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उज्जैन में डोल ग्यारस पर राजसी ठाठ से निकले कालभैरव, गार्ड ऑफ ऑनर के बीच 4 किमी चला भव्य कारवां; उमड़ा आस्था का सैलाब

Published: Tue, 22 Sep 2026 09:36 PM (IST)

जल झूलनी एकादशी पर उज्जैन में बाबा कालभैरव की शाही सवारी निकली, जिसमें भक्ति और राजसी वैभव का अद्भुत संगम ...और पढ़ें

उज्जैन में मंगलवार को डोल ग्यारस पर निकाली गई सेनापति भगवान कालभैरव (इनसेट में) की सवारी पर पुष्प वर्षा करते श्रद्धालु।

उज्जैन में मंगलवार को डोल ग्यारस पर निकाली गई सेनापति भगवान कालभैरव (इनसेट में) की सवारी पर पुष्प वर्षा करते श्रद्धालु।

HighLights

  1. बाबा कालभैरव की शाही सवारी डोल ग्यारस पर निकली।

  2. सिंधियाशाही पगड़ी धारण कर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

  3. चार किलोमीटर मार्ग पर हजारों श्रद्धालुओं ने स्वागत किया।

डिजिटल डेस्क, उज्जैन। जल झूलनी एकादशी यानी डोल ग्यारस पर मंगलवार को उज्जैन में भक्ति, परंपरा और राजसी वैभव का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान महाकाल के सेनापति बाबा कालभैरव शाही अंदाज में नगर भ्रमण पर निकले। चांदी की पालकी में विराजित बाबा की एक झलक पाने के लिए सवारी मार्ग पर हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। करीब चार किलोमीटर लंबे मार्ग पर तीन घंटे तक जयकारों और भक्ति का उल्लास छाया रहा।

नगर भ्रमण से पहले भगवान कालभैरव को ग्वालियर से लाई गई सिंधियाशाही की शाही पगड़ी धारण कराई गई। इसके बाद मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र बल की टुकड़ी ने बाबा को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। दोपहर करीब 3:30 बजे कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने भगवान कालभैरव के रजत मुखारविंद और चरण पादुकाओं का पूजन किया। इसके बाद पालकी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया।

पुलिस बैंड से लेकर हाथी-घोड़े तक, दिखा राजसी कारवां

भगवान कालभैरव की सवारी में पुलिस बैंड, सशस्त्र बल की टुकड़ी, धार्मिक झांकियां, अखाड़े और हाथी-घोड़े शामिल रहे। सवारी जहां से भी गुजरी, श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर बाबा का स्वागत किया। परंपरा के अनुसार मार्ग में अलग-अलग स्थानों पर पालकी का पूजन भी किया गया।

जेल तिराहे पर हुआ पूजन, शिप्रा जल से अभिषेक

कालभैरव मंदिर से शुरू हुई सवारी नया बाजार, भैरवगढ़ नाका, माणकचौक और महेंद्र मार्ग होते हुए केंद्रीय जेल तिराहे पहुंची। यहां जेल अधीक्षक ने भगवान कालभैरव की पालकी का पूजन किया।

इसके बाद सवारी पारंपरिक मार्ग से होते हुए सिद्धवट पहुंची। यहां वैकुंठ द्वार पर पुजारियों ने शिप्रा जल से बाबा कालभैरव और उनकी चरण पादुकाओं का पूजन किया। पूजन के बाद सवारी ब्रजपुरा और जेल तिराहे से होते हुए वापस कालभैरव मंदिर पहुंची।

उमड़े श्रद्धालु

कालभैरव की सवारी के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी। सवारी मार्ग पर जिसे जहां जगह मिली, वहीं खड़े होकर बाबा के दर्शन का इंतजार करता नजर आया। मंदिर के आसपास छोटे-छोटे टीलों, पेड़ों और ऊंची जगहों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु खड़े रहे।

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शिव शक्ति और गणपति के रूप में पहुंचे भक्त

सवारी में श्रद्धालु अलग-अलग देवी-देवताओं का स्वरूप धारण कर शामिल हुए। शिव-शक्ति और गणपति के रूप में सजे भक्त आकर्षण का केंद्र रहे। धार्मिक झांकियों और अखाड़ों ने भी सवारी की भव्यता बढ़ाई।

इस तरह डोल ग्यारस पर बाबा कालभैरव की सवारी ने उज्जैन की धार्मिक परंपरा, राजसी विरासत और लोक आस्था को एक साथ जीवंत कर दिया।