण को भी बड़ा लाभ मिलेगा।