खंडवा में अधीक्षिका के निलंबन की खबर से भावुक हुईं छात्राएं, छात्रावास का ताला तोड़ कलेक्टर से मिलने निकलीं; तेज धूप में 2.5 किमी पैदल चलीं
खंडवा के खालवा स्थित शासकीय शबरी माता कन्या शिक्षा परिसर में अधीक्षिका उमा तिवारी के निलंबन की खबर से छात्राएं ...और पढ़ें

छात्राओं को समझाइश देते अधिकारी।
HighLights
अधीक्षिका के निलंबन की खबर से छात्राएं भावुक हुईं।
50 छात्राएं छात्रावास का ताला तोड़कर पैदल निकलीं।
प्रशासन ने छात्राओं को समझाकर वापस छात्रावास पहुंचाया।
डिजिटल डेस्क, खंडवा। प्रदेश के खंडवा जिले में छात्राओं और उनकी अधीक्षिका के बीच भावनात्मक जुड़ाव का अनूठा मामला सामने आया है। खालवा स्थित शासकीय शबरी माता कन्या शिक्षा परिसर में मंगलवार को अधीक्षिका उमा तिवारी के निलंबन की खबर सुनकर करीब 50 छात्राएं इस कदर भावुक हो गईं कि छात्रावास के गेट पर लगा ताला तोड़कर कलेक्टर से मिलने निकल पड़ीं। तेज धूप में छात्राएं करीब दो से ढाई किलोमीटर पैदल चलकर ग्राम मोहन्याखेड़ा संदलपुर तक पहुंच गईं।
छात्राओं के अचानक छात्रावास छोड़कर निकलने की सूचना मिलते ही प्रशासन में हलचल मच गई। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने करीब डेढ़ घंटे तक उन्हें समझाने का प्रयास किया। बाद में शासकीय वाहनों से सभी छात्राओं को वापस छात्रावास पहुंचाया गया। हालांकि, अधीक्षिका के निलंबन संबंधी आदेश की आधिकारिक स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है।
कलेक्टर से मिलने की जिद
जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह छात्राओं को पता चला कि उनकी अधीक्षिका उमा तिवारी को निलंबित कर सहायक आयुक्त कार्यालय में संलग्न कर दिया गया है। यह खबर मिलते ही छात्राएं भावुक हो गईं। उन्होंने कलेक्टर ऋषव गुप्ता से मिलकर अपनी बात रखने का निर्णय लिया। देखते ही देखते उन्होंने मुख्य गेट पर लगा ताला तोड़ दिया और पैदल ही कलेक्टर से मिलने के लिए निकल पड़ीं।
अधीक्षिका को देखते ही लिपटकर रोने लगीं छात्राएं
छात्राओं के सड़क पर पैदल जाने की सूचना मिलने पर हरसूद एसडीएम आरसी खतेड़िया, नायब तहसीलदार विनोद यादव, प्रभारी सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग डा. नारायण सिंह और थाना प्रभारी अनुपम सिंह मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्राओं को रोककर उनकी बात सुनी और उन्हें वापस छात्रावास लौटने के लिए समझाया।
इसी दौरान अधीक्षिका उमा तिवारी भी वहां पहुंच गईं। उन्हें देखते ही कई छात्राएं उनसे लिपटकर रोने लगीं। छात्राओं ने भावुक होकर कहा कि वे अधीक्षिका को यहां से जाने नहीं देंगी। इस घटनाक्रम से छात्राओं का अपनी अधीक्षिका के प्रति लगाव सामने आया।
अधिकारियों ने छात्राओं को समझाया कि यदि उन्हें कोई शिकायत या समस्या है, तो वे आवेदन देकर अपनी बात रख सकती हैं। उनकी शिकायत को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाकर समाधान का प्रयास किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि छात्रावास छोड़कर इस तरह सड़क पर निकलना उचित नहीं है।
काफी देर तक समझाइश के बावजूद छात्राएं कलेक्टर से मिलने की मांग पर अड़ी रहीं। करीब डेढ़ घंटे बाद उन्हें शासकीय वाहनों से छात्रावास वापस ले जाया गया। वहां भी अधिकारियों ने लगभग एक घंटे तक छात्राओं से बातचीत कर उन्हें समझाया।
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निलंबन आदेश मिला या नहीं, स्थिति स्पष्ट नहीं
अधीक्षिका उमा तिवारी ने बताया कि उन्हें अब तक निलंबन से संबंधित कोई नोटिस या आधिकारिक आदेश नहीं मिला है। हालांकि, उन्हें सहकर्मियों के माध्यम से निलंबित किए जाने की जानकारी मिली थी। उनके अनुसार, एक अन्य अधीक्षिका सुमन पालवी ने फोन पर निलंबन और छात्रावास का प्रभार सौंपने के संबंध में बताया था।
वहीं, जनजातीय कार्य विभाग के प्रभारी सहायक आयुक्त डा. नारायण सिंह ने कहा कि वे तीन दिन के अवकाश के बाद मंगलवार को ही लौटे हैं और उन्हें निलंबन के संबंध में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है।
