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'बाप का राज है क्या... जो नपती नहीं करने दोगे'; खंडवा में सिटी मजिस्ट्रेट ने अतिक्रमण के खिलाफ दिखाए तीखे तेवर

Published: Tue, 27 Oct 2026 09:24 PM (IST)

खंडवा के कल्लनगंज में सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर ने अतिक्रमण की शिकायत की जांच के दौरान एक मकान मालिक से ...और पढ़ें

सिटी मजिस्ट्रेट ने दिखाए तीखे तेवर। (वीडियो ग्रैब)

सिटी मजिस्ट्रेट ने दिखाए तीखे तेवर। (वीडियो ग्रैब)

HighLights

  1. सिटी मजिस्ट्रेट ने खंडवा के कल्लनगंज में अतिक्रमण जांच की।

  2. मकान मालिक को 'बाप का राज' कहकर कड़ी चेतावनी दी।

  3. मकान मालिक ने लिखित नोटिस मांगा, भाषा पर आपत्ति जताई।

डिजिटल डेस्क, खंडवा। खंडवा के कल्लनगंज में अस्पताल के पास अतिक्रमण की शिकायत की जांच करने पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर मंगलवार को मकान मालिक से बहस के दौरान नाराज हो गए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “नपती कैसे नहीं होने दोगे, बाप का राज चल रहा है क्या?” उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन को सुरक्षित रखा जाएगा और जांच में अतिक्रमण मिलने पर उसे हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

इस दौरान संबंधित मकान मालिक जाहिद खान ने प्रशासन की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि उनके मकान को अतिक्रमण माना जा रहा है, तो उन्हें लिखित नोटिस दिया जाए। उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट की भाषा शैली पर भी सवाल उठाए। निरीक्षण के दौरान सरकारी जमीन की नपती और संपत्ति की सीमा को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनातनी की स्थिति बनी।

सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मिला तो हटाया जाएगा

अस्पताल क्षेत्र में अतिक्रमण की शिकायत के बाद सिटी मजिस्ट्रेट मौके पर स्थिति का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उनका कहना था कि सरकारी जमीन की सीमा निर्धारित कर उसे सुरक्षित किया जाएगा। यदि जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार उसे हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, मकान मालिक ने अपनी संपत्ति को लेकर प्रशासन से लिखित सूचना देने की मांग की। इस दौरान कार्रवाई की प्रक्रिया और अधिकारी के कथित भाषा-प्रयोग को लेकर आपत्ति सामने आई।

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संपत्ति और रास्ते को लेकर पहले भी हो चुका है पत्राचार

अस्पताल के पास स्थित संपत्ति और रास्ते को लेकर पहले भी कानूनी पत्राचार हो चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जाहिद खान की ओर से अधिवक्ता के माध्यम से 3 अक्टूबर को भेजे गए सूचना पत्र का जवाब दिया गया है।

जवाब में संबंधित पक्षों ने रास्ते पर अतिक्रमण होने से इनकार किया है। उन्होंने पुराने बंटवारे, लंबे समय से रास्ते के उपयोग और पूर्व में हुई न्यायालयीन प्रक्रिया का भी उल्लेख किया है।