महाकाल की नगरी ने 'आतिथ्य' के लिए लिखा 'त्याग' का इतिहास, किसी ने घर तोड़ा तो किसी ने दुकान; 10000 संपत्तियां प्रभावित
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए 64 सड़कों के चौड़ीकरण का कार्य जारी है, जिसमें शहरवासी स्वेच्छा से ...और पढ़ें

उज्जैन मे शाही मस्जिद का बाधक हिस्सा तोड़ने के दौरान की गई बैरिकेडिंग। (फाइल फोटो)
धीरज गोमे, उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन इन दिनों सिर्फ सड़कों और निर्माण परियोजनाओं से नहीं बदल रही, बल्कि यहां आस्था और आतिथ्य की ऐसी मिसाल भी देखने को मिल रही है, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। सिंहस्थ 2028 में देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रास्ते सुगम बनाने की कवायद में शहरवासी अपनी पीढ़ियों पुरानी संपत्तियों तक का त्याग कर रहे हैं।
कहीं घर की दीवार टूटी, कहीं दुकान का हिस्सा हटाया गया और कहीं वर्षों पुराना व्यापारिक प्रतिष्ठान प्रभावित हुआ। खास बात यह है कि कई लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार करने के बजाय खुद आगे बढ़कर अपने हाथों से निर्माण हटाया। उनका कहना है कि सड़कें चौड़ी होंगी तो महाकाल के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं को आवाजाही में परेशानी नहीं होगी।
64 सड़कों का मेगा प्लान, करीब 10 हजार संपत्तियां प्रभावित
सिंहस्थ 2028 में अनुमानित भारी भीड़ को देखते हुए उज्जैन प्रशासन ने शहर के 64 प्रमुख मार्गों के चौड़ीकरण का मेगा प्लान शुरू किया है। इस योजना की जद में करीब 10 हजार संपत्तियां आई हैं। इनमें 3500 से अधिक पक्के मकान, होटल और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं।
कई परिवारों के लिए यह फैसला आसान नहीं था। जिस दुकान से वर्षों से परिवार की रोजी-रोटी चल रही थी या जिस घर में पीढ़ियां पली-बढ़ीं, उसके हिस्से को हटाना भावनात्मक रूप से भी चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद लोगों ने सिंहस्थ की तैयारियों और श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता दी।
इस त्याग में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल हैं। सिंहस्थ की तैयारियों के लिए सड़क चौड़ीकरण की जद में आए उनके पैतृक मकान के हिस्से को भी हटाया गया है।
धर्मस्थलों ने भी दिखाई सहमति, हटेंगे बाधक हिस्से
सड़क चौड़ीकरण में केवल मकान और दुकानें ही प्रभावित नहीं हुई हैं। उज्जैन के विभिन्न मार्गों पर आने वाले करीब 80 धार्मिक स्थलों के प्रबंधकों ने भी सहमति और सहयोग का परिचय दिया है।
मंदिरों और अन्य धर्मस्थलों के परिसरों में आने वाले बाधक हिस्सों की छत, दीवार और मीनार तक हटाने की सहमति दी गई है। इसके जरिए धार्मिक आस्था के साथ शहर के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधा को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
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महाकाल से कालभैरव तक बदलेगा शहर का नक्शा
उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के अनुसार, शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल महाकाल, गोपाल मंदिर और कंठाल से लेकर कालभैरव व बिजासन माता मंदिर तक के रास्तों का स्वरूप बदल रहा है।
जिन संकरी गलियों में पहले दो वाहनों का एक साथ निकलना मुश्किल होता था, वहां अब चौड़ी सड़कें तैयार की जा रही हैं। प्रशासन का दावा है कि इससे सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।
रिकॉर्ड के मुताबिक, उज्जैन में 64 मार्गों का यह चौड़ीकरण अब तक का सबसे बड़ा ढांचागत बदलाव माना जा रहा है। इससे पहले सिंहस्थ 2004 के दौरान दो प्रमुख मार्गों और 2016 के सिंहस्थ में चार मार्गों का चौड़ीकरण किया गया था।
