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MP News: बड़वानी जिले में हुआ सफल प्रयोग, पौधारोपण के बाद फेंक दी जाने वाली काली पॉलिथीन को किया गया रीसायकल

Barwani News पौधों को उगाने व लाने ले जाने में सुलभता के लिए जिन काले पॉलीबैग्‍स का इस्‍तेमाल किया जाता है। अक्‍सर ये पॉलीबैग्‍स फेंक दिए जाते हैं जो किसी न किसी प्रकार प्रदूषण का कारण बनते हैं। अब इसी से निजात पाने के लिए वन अधिकारियों ने अनूठे कदम उठाए और बड़वानी में एक प्रयोग किया जो सफल हुआ।

By Jagran News Edited By: Prateek Jain Wed, 10 Jul 2024 05:41 PM (IST)
सेंधवा में बीते वर्ष पौधारोपण के बाद इस तरह एकत्रित किए गए थे काले पालीबैग। सौजन्य: वन विभाग, बड़वानी

जेएनएन, युवराज गुप्ता (नई दुनिया), बड़वानी वर्षाकाल में पूरे देश में करोड़ों पौधे रोपे जाते हैं, किंतु उन्हें रोपते समय उनकी जड़ों को संभालने वाली काली पन्नी (मिट्टी से भरा पॉलीबैग, जिसमें पौधा बड़ा होता है) को अकसर पौधारोपण वाली जगह पर ही फेंक दिया जाता है।

फिर वह पॉलीबैग या तो मिट्टी को प्रदूषित करता है या वर्षाजल के साथ बहकर किसी नदी-नाले में पहुंच जाता है। इससे पर्यावरण को हानि पहुंचती है और पौधारोपण के पुण्य का क्षय भी होता है।

किंतु मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के वन अधिकारियों ने इससे बचने के लिए अनूठा प्रयोग किया, जो सफल रहा है। बीते वर्ष बड़वानी जिले के सेंधवा नामक कस्बे में जहां-जहां पौधारोपण हुआ, वहां एक-एक वनरक्षक तैनात कर दिया गया।

वनरक्षकों ने पौधारोपण के बाद फेंकी गई सभी काली पन्नियों को एकत्रित कर वन विभाग के कार्यालय पहुंचा दिया। अकेले सेंधवा कस्बे से दो क्विंटल पन्नियां एकत्रित हुईं, जिन्हें विभाग ने रीसाइकल करने वाली कंपनी को बेचा। इससे जो धनराशि प्राप्त हुई, उससे पौधों के लिए 200 ट्री-गार्ड खरीद लिए।

पूरे जिले में लागू होगा प्रयोग

यह सफल प्रयोग इस बार पूरे बड़वानी जिले में लागू किया जा रहा है। बड़वानी जिला घने जंगल वाली सतपुड़ा वन रेंज में बसा है। बड़वानी वन मंडलाधिकारी आइएस गाडरिया के अनुसार इस वर्ष जिले को 1250 हेक्टेयर क्षेत्र में साढ़े सात लाख पौधे रोपने का लक्ष्य मिला है।

पूरे जिले में यह प्रयोग लागू करने से साढ़े सात लाख काले पालीबैग सतपुड़ा के जंगल और मिट्टी में मिलने से रोके जाएंगे। जहां-जहां पौधारोपण होगा, वहां-वहां एक वनरक्षक को तैनात कर खाली पालीबैग एकत्रित करवाए जाएंगे। इन्हें वन विभाग के रेंज कार्यालय पर एकत्रित कर रीसाइकल करने वाली कंपनी को बेचा जाएगा।

इस बार जिले से 3750 क्विंटल वजन के पॉलीबैग एकत्रित होने का अनुमान है। इसकी बिक्री से मिलने वाली धनराशि में कुछ और पैसा मिलाकर वन विभाग ट्री-गार्ड खरीदेगा या पौधे रोपने के लिए गड्ढों की खोदाई करवाएगा। 

यह होंगे लाभ : जंगल दूषित नहीं होगा, मवेशी भी बचेंगे

बड़वानी क्षेत्र के वन रेंजर गुलाबसिंह बर्डे के अनुसार पौधारोपण और पॉलीबैग एकत्रीकरण को लेकर इस बार पूरी तैयारी है। पालीबैग जंगल या मिट्टी में न फेंकने के कई लाभ होंगे।

एक लाभ यह भी होगा कि इसे वन्यजीव या मवेशी नहीं खाएंगे और असामयिक मृत्यु से बचेंगे। इसके अलावा पर्यावरण का नुकसान नहीं होगा, जंगल की मिट्टी खराब नहीं होगी। पालीबैग से होकर रिसने वाला जो वर्षाजल भूजल को दूषित कर सकता था, वह भी नहीं कर सकेगा।

ऐसे आया विचार

बीते वर्ष सेंधवा कस्बे में वन मंडलाधिकारी के रूप में अनुपम शर्मा पदस्थ थे। उन्होंने एक पौधारोपण कार्यक्रम में देखा कि पौधा रोपने के बाद काले पालीबैग वहीं पर फेंके जा रहे हैं। उन्हें यह नागवार गुजरा।

उन्होंने योजना बनाई कि अब सेंधवा कस्बे में जहां पौधारोपण होगा, वहां एक वनरक्षक भेजकर सारी पन्नियां एकत्रित करवाई जाएंगी। शर्मा ने पॉलीबैग रीसाइकल करने वाली कंपनी से बात की और करीब दो क्विंटल खाली पालीबैग दिए।

इससे जो आय हुई, उसे वन समिति के बैंक खाते में डालकर पौधों के लिए ट्री-गार्ड खरीदने सहित सामाजिक जनजागरूकता में खर्च किया गया।

सतपुड़ा की कोख में रोपेंगे नीम, अशोक, धावड़ा व औषधीय पौधे

बड़वानी सतपुड़ा रेंज की गोद में बसा है, इसलिए अभियान के तहत यहां ऐसे पौधे लगाए जाएंगे, जो बड़े होकर विशाल बन जाते हैं और जंगल में अच्छी तरह फलते-फूलते हैं।

इनमें नीम, करंज, पीपल, बरगद, अशोक, गुलमोहर, चिरोल, सलाई, धावड़ा, रोसा, पलाश आदि लगाए जाएंगे। आबादी के समीप सुरक्षित क्षेत्र में आम, जामुन, चीकू, जाम, नींबू, आंवला जैसे फलदार पौधे भी लगाए जाएंगे।

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