भोजशाला में बदला शुक्रवार का दृश्य, 721 वर्ष बाद दिनभर गूंजे जयकारे, निर्विघ्न हुई मां वाग्देवी की पूजा
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के बाद धार की भोजशाला में 721 साल बाद पहली बार शुक्रवार को पूरे ...और पढ़ें

भोजशाला में 721 वर्ष बाद शुक्रवार को पूरे दिन मां वाग्देवी का पूजा हुई। प्रसन्नता व्यक्त करते श्रद्धालु।

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डिजिटल डेस्क, धार। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के बाद आए पहले शुक्रवार ने धार स्थित भोजशाला के इतिहास में नया अध्याय लिख दिया। 721 वर्ष बाद ऐसा पहली बार हुआ, जब शुक्रवार को पूरे दिन मां वाग्देवी की निर्विघ्न पूजा-अर्चना संपन्न हुई। पूरा परिसर मां वाग्देवी के जयकारों, शंखनाद और घंटे-घड़ियाल की गूंज से भक्तिमय हो उठा। जहां कभी शुक्रवार को नमाज पढ़ी जाती थी, वहां पूरे दिन निर्विघ्न पूजा-अर्चना होती रही। पूरा धार शहर भगवा ध्वजों और केसरिया पताकाओं से सजा नजर आ रहा था। वातावरण में ऐसी आस्था उमड़ रही थी, मानो लंबे समय से थमी किसी धारा को आखिरकार मार्ग मिल गया हो।
सुबह सात बजे जैसे ही भोजशाला के द्वार खुले, श्रद्धालुओं की भीड़ मां वाग्देवी के दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। आसपास के गांवों और कस्बों से भक्तों के जत्थे लगातार धार पहुंचते रहे। सुबह नौ बजे महाआरती के साथ आराधना का जो क्रम शुरू हुआ, वह सूर्यास्त तक निरंतर चलता रहा। चिलचिलाती धूप भी श्रद्धालुओं की आस्था को नहीं रोक सकी और लोग घंटों कतार में खड़े रहकर दर्शन करते रहे।
दोपहर करीब सवा बजे हुई महाआरती के दौरान भोजशाला में भावुक दृश्य देखने को मिला। भोजशाला मुक्ति आंदोलन में प्राण गंवाने वाले तीन बलिदानियों के परिवार भी मां वाग्देवी के दर्शन के लिए पहुंचे। उनकी आंखों में वर्षों के संघर्ष की पीड़ा जरूर थी, लेकिन चेहरे पर न्याय मिलने का संतोष साफ झलक रहा था। वर्ष 2003 में भोजशाला मुक्ति आंदोलन के दौरान पुलिस गोलीबारी में लक्ष्मण सिंह, बन सिंह और अंतर सिंह की जान चली गई थी। पुलिस की सख्ती के चलते शोभायात्रा भले ही स्थगित कर दी गई, लेकिन धार शहर पूरे दिन उत्सव और श्रद्धा के रंग में डूबा रहा।
बता दें, वर्ष 1305 में भोजशाला में आक्रांताओं ने हमला किया और यहां मस्जिद बना ली थी। वर्ष 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने मंदिर पक्ष को यहां केवल मंगलवार को पूजा की अनुमति दी थी। यदि वसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती तो जरूर कुछ समय के लिए पूजा की अनुमति मिलती। पुलिस ने गुरुवार रात से ही मैदान संभाल लिया था।
नहीं दिखा सदर की अपील का असर
मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी (मस्जिद पक्ष) के सदर अब्दुल समद ने गुरुवार रात मुस्लिम समाज से अपील की थी कि वे शुक्रवार को काली पट्टी बांध और दुकानें बंद रखकर हाई कोर्ट के फैसले का विरोध करें, लेकिन इसका कोई असर नजर नहीं आया। शुक्रवार सुबह शहर की सड़कों पर पुलिस ने फ्लैग मार्च भी निकाला।
सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई का आवेदन ही नहीं पहुंचा
हाई कोर्ट के 15 मई के फैसले को चुनौती देते हुए मुस्लिम पक्ष ने अपील सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की है लेकिन उस पर सुनवाई कब होगी यह स्पष्ट नहीं है। दरअसल, पक्षकारों ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग नहीं की है। इस पर अब नियमित सूचीबद्धता के बाद ही सुनवाई की संभावना है।
