विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'रामायणकाल में भी था AI, मारीच ने रचा था डीपफेक'; उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद में बोले स्वामी अवधेशानंद गिरि

Published: Fri, 18 Sep 2026 11:55 PM (IST)

उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद में युवाओं को आधुनिक चुनौतियों के बीच विवेक और सनातन मूल्यों से जुड़ने का ...और पढ़ें

मातृश्री स्मृति अनंतलक्ष्मी, मनोज मुंतशिर और जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद। (फोटो- जागरण)

मातृश्री स्मृति अनंतलक्ष्मी, मनोज मुंतशिर और जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद। (फोटो- जागरण)

HighLights

  1. स्वामी अवधेशानंद गिरि ने मारीच प्रसंग को रामायणकालीन डीपफेक बताया।

  2. विष्णु प्रकाश त्रिपाठी ने एआई को औजार बताते हुए विवेक पर जोर दिया।

  3. युवाओं को आधुनिक चुनौतियों के बीच सनातन मूल्यों से जुड़ने का संदेश।

डिजिटल डेस्क, उज्जैन। युवा धर्म संसद में एआई के दौर में सत्य की पहचान से लेकर जीवन में सही निर्णय लेने तक युवाओं को आधुनिक चुनौतियों के बीच विवेक और सनातन मूल्यों से जुड़ने का संदेश दिया गया। उज्जैन में आयोजित तीन दिवसीय आयोजन में संतों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने धर्म, संस्कृति, संवाद, तकनीक और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर युवाओं से संवाद किया।

स्वामी अवधेशानंद गिरि ने रामायण के मारीच प्रसंग को डीपफेक का उदाहरण बताते हुए कहा कि एआई कभी सत्य को नहीं पकड़ सकेगा। वहीं, दैनिक जागरण-नईदुनिया समूह के कार्यकारी संपादक विष्णु प्रकाश त्रिपाठी ने एआई को केवल औजार बताते हुए युवाओं से अपने विवेक और मौलिक सोच पर विश्वास रखने का आह्वान किया।

‘अस्तित्वपरक अवधारणा एवं चारित्रिक उत्तरदायित्व’ विषय पर संबोधित करते हुए स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि रामायणकाल में भी एआई था। मारीच ने मायावी स्वर से माता सीता को भ्रमित किया। यह डीपफेक जैसा था। उन्होंने कहा कि जो धारण करता है, वही धर्म है। जो शाश्वत और सनातन है, वही सत्य है। रूप बदलता रहता है, इसलिए वह सत्य नहीं है।

स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि जहां से प्रपंच शुरू होता है, वह मन है। ‘मैं’ और ‘मेरा’ का अंतर समझना तथा नित्य-अनित्य में भेद करना ही विवेक है। उन्होंने कहा कि पश्चिम में एआइ अभी शैशव अवस्था में है, जबकि हमारे यहां रामायणकाल में ही माया का ऐसा प्रयोग दिखाई देता है। मारीच के ‘हे लक्ष्मण, मुझे बचाओ’ कहने पर सीता ने उसे राम का स्वर समझा और लक्ष्मण को भेज दिया।

Ujjain YS VPT 215

एआई से डरने की जरूरत नहीं, वह सिर्फ एक औजार: विष्णु प्रकाश त्रिपाठी

युवा धर्म संसद में ‘एआई से डरने की आवश्यकता नहीं, वह सिर्फ एक औजार है’ का सनातन विचार प्रमुखता से गूंजा। दैनिक जागरण-नईदुनिया समूह के कार्यकारी संपादक विष्णु प्रकाश त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि एआई नाम के इस कथित भूत से वही लोग भयाक्रांत हैं, जिन्हें अपने विवेक, धर्मानुमोदित ज्ञान और मौलिक सोच पर विश्वास नहीं है।

उन्होंने कहा कि तकनीक चाहे कितनी भी अत्याधुनिक क्यों न हो जाए, वह इंसानी चेतना, आत्म सत्य और धर्म संवेदनाओं का स्थान कभी नहीं ले सकती। जब व्यक्ति आत्महीनता का शिकार होता है, तब निरंकुशता हावी होती है।

