अपने घर से मस्जिद तक... सिंहस्थ के लिए उज्जैन के विकास में हर तबका दे रहा योगदान; जनभागीदारी की अद्भुत तस्वीर
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण और आधारभूत ढांचे के विकास में जनभागीदारी की अद्भुत मिसाल ...और पढ़ें

उज्जैन की शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को गिराने के लिए मुस्लिम राजी हो गए।
HighLights
सिंहस्थ की तैयारियों में उज्जैन में जनभागीदारी भी दिख रही।
सीएम मोहन यादव ने पैतृक मकान का हिस्सा स्वयं तोड़ा।
सड़क चौड़ीकरण में विभिन्न समुदायों के लोग कर रहे सहयोग।
डिजिटल डेस्क, उज्जैन। उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियां जारी हें। इस धार्मिक महाकुंभ के आयोजन के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, सुगम आवागमन और बेहतर व्यवस्थाओं के लिए शहर में बड़े पैमाने पर आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। इसी क्रम में सड़कों के चौड़ीकरण, यातायात व्यवस्था और अन्य निर्माण कार्यों को गति दी जा रही है। इन तैयारियों के बीच उज्जैन से जनभागीदारी की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो किसी भी बड़े आयोजन की सफलता के लिए सबसे बुनियादी पहलू को रेखांकित करती है।
सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले भवनों और धार्मिक संरचनाओं के प्रभावित हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया में अलग-अलग समाजों की ओर से सहयोग सामने आया है। कहीं निजी भवन का हिस्सा हटाया जा रहा है, कहीं धार्मिक संरचना का प्रभावित हिस्सा। यही नहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अपना पैतृक मकान भी इस चौड़ीकरण की जद में आया और उन्होंने स्वयं आगे बढ़कर अपने घर के प्रभावित हिस्से को तोड़ने की शुरुआत की।
सीएम ने पुश्तैनी मकान पर चलाई गैंती
उज्जैन के अब्दालपुरा क्षेत्र में खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक 700 मीटर से अधिक मार्ग को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना है। इस परियोजना की जद में 270 से ज्यादा भवन प्रभावित हो रहे हैं। इनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पैतृक मकान और उनकी बहन कलावती यादव का मकान भी शामिल है।

27 सितंबर को मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वयं अपने पैतृक घर पहुंचे। विधि-विधान से पूजन के बाद उन्होंने अपने हाथ से गैंती चलाकर सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत की। सिंहस्थ की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह संदेश दिया कि विकास की जरूरत सामने हो तो उसका दायरा पद, प्रतिष्ठा या व्यक्ति देखकर नहीं बदलेगा।
मंदिर से मस्जिद तक, सिंहस्थ के लिए सहयोग की साझा भावना
सिंहस्थ की तैयारियों में सड़क चौड़ीकरण का काम किसी एक वर्ग या समुदाय से जुड़ा विषय नहीं है। जिन स्थानों पर सड़क के लिए अतिरिक्त जगह आवश्यक है, वहां प्रभावित हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया चल रही है।
इसी क्रम में धार्मिक संरचनाओं के प्रभावित हिस्से भी सामने आए हैं। कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग के चौड़ीकरण की योजना में कई धार्मिक स्थल प्रभावित क्षेत्र में आए हैं। कई संरचनाओं के हिस्से आपसी सहमति से हटाए भी गए हैं। यही इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पक्ष है। सिंहस्थ की तैयारियों में हिंदू-मुस्लिम समेत अलग-अलग धर्मों और सामाजिक वर्गों के लोगों की भागीदारी दिखाई दे रही है।
शाही मस्जिद प्रकरण: तस्वीर को पूरे संदर्भ में देखना जरूरी
शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई इसी सड़क चौड़ीकरण परियोजना से जुड़ी है। प्रशासन और शहर काजी सहित मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के बीच प्रभावित हिस्से को हटाने को लेकर सहमति बनी थी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की गई। हालांकि, 28 सितंबर को कार्रवाई के दौरान मौके पर भीड़ जुटी, विरोध हुआ और पथराव की स्थिति बनी।
पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। एक तरफ स्थानीय विरोध दर्ज हुआ, तो दूसरी तरफ प्रशासन और समुदाय के प्रतिनिधियों के बीच संवाद और पहले बनी सहमति की बात भी सामने आई है।
उज्जैन की असली पहचान उसकी साझा भागीदारी में
सिंहस्थ सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उज्जैन की अर्थव्यवस्था, पर्यटन, संस्कृति और सामाजिक जीवन को प्रभावित करने वाला विराट अवसर है। इसकी तैयारियां भी उतनी ही व्यापक हैं। ऐसे में सरकार और प्रशासन के प्रयास तभी सफल होंगे, जब समाज भी उसके साथ खड़ा हो और ऐसा हो भी रहा है।
सड़क चौड़ीकरण के लिए किसी परिवार का अपने भवन का हिस्सा छोड़ना हो, किसी धार्मिक स्थल के प्रभावित हिस्से को हटाने में सहयोग हो या मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा अपने पैतृक घर के बाहरी सिरे को स्वयं तोड़ना, ये सभी घटनाएं इसी व्यापक जनभागीदारी की अलग-अलग तस्वीरें हैं। सिंहस्थ की भव्यता मात्र नए मार्गों, पुलों, घाटों और सुविधाओं से नहीं बनेगी। इसकी असली खूबसूरती तब सामने आएगी, जब उज्जैन का हर वर्ग इसे अपना आयोजन मानेगा।
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उज्जैन के विकास की मंजिल साझा है
हिंदू हो या मुस्लिम, जैन हो या सिख, किसी भी धर्म और समाज से आने वाला नागरिक, सिंहस्थ उज्जैन की साझा विरासत और साझा जिम्मेदारी है। यही भावना आने वाले सिंहस्थ को सिर्फ भव्य आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता और सद्भाव की भी मिसाल बना सकती है।
