'युवाओं के भरोसे ही आएगा रामराज'; उज्जैन में युवा धर्म संसद के समापन सत्र में बोले CM मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में युवा धर्म संसद के समापन सत्र में युवाओं पर भरोसा जताते हुए कहा ...और पढ़ें

युवा धर्म संसद के समापन सत्र को संबोधित करते सीएम डॉ. मोहन यादव। (फोटो- जागरण)
HighLights
CM मोहन यादव ने युवाओं पर रामराज के लिए भरोसा जताया।
सफलता के लिए आत्मविश्वास और स्पष्ट लक्ष्य को महत्वपूर्ण बताया।
अगली युवा धर्म संसद 2027 में द्वारका में आयोजित होगी।
डिजिटल डेस्क, उज्जैन। युवा धर्म संसद में शनिवार को युवाओं पर भरोसे और रामराज का संदेश गूंजा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रामायण का प्रसंग उद्धृत करते हुए कहा कि महर्षि विश्वामित्र ने राजा दशरथ से बड़ी सेना मांगने के बजाय केवल दो युवाओं श्रीराम और लक्ष्मण पर भरोसा जताया था। वही भरोसा मुझे भी है कि युवाओं के भरोसे ही देश में रामराज आएगा। आज भी यह वही भारत है, जिसके युवाओं पर ऋषि-मुनियों को सदा से विश्वास रहा है। जब देश का युवा धर्म संसद में बैठता है तो सीना गर्व से 56 इंच का हो जाता है।
युवाओं को किया प्रेरित
डॉ. मोहन यादव सेवाज्ञ संस्थानम् द्वारा आयोजित तीन दिवसीय युवा धर्म संसद के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सफलता बगैर कष्ट नहीं मिलती, जब चुनौतियां और परेशानियां आती हैं, तभी सफलता और जय-जयकार मिलती है। यदि आपके पास अदम्य आत्मविश्वास और स्पष्ट लक्ष्य हो, तो संसाधनों का अभाव कभी रुकावट नहीं बन सकता। भगवान श्रीराम ने भी विपरीत परिस्थितियों में अपने आत्मविश्वास से ही इतिहास रचा था।
21वीं शताब्दी भारत की
उन्होंने कहा कि भारत को समझने में दुनिया को समय लग रहा है, लेकिन 21वीं शताब्दी भारत की है। भारत आज दुनिया के सामने आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। सांदीपनि ऋषि की धरती उज्जैन और यहां शिक्षा प्राप्त करने वाले श्रीकृष्ण-सुदामा का उदाहरण देते हुए डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा की निस्वार्थ मित्रता यहां की बड़ी सीख है। मित्र की सहायता ऐसे करो कि उसे कभी नीचा न देखना पड़े।
कृतज्ञता ही मनुष्यता की पहचान : आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण
युवा धर्म संसद के संरक्षक आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण ने कहा कि अधर्म और असमानता से सत्ता और समाज का संतुलन बिगड़ता है। द्रुपद की एक चूक ने द्रोणाचार्य जैसे तपस्वी आचार्य को कुरु-कुल की सीमाओं में बांध दिया था। व्यक्ति जब चूकता है तो प्रभाव सीमित रहता है लेकिन जब सत्ता चूकती है तो परिणाम विभीषिका बन जाते हैं।
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भारत का गौरव उसकी ज्ञान परंपरा और गुरुकुल संस्कृति में निहित है। युवा धर्म संसद का मुख्य उद्देश्य केवल कोई आयोजन करना या नौकरी-स्टार्टअप पर चर्चा करना नहीं, बल्कि भारत के युवाओं को संवेदनशील, विचारशील और भारतीय मनुष्य-बोध के साथ गढ़ना है।
अगली युवा धर्म संसद द्वारका में
आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण महाराज ने अगली युवा धर्म संसद सितंबर, 2027 में द्वारका में आयोजित किए जाने की घोषणा की। सेवाज्ञ संस्थानम् के राष्ट्रीय सचिव माधव कुमार तिवारी, उद्यमी सचिन बंसल मंचासीन थे।
