सास परीक्षार्थी, 'अक्षर साथी' के रूप में बहू बनी गुरु! उज्जैन में साक्षरता अभियान की दिखी अनूठी तस्वीर
उज्जैन में 'उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम' के तहत 70,220 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी, जिसमें बहू ने अपनी सास को ...और पढ़ें

परीक्षा देने घूंघट ओढ़कर पहुंची महिला। (फोटो- जागरण)
HighLights
उज्जैन में 70,220 परीक्षार्थियों ने साक्षरता परीक्षा में भाग लिया।
बहू ने 'अक्षर साथी' बनकर अपनी सास को पढ़ाया, बनी प्रेरणा।
बुजुर्गों सहित घूंघट में महिलाओं ने भी उत्साह से परीक्षा दी।
डिजिटल डेस्क, उज्जैन। पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती और सीखने का जज्बा रिश्तों व सामाजिक परंपराओं से भी बड़ा होता है। शनिवार को उज्जैन जिले में आयोजित ‘उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के दौरान यह बात हकीकत बनकर सामने आई। गांवों में कहीं घूंघट की ओट में बैठी महिलाएं कलम-कॉपी लेकर परीक्षा देती नजर आईं, तो कहीं बहू ने ‘अक्षर साथी’ बनकर अपनी ही सास की साक्षरता परीक्षा ली। बुजुर्ग परीक्षार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। इन दृश्यों ने साक्षरता अभियान को केवल परीक्षा नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की प्रेरक कहानी बना दिया।
जिले के 1,263 परीक्षा केंद्रों पर कुल 70,220 परीक्षार्थियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। अभियान का उद्देश्य 15 वर्ष से अधिक आयु के उन लोगों को पढ़ने-लिखने और बुनियादी शिक्षा से जोड़ना है, जो किसी कारणवश औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए थे।
शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव ने किया निरीक्षण
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की अतिरिक्त सचिव अर्चना शर्मा अवस्थी ने शनिवार को शासकीय माध्यमिक विद्यालय पालखंदा और शासकीय माध्यमिक विद्यालय नरवर स्थित परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने परीक्षा की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और परीक्षार्थियों से सीधे संवाद कर उनका उत्साह बढ़ाया।
केंद्रों पर नवसाक्षरों की भागीदारी और सीखने के प्रति उनकी लगन देखकर उन्होंने व्यवस्थाओं की सराहना की। ग्रामीण क्षेत्र में बहू के अपनी सास की परीक्षा लेने का प्रसंग भी सामाजिक सहभागिता की अनूठी मिसाल के रूप में सामने आया। इसने दिखाया कि शिक्षा का प्रसार केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार और समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम भी बन सकता है।
घूंघट की ओट से परीक्षा केंद्र तक पहुंचा शिक्षा का उजाला
परीक्षा केंद्रों पर ग्रामीण महिलाओं की मौजूदगी अभियान की सबसे खास तस्वीरों में शामिल रही। पारंपरिक सामाजिक परिवेश में रहने वाली महिलाएं भी अब पढ़ने-लिखने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। वहीं, 15 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक ने परीक्षा में भाग लेकर साबित किया कि सीखने की कोई तय उम्र नहीं होती।
परीक्षार्थियों का केंद्रों पर तिलक लगाकर स्वागत किया गया। इससे परीक्षा के माहौल में उत्साह और अपनत्व का रंग भी देखने को मिला।
सुबह 10 से शाम 5 बजे तक चला परीक्षा का आयोजन
जिले के सभी निर्धारित केंद्रों पर परीक्षा शांतिपूर्ण और सुचारू ढंग से संपन्न हुई। परीक्षार्थियों को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच अपनी सुविधानुसार एक घंटे की लिखित परीक्षा देने का अवसर मिला।
जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी संजय शर्मा के अनुसार, निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा समाप्त होते ही उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन का काम शुरू कर दिया गया है। मूल्यांकन पूरा होने के बाद परिणाम अधिकृत पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।
निरीक्षण के दौरान राज्य शिक्षा केंद्र के अपर संचालक अरुण सिंह, राज्य साक्षरता नियंत्रक डॉ. राकेश दुबे सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
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एक नजर में साक्षरता परीक्षा
कुल परीक्षार्थी: 70,220
कुल परीक्षा केंद्र: 1,263
पात्र आयु वर्ग: 15 वर्ष से अधिक
निरीक्षण किए गए केंद्र: पालखंदा और नरवर
