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दुष्कर्म पीड़िताओं को बड़ी राहत: 24 सप्ताह तक के गर्भ समापन के लिए कोर्ट की मंजूरी जरूरी नहीं

Published: Wed, 12 Aug 2026 09:54 PM (IST)

इंदौर हाई कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िताओं को बड़ी राहत दी है, अब 24 सप्ताह तक के गर्भ समापन के लिए ...और पढ़ें

इंदौर हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

इंदौर हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

डिजिटल डेस्क, इंदौर। दुष्कर्म पीड़िताओं के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अहम राहत दी है। अब 24 सप्ताह तक की गर्भावस्था होने पर गर्भसमापन के लिए अलग से कोर्ट की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमपीटी) एक्ट की निर्धारित शर्तें पूरी होने पर संबंधित पंजीकृत चिकित्सक और अस्पताल कानून के दायरे में रहकर प्रक्रिया कर सकेंगे।

न्यायमूर्ति संदीप भट्ट की एकलपीठ ने मंगलवार को दुष्कर्म पीड़िता की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश दिया। हाई कोर्ट ने प्रदेश के सभी अस्पतालों में आदेश की मंशा के अनुरूप व्यवस्था लागू करने के लिए स्वास्थ्य आयुक्त को भी निर्देश जारी किए हैं।

12 सप्ताह की गर्भावस्था, पीड़िता ने मांगी थी अनुमति

मामला एक दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग से जुड़ा है, जिसकी गर्भावस्था करीब 12 सप्ताह की थी। वह गर्भसमापन कराना चाहती थी। उसके अधिवक्ता आशीष चौबे ने कोर्ट के समक्ष पक्ष रखा।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि गर्भावस्था 24 सप्ताह या उससे कम है और एमटीपी एक्ट के तहत निर्धारित सभी कानूनी एवं चिकित्सकीय शर्तें पूरी होती हैं, तो इसके लिए न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना आवश्यक नहीं है।

20 सप्ताह तक एक, 20 से 24 सप्ताह में दो डॉक्टरों की राय

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में 20 फरवरी 2025 को जबलपुर मुख्यपीठ की युगलपीठ द्वारा दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया। उस निर्णय में स्पष्ट किया गया था कि दुष्कर्म या यौन हमले की पीड़िता की गर्भावस्था 20 सप्ताह तक होने पर एक पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर की राय के आधार पर गर्भसमापन किया जा सकता है।

वहीं, 20 सप्ताह से अधिक और 24 सप्ताह तक की गर्भावस्था के मामले में दो पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर्स की राय आवश्यक होगी। ऐसी स्थिति में गर्भसमापन के लिए हाई कोर्ट में अलग से याचिका दायर करने की जरूरत नहीं होगी।

दुष्कर्म से गर्भावस्था को मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर चोट माना

कोर्ट ने एमटीपी एक्ट की धारा-3 की व्याख्या करते हुए कहा था कि यदि गर्भावस्था दुष्कर्म के कारण हुई है तो उससे होने वाली पीड़ा को पीड़िता के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर चोट के रूप में माना जा सकता है।

वहीं, एमटीपी नियमों के नियम 3-बी में दुष्कर्म, यौन हमला और इन्सेस्ट की पीड़िताओं को 24 सप्ताह तक गर्भसमापन की पात्र श्रेणी में रखा गया है।

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सभी अस्पतालों में व्यवस्था लागू करने के निर्देश

हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य आयुक्त को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी संबंधित अस्पतालों में इस आदेश की मंशा के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही पूर्व में हाई कोर्ट की युगलपीठ द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।

इस आदेश का उद्देश्य दुष्कर्म पीड़िताओं को अनावश्यक न्यायिक प्रक्रिया से राहत देते हुए, कानून में निर्धारित चिकित्सकीय सुरक्षा और शर्तों के तहत समय पर उपचार का रास्ता आसान करना है।