प्लॉट लिया, मकान नहीं बनाया… IDA के नियमों में उलझे हजारों प्लॉटधारक, नामांतरण व लीज नवीनीकरण के मामले अटके
इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) की योजनाओं में हजारों भूखंडधारक निर्माण कार्य पूरा न करने के कारण नियमों की उलझन में ...और पढ़ें

इंदौर विकास प्राधिकरण (फाइल फोटो)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) की विभिन्न आवासीय योजनाओं में वर्षों पहले प्लॉट खरीदने वाले हजारों भूखंडधारक इन दिनों नियमों की उलझन में फंसे हुए हैं। तय समय सीमा में निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण नामांतरण, लीज नवीनीकरण और भू-स्वामी अधिकार से जुड़ी कई प्रक्रियाएं फिलहाल अटकी हुई हैं, जिससे बड़ी संख्या में आवेदकों के काम लंबित पड़े हैं।
हाल ही में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में आईडीए में हुई बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। बैठक में इस समस्या के समाधान के लिए शासन स्तर से आवश्यक आदेश जारी कराने पर चर्चा हुई।
निर्माण न करने पर लीज निरस्तीकरण का खतरा
मौजूदा नियमों के अनुसार प्लॉट आवंटन के बाद 10 वर्षों के भीतर कम से कम 10 प्रतिशत निर्माण कार्य करना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं होता है, तो संबंधित भूखंड की लीज निरस्त करने का प्रावधान लागू हो सकता है।
आईडीए की कई पुरानी योजनाओं में ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं, जहां आवंटन के कई वर्षों बाद भी प्लॉट खाली पड़े हैं। इसी वजह से अब इन भूखंडों के नामांतरण और अन्य प्रक्रियाओं पर स्पष्ट निर्णय नहीं हो पा रहा।
शासन की मंजूरी का इंतजार
स्थिति को देखते हुए आईडीए ने नियमों में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा है। हालांकि अभी तक इस पर मंजूरी नहीं मिल सकी है। जब तक शासन से अनुमति नहीं मिलती, तब तक लंबित मामलों में आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाएगी।
आईडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. परीक्षित झाड़े के मुताबिक, इस संबंध में शासन को पत्र भेजा जा चुका है और अनुमति मिलते ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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सुपर कॉरिडोर समेत कई योजनाओं में खाली प्लॉट
- आईडीए ने वर्षों पहले सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में कई आवासीय योजनाएं शुरू की थीं, लेकिन आवंटन के बावजूद कई भूखंडों पर अभी तक निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
- पूर्व कलेक्टर आशीष सिंह ने भी इस क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कई प्लॉट आज भी खाली पड़े हैं।
- इसके अलावा स्कीम 136, 134, 94, 78, 114 और 97 सहित कई योजनाओं में भी बड़ी संख्या में भूखंडों पर निर्माण कार्य नहीं हो सका है, जिससे विकास की रफ्तार प्रभावित हो रही है और प्लॉटधारक नियमों की वजह से परेशान हैं।