विष्णु प्रकाश त्रिपाठी युवा धर्म संसद के उद्घाटन सत्र के बाद ‘निरंकुश संवाद पद्धति तथा सूचना एवं विचार का संघर्ष’ विषय पर युवाओं से संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सूचना और समाचार एक उत्पाद (प्रोडक्ट) की तरह हैं और पाठक या दर्शक उसके उपभोक्ता हैं। किसी विचार को कितना ग्रहण करना है, यह उपभोक्ता के अपने विवेक का निर्णय है।

यदि कोई टीवी चैनल या डिजिटल माध्यम समय व्यर्थ कर रहा हो अथवा समाज में भ्रम फैला रहा हो, तो उसे तुरंत 'स्विच आफ' कर देना चाहिए। यही सबसे बड़ा नियंत्रण है।

इसी विषय पर आध्यात्मिक गुरु पुंडरिक गोस्वामी, मां सद्विद्यानंद, इंदौर भारतीय प्रबंध संस्थान के निदेशक हिमांशु राय और प्रज्ञा प्रवाह के जे. नंदकुमार ने भी युवाओं से संवाद किया। कार्यक्रम में सेवाज्ञा संस्थानम् के संरक्षक आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण महाराज सहित कई ख्यात हस्तियां और देशभर से पहुंचे 1200 से अधिक युवा शामिल हुए हैं।

यह भी पढ़ें- उज्जैन में युवा धर्म संसद: संघ प्रमुख मोहन भागवत बोले- धर्म हमारे DNA में, युवा इसकी चर्चा कर रहे यह खुशी की बात

युवा शक्ति के लिए जीवन प्रबंधन के सूत्र

सूचना में सुगंध और भाव आवश्यक : सूचना में विचार और संवेदना का समावेश ही सच्ची पत्रकारिता है।
कछुए की निरंतरता से मिलेगी सिद्धि : आलस्य छोड़ निरंतरता, वैचारिकता और अटूट संकल्प से ही सफलता मिलेगी।
युवा स्वयं रचें अपना विधान : निरंतर अध्ययन और वैचारिकता से सही दृष्टि, ध्येय और संकल्प बनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।

युवा धर्म संसद में वक्ताओं के विचार

पुंडरीक गोस्वामी : सूचना गति मांगती है, विचार गहराई
धर्म जीवन जीने की अनुशासित कला है। युवाओं को आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। विवेक, सेवा और राष्ट्र-प्रथम के भाव से सशक्त भारत का निर्माण होगा।

जे. नंदकुमार : संवाद में आत्म-नियंत्रण और सत्यनिष्ठा जरूरी
मीडिया का उद्देश्य सत्य और तत्वबोध कराना होना चाहिए, न कि टीआरपी के लिए भ्रामक सूचना फैलाना। आंतरिक अनुशासन, आत्म-नियंत्रण और तथ्यपरक संवाद आवश्यक हैं।

मां सद्विद्यानंद : स्वयं सही निश्चय करना सीखें
गीता का संदेश है कि ज्ञान प्राप्त कर मनुष्य स्वयं अपने विवेक से निर्णय ले। सलाह लेना ठीक है, लेकिन अंतिम निश्चय अपना होना चाहिए।

प्रो. हिमांशु राय : मशीन नहीं, विवेक तय करेगा शिक्षा
सबसे शिक्षित व्यक्ति वह होगा जो सही सूचना पर विश्वास करने का विवेक रखता है। युवा प्रश्न करने का साहस, खुले विचार और निर्णय में संयम रखें। मतभेद नहीं, मनभेद समस्या है।

मनोज मुंतशिर: भगवामय भारत का सपना साकार, अब संस्कृति से जुड़ें युवा
आज भारत भगवामय हो गया है। अब युवाओं को अपनी संस्कृति से जुड़ना होगा। गीता और रामायण पढ़कर धर्म को समझें और जीवन में उतारें।

श्रीनिवास बरखेड़ी: युवाओं को बताएं क्यों करना है
युवाओं को केवल क्या करना है, यह नहीं, क्यों करना है, यह भी बताना होगा। धर्म को जानने के साथ जीना भी जरूरी है। युवा असंभव को संभव कर सकते हैं।

स्मृति अनंतलक्ष्मी: भारत ने शून्य ही नहीं, डिजिटल सिस्टम दिया
डीपफेक के दौर में सही-गलत पहचानना कठिन है। विद्यार्थियों को भारतीय विज्ञानियों और भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों की जानकारी होनी चाहिए। एआइ को समझकर ही उसके प्रभावों से निपटा जा सकता है।