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इंदौर में अखाड़े के लिए व्यवस्था से 'दंगल' कर रहे अर्जुन अवार्डी कोच, आमिर खान को भी सिखा चुके हैं कुश्ती के दाव-पेंच

Published: Mon, 21 Sep 2026 11:14 PM (IST)

इंदौर का मल्हार-आश्रम कुश्ती केंद्र, जिसने देश को कई पदक विजेता दिए, अब बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। ...और पढ़ें

इंदौर के मल्हार-आश्रम कुश्ती केंद्र में प्रशिक्षण देते कृपाशंकर पहलवान। (फाइल फोटो)

इंदौर के मल्हार-आश्रम कुश्ती केंद्र में प्रशिक्षण देते कृपाशंकर पहलवान। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. मल्हार-आश्रम कुश्ती केंद्र सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है।

  2. कोच कृपाशंकर पटेल अखाड़े को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

  3. निर्माण कार्य से खिलाड़ियों का अभ्यास प्रभावित हो रहा है।

डिजिटल डेस्क, इंदौर। देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर दर्जनों पदक जीतने वाले पहलवानों की नर्सरी रहा इंदौर का मल्हार-आश्रम कुश्ती केंद्र अब खुद सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। अभिनेता आमिर खान को फिल्म दंगल के लिए कुश्ती की बारीकियां सिखाने वाले अर्जुन अवार्डी कोच कृपाशंकर पटेल इस अखाड़े को बचाने और खिलाड़ियों के लिए जरूरी सुविधाएं जुटाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

जिस अखाड़े ने मध्य प्रदेश ही नहीं, देश को भी कई नामी पहलवान दिए, वहां अब विकास कार्यों के बीच खिलाड़ियों का अभ्यास प्रभावित हो रहा है। मल्हार-आश्रम स्कूल परिसर में संचालित इस कुश्ती केंद्र में बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे प्रशिक्षण लेते हैं। खास बात यह है कि यहां प्रशिक्षण निश्शुल्क दिया जाता है। भारतीय खेल प्राधिकरण भी इसे आधिकारिक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में मान्यता दे चुका है।

सांदीपनि स्कूल के निर्माण से अभ्यास प्रभावित

मल्हार-आश्रम परिसर में अब सांदीपनि स्कूल का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण कार्य के कारण कुश्ती केंद्र के आसपास की व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। कृपाशंकर पटेल के मुताबिक, स्कूल के नक्शे में कुश्ती केंद्र के लिए जगह छोड़ी गई है, लेकिन इसके बावजूद कुश्ती हाल के सामने ड्रेनेज के लिए बड़ा गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया।

उनका कहना है कि इस समस्या को लेकर सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत भी की गई। संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। अब एक तरफ सड़क बना दी गई है, जबकि दूसरी ओर गड्ढों में पानी जमा होने से खिलाड़ियों और आसपास के लोगों के लिए परेशानी बनी हुई है।

टिन शेड खराब, कुश्ती हाल भी जर्जर

कुश्ती केंद्र का मुख्य हाल भी अब जर्जर हालत में पहुंच गया है। कुछ वर्ष पहले समाजसेवी पंकज संघवी ने यहां खिलाड़ियों के लिए टिन शेड लगवाए थे, लेकिन समय के साथ वे भी खराब हो चुके हैं।

कृपाशंकर के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान ड्रेनेज लाइन टूट गई थी। नई लाइन डालने की बात कही गई, लेकिन काम अब तक पूरा नहीं हुआ। परिसर में शौचालय तो बन गए हैं और नल भी लगा दिए गए हैं, लेकिन उनमें पानी की व्यवस्था नहीं है। बोरिंग कराने के आदेश होने के बावजूद अभी तक बोरिंग नहीं हुई है।

गरीब बच्चों के लिए निश्शुल्क प्रशिक्षण

इस केंद्र की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां बड़ी संख्या में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे कुश्ती का प्रशिक्षण लेते हैं। उनके लिए प्रशिक्षण की कोई फीस नहीं है। ऐसे में अखाड़े की सुविधाएं प्रभावित होने का सीधा असर उन खिलाड़ियों की तैयारी पर पड़ रहा है, जिनके पास महंगे निजी प्रशिक्षण केंद्रों का विकल्प नहीं है।

कृपाशंकर पटेल का कहना है कि अधिकारियों से समस्या के समाधान की उम्मीद लेकर जाने पर कई बार समाधान के बजाय नई पेचीदगियां सामने आती हैं। उनका प्रयास है कि खिलाड़ियों के अभ्यास की व्यवस्था जल्द सामान्य हो।

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सुशील कुमार समेत कई दिग्गजों ने यहीं किया अभ्यास

मल्हार-आश्रम का यह अखाड़ा देश के कई बड़े पहलवानों की प्रशिक्षण यात्रा से जुड़ा रहा है। दो ओलिंपिक पदक जीत चुके पहलवान सुशील कुमार भी यहां अभ्यास कर चुके हैं।

यहीं प्रशिक्षण लेने वाली अर्पणा बिश्नोई ने कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतकर मध्य प्रदेश की पहली पदक विजेता महिला पहलवान बनने का गौरव हासिल किया। बलराम यादव 2005 की विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उमेश पटेल ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते हैं। सुरेंद्र देशवाल और विनोद कुमार समेत कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान भी इस अखाड़े में प्रशिक्षण लेते रहे हैं।

खिलाड़ियों की नर्सरी अब खुद मांग रही सुविधाएं

मल्हार-आश्रम कुश्ती केंद्र की उपलब्धियों की सूची लंबी है, लेकिन मौजूदा हालात में जिस अखाड़े ने खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया, वही अब बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों की मांग है कि निर्माण कार्य के साथ कुश्ती केंद्र की सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी जाए, ताकि अभ्यास की व्यवस्था पटरी पर लौट सके और नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलता रहे।