MP: ओला, उबर और रेपिडो की बाइक टैक्सी पर हाई कोर्ट सख्त, सुरक्षा इंतजामों पर मांगा जवाब
इंदौर हाई कोर्ट ने ओला, उबर और रेपिडो जैसी बाइक टैक्सी सेवाओं द्वारा मोटर व्हीकल एक्ट के उल्लंघन पर कड़ा ...और पढ़ें

बाइक टैक्सी (प्रतीकात्मक चित्र )

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डिजिटल डेस्क, इंदौर। बाइक टैक्सी सेवाओं जैसे ओला, उबर और रेपिडो में मोटर व्हीकल एक्ट के खुलेआम उल्लंघन को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के प्रमुख सचिव, प्रमुख सचिव गृह विभाग, मध्य प्रदेश और ओला, उबर और रेपिडो सहित अन्य कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने सीधे सवाल किया कि व्यावसायिक उपयोग में लगे दोपहिया वाहनों में यात्री सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं और इन वाहनों पर जीपीएस क्यों नहीं लगे हैं?
यह मामला कानून के छात्र आयुष जाट द्वारा दायर जनहित याचिका से शुरू हुआ। एडवोकेट अमित सिंह सिसोदिया के माध्यम से प्रस्तुत याचिका में कहा गया है कि शहर में यात्री सेवा के लिए दौड़ रहे ये दोपहिया वाहन वास्तव में निजी उपयोग के लिए पंजीकृत हैं। यानी दुर्घटना की स्थिति में यात्री न बीमा का दावा कर सकता है, न किसी से जवाबदेही मांग सकता है।
याचिका में यह भी विषय उठाया गया है कि जीपीएस न होने से वाहन की लाइव लोकेशन पता नहीं चलती है, न यात्री की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। चालक के पास वैध लाइसेंस है या नहीं, वाहन का रजिस्ट्रेशन वैध है या नहीं, इसकी कोई जांच नहीं होती। बता दें, अक्टूबर, 2025 में हाई कोर्ट की युगलपीठ राज्य सरकार को मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66 का पालन सुनिश्चित करने का आदेश दे चुकी है लेकिन वह आदेश भी अब तक कागजों पर ही है।
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अलग नंबर प्लेट की मांग
याचिका में मांग उठाई गई है कि व्यावसायिक गतिविधियों में लिप्त वाहनों के लिए मोटर दुर्घटना अधिनियम के प्रविधानों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आदेश दिए जाएं। ऐसे वाहनों पर वाहन रजिस्ट्रेशन, चालक का लाइसेंस, परमिट की जानकारी, वाहन के बीमा की जानकारी इत्यादि स्पष्ट रूप से चस्पा की जानी चाहिए। व्यावसायिक गतिविधियों में संलग्न वाहनों की नंबर प्लेट सामान्य से अलग होनी चाहिए।
