देवास की पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट के बाद लगी आग: धमाकों से दहला इलाका, तीन की मौत, सड़क तक बिखरे शवों के अवशेष
देवास के टोंककला स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट से तीन श्रमिकों की मौत हो गई और 27 लोग ...और पढ़ें

पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में घायल लोगों को जिला अस्पताल लाया गया।

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डिजिटल डेस्क, इंदौर। देवास जिले के टोंककला स्थित एबी रोड किनारे गुरुवार सुबह एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। सुबह करीब 10:30 बजे फैक्ट्री में अचानक आग भड़की और देखते ही देखते जोरदार धमाकों की आवाजें कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देने लगीं। हादसा इतना भयावह था कि विस्फोट के बाद शवों के अवशेष और फैक्ट्री के टीन शेड हाईवे तक जा पहुंचे। अब तक तीन श्रमिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 27 मजदूर झुलस गए हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक फैक्ट्री के भीतर एक के बाद एक धमाके हुए और कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर धुएं के गुबार से भर गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। गंभीर रूप से घायल मजदूरों को देवास जिला अस्पताल के अलावा इंदौर के अमलतास और चोइथराम अस्पताल रेफर किया गया है। घायलों में गोल्डी, निरंजन, अभिषेक, विशाल, गुड्डू, मनजीत, अजय पासवान, अमित, रोशन और राम सहित 15 लोगों को रेफर किया गया है, जबकि धीरज, सनी और सुमित की मौत हो चुकी है।
यूपी, बिहार के बताए जा रहे मजदूर
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में बड़ी संख्या में बिहार के अररिया जिले के मजदूर काम करते थे। श्रमिकों का दावा है कि यहां करीब 500 मजदूर कार्यरत थे, जिनमें लगभग 200 बिहारी मजदूर शामिल हैं। मजदूरों से 12 घंटे तक काम लिया जाता था और उन्हें लगभग 15 हजार रुपये वेतन दिया जाता था। रहने की व्यवस्था भी फैक्ट्री परिसर में ही थी। अधिकांश श्रमिक बिहार के अररिया निवासी एक ठेकेदार छोटू के जरिए यहां लाए गए थे।
किशोरों से भी करवाया जा रहा था काम
हादसे के बाद यह जानकारी भी सामने आई है कि फैक्ट्री में 18 वर्ष से कम उम्र के किशोर भी काम कर रहे थे। पुलिस और प्रशासन ने इस पहलू को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। श्रमिकों के अनुसार फैक्ट्री में कई कमरे बने थे और एक कमरे में हुए धमाके के बाद आग तेजी से फैली।

संभागायुक्त को लोगों ने घेरा
घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा प्रशासन पर फूट पड़ा। मौके पर पहुंचे संभागायुक्त आशीष सिंह को लोगों ने घेर लिया और जमकर नारेबाजी की। लोगों का आरोप था कि सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी के कारण यह बड़ा हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि करीब दो महीने पहले भी इसी फैक्ट्री में आग लगी थी, लेकिन उस समय मामला दब गया और सुरक्षा मानकों को लेकर कोई सख्ती नहीं बरती गई।

देरी से पहुंची एंबुलेस
बिहार निवासी श्रमिक विपिन कुमार ने बताया कि वह मशीन पर काम कर रहे थे तभी करीब 20 मीटर दूर जोरदार धमाका हुआ। जब तक लोग कुछ समझ पाते, कई मजदूर आग की चपेट में आ चुके थे। उनका आरोप है कि सूचना देने के बावजूद करीब 45 मिनट तक एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। समय पर राहत मिलती तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।

इलाके को किया सील
हादसे की सूचना मिलते ही कलेक्टर, एडीएम, एसडीएम, डीआईजी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को सील कर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। फैक्ट्री में अब भी भारी मात्रा में बारूद और तैयार पटाखे मौजूद होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां पूरे इलाके को सैनिटाइज करने में जुटी हैं।
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सीएम ने जताया दुख, आर्थिक सहायता का ऐलान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हादसे पर गहरा शोक जताते हुए मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही घायलों के मुफ्त इलाज के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, गृह सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेजते हुए पूरे मामले की जांच के आदेश भी जारी किए हैं।
