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नहीं रहे बुलेट वाले 'राइडर बाबा', पांच बार बाइक से नापा भारत; 60 साल पैदल अमरनाथ यात्रा की

Published: Tue, 15 Sep 2026 10:41 PM (IST)

संत मंगलदास महाराज, जिन्हें 'राइडर बाबा' के नाम से जाना जाता था, का देवास में निधन हो गया। उन्होंने बुलेट ...और पढ़ें

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HighLights

  1. नागा संत मंगलदास महाराज का देवास में निधन हो गया।

  2. वे 'राइडर बाबा' और 'हाईटेक बाबा' के नाम से प्रसिद्ध थे।

  3. बुलेट से पांच बार भारत भ्रमण, 60 साल पैदल अमरनाथ यात्रा की।

डिजिटल डेस्क, देवास। बुलेट मोटरसाइकिल पर देशभर की यात्रा कर अपनी अलग पहचान बनाने वाले नागा संत मंगलदास महाराज का सोमवार को निधन हो गया। संत समाज में वे ‘जम्मू वाले बाबा’, ‘राइडर बाबा’ और ‘हाईटेक बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध थे। उन्होंने अपनी बुलेट से करीब पांच बार पूरे भारत का भ्रमण किया था।

उनके निधन की खबर मिलते ही जम्मू, गुजरात, उज्जैन समेत मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से संत देवास पहुंचे। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद संत परंपरा के अनुसार नर्मदा किनारे उनका अंतिम संस्कार किया गया।

छह दशक तक जम्मू से जुड़ाव, गुजरात में बनाया ठिकाना

मंगलदास महाराज निर्वाणी अणी अखाड़े के नागा संत थे। गुजरात से पहुंचे संत परमेश्वर दास ने बताया कि मंगलदास महाराज उनके गुरुभाई थे। उनका गुरु स्थान जम्मू रहा और करीब 60 वर्षों तक जम्मू से उनका गहरा जुड़ाव रहा। बाद में वे गुजरात में रहने लगे थे।

मंगलदास महाराज करीब छह दशक से पैदल अमरनाथ यात्रा करते आ रहे थे। इस बार भी अमरनाथ यात्रा से लौटने के बाद उन्होंने करीब दो महीने तक अलग-अलग स्थानों पर प्रवास किया। पिछले करीब 20 दिनों से वे देवास में ठहरे हुए थे।

बुलेट बनी पहचान, पांच बार किया देश का भ्रमण

मंगलदास महाराज का संत जीवन अपने अनूठे अंदाज के लिए जाना जाता था। वे बुलेट मोटरसाइकिल से देश के अलग-अलग हिस्सों में यात्रा करते थे। इसी वजह से संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच उन्हें ‘राइडर बाबा’ और ‘हाईटेक बाबा’ के नाम से पहचान मिली।

बताया जाता है कि उन्होंने बुलेट से करीब पांच बार पूरे भारत की यात्रा की थी। उनका यह अंदाज उन्हें अन्य संतों से अलग पहचान देता था।

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24 साल से कैलादेवी मंदिर से था जुड़ाव

कैलादेवी मंदिर समिति के दीपक गर्ग के अनुसार मंगलदास महाराज का मंदिर से करीब 24 वर्षों से जुड़ाव था। वे साल में लगभग तीन बार देवास आते थे और यहां संतों व श्रद्धालुओं के साथ समय बिताते थे।

सोमवार को निधन के बाद उनका शव जिला अस्पताल में रखा गया था। मंगलवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संत समाज और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में उन्हें अंतिम संस्कार के लिए नर्मदा किनारे ले जाया गया।