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महाकाल मंदिर को मिलेगा नया स्वरूप, CBRI की निगरानी में होगा जीर्णोद्धार; परिसर के प्राचीन मंदिरों की भी बदलेगी सूरत

Published: Mon, 19 Oct 2026 06:02 PM (IST)

केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की ने महाकाल मंदिर का निरीक्षण किया है, जिसके बाद मंदिर की संरचना के जीर्णोद्धार ...और पढ़ें

महाकाल मंदिर, उज्जैन। (फाइल फोटो)

महाकाल मंदिर, उज्जैन। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. सीबीआरआई ने महाकाल मंदिर का फिर से निरीक्षण किया।

  2. मंदिर संरचना के जीर्णोद्धार का कार्य तय किया गया।

  3. परिसर के प्राचीन मंदिरों को भी नया स्वरूप मिलेगा।

डिजिटल डेस्क, उज्जैन। केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की ने ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर का फिर निरीक्षण किया। संस्थान के विशेषज्ञ सदस्य उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) के इंजीनियरों के साथ शनिवार को मंदिर पहुंचे। यह तय किया गया है कि मंदिर की संरचना का जीर्णोद्धार किया जाएगा। विशेषज्ञों के दल ने इसके कार्य बिंदु भी तय किए हैं।

उल्लेखनीय है कि श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्षरण मामले में उज्जैन की सारिका गुरु ने वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। कोर्ट ने आर्केयोलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई), जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया (जीएसआई) तथा केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की के विशेषज्ञों की समिति गठित की। विशेषज्ञों का दल वर्ष 2019 से लगातार ज्योतिर्लिंग के क्षरण तथा मंदिर की मजबूती की जांच कर रहे हैं।

विशेषज्ञों ने ज्योतिर्लिंग का क्षरण रोकने के लिए कई सुझाव दिए हैं, जिस पर मंदिर समिति अमल कर रही है। इसमें महाकाल ज्योतिर्लिंग का आरओ जल से अभिषेक, भारी मालाओं पर रोक, हर्बल पूजन सामग्री का उपयोग आदि शामिल हैं।

सीबीआरआई कर रही मजबूती की जांच

सीबीआरआई की टीम छह वर्षों से समय-समय पर मंदिर की मजबूती की जांच करती आई है। बीते वर्षों में विशेषज्ञों ने मंदिर के पत्थरों की जांच की थी। विशेषज्ञों ने इसकी रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुति की थी। इसके बाद से ही मंदिर के जीर्णोद्धार की योजना बनने लगी थी। अब इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।

योजना में अन्य प्राचीन मंदिर भी शामिल

निर्माण एजेंसी यूडीए के इंजीनियर शैलेंद्र जैन ने बताया कि केंद्रीय भवन अनुसंधान की टीम ने महाकाल मंदिर का निरीक्षण किया है। उन्हीं के निर्देशन में रिनोवेशन का काम होगा। महाकाल मंदिर के अलावा परिसर स्थित सभी प्राचीन मंदिरों को इसमें शामिल किया गया है। सभी मंदिरों एक साथ पूरी मजबूती के साथ नए रूप में दिखाई देंगे। मंदिरों की मरम्मत में प्राचीन काल में उपयोग किए गए पदार्थों का उपयोग होगा।

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इसलिए जरूरी जीर्णोद्धार

  • मंदिर की मौजूदा संरचना 18वीं शताब्दी की होने के कारण पुरानी हो चुकी है।
  • मंदिर संरचना में लगे पत्थरों के मध्य खाली जगह दिखने लगी है।
  • इसके अलावा कुछ स्थानों पर दरारें भी दिखाई देती हैं।
  • जीर्णोद्धार में मंदिर संरचना से जुड़े इन्हीं बिंदुओं पर काम होगा।

प्राधिकरण के माध्यम से हो रहा काम

महाकाल मंदिर के जीर्णोद्धार का काम उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा। जल्द ही इस पर काम शुरू होगा। विशेषज्ञों की टीम ने निर्देशन में कार्य किया जाएगा।
-प्रथम कौशिक, प्रशासक, श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन