महाकाल मंदिर का सदियों पुराना वैभव और निखरेगा, 10.27 करोड़ से होगा जीर्णोद्धार; खास मिश्रण से भरी जाएंगी दरारें
उज्जैन के ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर का 10.27 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार किया जाएगा, जिसमें मुख्य शिखर और स्वर्ण ...और पढ़ें

महाकाल मंदिर परिसर में मचान बनाया जा रहा।
HighLights
महाकाल मंदिर परिसर में मचान बांधने का काम शुरू।
प्राचीन पद्धति से दरारें भरेंगे, स्वर्ण सज्जा नवीनीकृत होगी।
सीबीआरआई रुड़की के विशेषज्ञों के निर्देशन में होगा काम।
डिजिटल डेस्क, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर अपने प्राचीन वैभव और स्वर्णिम आभा में और वृद्धि करेगा। मंदिर के मुख्य शिखर से लेकर छोटी-छोटी स्वर्णमंडित शिखरियों तक का जीर्णोद्धार किया जाएगा। समय के साथ मंदिर की प्राचीन संरचना में आई दरारों को भरकर भवन को मजबूती प्रदान की जाएगी।
शिखर पर क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत के साथ स्वर्ण सज्जा का भी नवीनीकरण होगा। केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की के विशेषज्ञों के निर्देशन में होने वाले इस महत्वपूर्ण कार्य की तैयारी शुरू हो गई है। मंदिर के शिखर और बाहरी हिस्सों तक पहुंचने के लिए मचान बनाए जा रहे हैं।
प्राचीन स्थापत्य से छेड़छाड़ किए बिना होगा काम
मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि महाकाल मंदिर की प्राचीन स्थापत्य कला और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके लिए आधुनिक मशीनों के बजाय परंपरागत तकनीक और सामग्री का उपयोग होगा। शिखर, दीवारों तथा अन्य हिस्सों में जहां भी दरारें और टूट-फूट दिखाई दे रही हैं, उनकी मरम्मत की जाएगी।
विशेष रूप से मुख्य शिखर और उसके आसपास की छोटी शिखरियों पर ध्यान दिया जाएगा। मंदिर पर पूर्व से चढ़े रंग को हटाकर प्राचीन स्वरूप के अनुरूप नया रंग किया जाएगा। जीर्णोद्धार पर 10.27 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मंदिर के मुख्य शिखर सहित आसपास की छोटी शिखरियों पर स्वर्ण सज्जा की गई है। जहां स्वर्ण सज्जा पुरानी अथवा क्षतिग्रस्त हो गई है, वहां आवश्यकतानुसार उसका नवीनीकरण किया जाएगा।
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गोंद, गुड़, चूना और उड़द से भरेंगे दरारें
जीर्णोद्धार में प्राचीन भारतीय निर्माण पद्धति का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए गोंद, गुड़, चूना, उड़द और मेथीदाना जैसी सामग्री काम में ली जाएगी। शिखर के जिन हिस्सों पर पुराना जीर्ण शीर्ण निर्माण है, उसे इसी पद्धति से दुरुस्त किया जाएगा। मंदिर की दीवारों और शिखर की दरारों को भरने में सीमेंट तथा आधुनिक रसायनों का उपयोग नहीं होगा।
मंदिर प्रशासन ने जीर्णोद्धार का काम महाशिवरात्रि 2027 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा है। मंदिर परिसर में मचान बनाने का काम शुरू हो चुका है। निर्माण कार्य के दौरान नक्काशी को नुकसान न पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।
