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मणिकर्णिका घाट ध्वस्तीकरण पर इंदौर में उठे विरोध के स्वर, अहिल्याबाई की विरासत बचाने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

Published: Fri, 16 Jan 2026 02:04 PM (IST)

वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट को ध्वस्त किए जाने पर इंदौर में तीव्र रोष है। अहिल्याबाई होलकर द्वारा निर्मित 250 ...और पढ़ें

मणिकर्णिका घाट को ध्वस्त करने का विरोध हो रहा है।

मणिकर्णिका घाट को ध्वस्त करने का विरोध हो रहा है।

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डिजिटल डेस्क, इंदौर। वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट को ध्वस्त किए जाने की घटना ने देशभर में आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े लोगों को गहरी पीड़ा दी है। इस मुद्दे को लेकर इंदौर में भी जनप्रतिनिधियों, समाजजनों और अहिल्या भक्तों के बीच तीव्र रोष देखने को मिला। लोगों ने दो टूक कहा कि विकास के नाम पर सदियों पुरानी धरोहरों को मिटाना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।

महाराजा यशवंतराव स्कूल में हुई अहम बैठक

गुरुवार को धनगर समाज सहित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों की बैठक महाराजा यशवंतराव स्कूल में आयोजित की गई। इसमें समाज के पदाधिकारी, शहर के वरिष्ठ नागरिक और लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के अनुयायी शामिल हुए। बैठक में सर्वसम्मति से मांग उठाई गई कि वाराणसी प्रशासन देवी अहिल्या बाई होलकर द्वारा निर्मित मणिकर्णिका घाट को उसके मूल स्वरूप में पुनः बहाल करे।

250 साल पुरानी धरोहर पर चला बुलडोजर

श्री अहिल्योत्सव समिति के उपाध्यक्ष सुधीर देडगे ने जानकारी देते हुए बताया कि मणिकर्णिका घाट का निर्माण वर्ष 1771 में लोकमाता अहिल्या बाई होलकर ने कराया था। करीब ढाई शताब्दियों से यह घाट न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी रहा है। उन्होंने कहा कि बिना ठोस योजना के इस तरह की तोड़फोड़ दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।

विकास के नाम पर भावनाओं से खिलवाड़

बैठक में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि समाज विकास कार्यों के खिलाफ नहीं है, लेकिन जनकल्याण के उद्देश्य से बनी ऐतिहासिक धरोहरों और देवस्थानों को नष्ट करना जनभावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाता है। धनगर, गड़रिया, पाल, बघेल समाज सहित धनगर समाज की सभी उपजातियों ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की।

दोषियों पर कार्रवाई और पुनर्निर्माण की मांग

समाजजनों ने मांग की कि इस कथित कृत्य के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही मणिकर्णिका घाट और उससे जुड़े देवस्थानों का पुनर्निर्माण कर लोकमाता देवी अहिल्या बाई होलकर की प्रतिमाओं को पुनः स्थापित किया जाए।

सुमित्रा महाजन ने जताया समाधान का भरोसा

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इस मामले में खासगी ट्रस्ट के पदाधिकारियों को प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखने का सुझाव दिया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने वाराणसी नगर निगम की जारी सूचना मंगवाई है और स्थानीय लोगों से चर्चा भी की है। उनके अनुसार विकास कार्य के दौरान हुई गलती को स्वीकार किया गया है और क्षतिग्रस्त मंदिर के सुधार का आश्वासन भी दिया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सुधार प्रक्रिया में समय लग सकता है, लेकिन समाधान जरूर निकलेगा।

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घाट पर पुन: लगवाई जाए मूर्तिया

वाराणसी के मनिकर्णिका घाट पर जो भी हुआ, वो गलत है। हमारी मांग है कि फिर से उसी स्थान पर मूर्तियां लगवाई जाए। वाराणसी में देवी अहिल्या बाई होलकर की यादों को सहेजने के लिए उस समय के मूर्तियों के लिए एक म्युजियम भी बनाया जाए।

-हरीश बारगल, अध्यक्ष क्षत्रिस धनगर सेवा संघ

घाट का जो हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ वहां की प्रतिमाएं व चिन्ह को यथोचित स्थान पर रखे मणिकर्णिका के घाट को 1791 में देवी अहिल्याबाई होलकर ने बनवाया और वहां पर उत्तर कार्य होते रहे। वाराणसी में सभी घाटों के नवीनीकरण कार्य में कुछ हिस्सा उस घाट का भी क्षतिग्रस्त हुआ। वहां पर जो भी विग्रह व प्रतिमाएं व चिन्ह मिले है, उन्हें संग्रहित कर रखा गया है। हमारी मांग है कि इन्हें सम्मानपूर्वक यथोचित स्थान पर स्थापित किया जाए।

-उदय सिंह राव होलकर, होलकर वंशज