नमो देव्यै महादेव्यैः संकल्प के साथ संवेदनाओं से समाज का स्वास्थ्य संवार रहीं बड़वानी की दो युवतियां
बड़वानी की अंजलि वानखेड़े और नर्स अंकिता सिंगोरिया अपनी संवेदनाओं से समाज को संवार रही हैं। अंजलि जरूरतमंद बच्चों और ...और पढ़ें

बीते वर्ष मिले एक लावारिस शिशु के साथ सामाजिक कार्यकर्ता शिक्षक अंजलि वानखेड़े। (फोटो जागरण)
HighLights
अंजलि जरूरतमंद बच्चों और दूरदराज के गांवों में करती हैं मदद।
नर्स अंकिता अस्पताल में बेसहारा घायलों का बनती हैं सहारा।
संवेदना और सामूहिक संकल्प से मजबूत हो रहा है समाज।
युवराज गुप्ता, बड़वानी। स्वस्थ समाज की पहचान केवल बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और पोषण से ही नहीं, उस संवेदना से भी होती है, जो किसी जरूरतमंद के दुख को अपना समझकर उसे सहारा देने के लिए प्रेरित करती है। मध्य प्रदेश के बड़वानी की अंजलि वानखेड़े और नर्स अंकिता सिंगोरिया इसी संवेदना को अपने कर्मों से जीवंत कर रही हैं।
बच्चों की देखभाल को समर्पित
अंजलि जरूरतमंदों की मदद करने के साथ संकट में मिले बच्चों की देखभाल करती हैं, गरीबी से दो-चार हो रहे लोगों के भोजन और स्वास्थ्य की चिंता करती हैंं, तो अंकिता अस्पताल में उन घायलों के लिए सहारा बनती हैं, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता। भोजन और अन्य जरूरतों को सामाजिक सहयोग से पूरा करती हैं। अंजलि अब तक अनेक लोगों की मदद कर चुकी हैं, जबकि अंकिता ने कितने घायलों की देखभाल में योगदान दिया है, इसका उन्होंने हिसाब नहीं रखा है।
पिछले वर्ष नर्मदा नदी के पुल पर एक दंपती की मृत्यु के बाद उनका नन्हा बालक अकेला रह गया था। सामाजिक कार्यकर्ता अजीत जैन की मदद से अंजलि ने बच्चे को अस्पताल पहुंचाया और उसकी देखभाल की। परिवार का पता चलने पर बच्चे को सुरक्षित उनके सुपुर्द कर दिया। करीब एक दशक से सामाजिक कार्यों में सक्रिय अंजलि जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने सहित विभिन्न सेवाकार्यों में भी योगदान दे रही हैं।
सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं के सहयोग से वह प्रतिदिन लोगों का सहारा बनती हैं। फिर चाहे दूरदराज के उन गांवों में लोगों के स्वास्थ्य की चिंता करना हो, जोकि शहर तक आर्थिक अभाव में नहीं पहुंच पाते हैं या फिर अशिक्षा के चलते जो लोग इलाज के बजाय अंधविश्वास वाले उपायों में जुट जाते हैं। इसको लेकर अंजलि और उनकी टीम जागरूकता अभियान भी चलाती है। अंजलि कहती हैं कि जब संवेदना व्यक्तिगत प्रयास से आगे बढ़कर सामूहिक संकल्प बनेगी, तभी एक स्वस्थ, संवेदनशील और जिम्मेदार समाज की नींव मजबूत होगी।
घायलों का सहारा बनीं अंकिता
उधर, जिला अस्पताल के हड्डी वार्ड में पदस्थ नर्स अंकिता सिंगोरिया करीब ढाई साल से सड़क दुर्घटनाओं में घायल उन लोगों की देखभाल में जुटी हैं, जिनके साथ परिवार का कोई सदस्य नहीं होता। वह कहती हैं कि कई बार ऐसे घायल लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहते हैं और उनके स्वजन मिलने तक नहीं आते। ऐसे में वह उपचार के साथ उनके भोजन और दूसरी जरूरतों का प्रबंध करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद लेती हैं, ताकि अकेलेपन और असहयोग के बीच भी उन्हें मानवीय सहारा मिल सके।

अंकिता कहती हैं कि किसी भूखे को भोजन देना, बेसहारा बच्चे को सुरक्षा दिलाना और घायल के लिए मदद का हाथ बढ़ाना भी किसी की जिंदगी बदल सकता है। ऐसी पहल जरूरतमंदों के मन में उम्मीद जगाने के साथ समाज के दूसरे लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझने के लिए प्रेरित करती हैं।यही वजह है कि जिनकी उन्होंने मदद की, उसमें से अनेक लोगो जब-तब अस्पताल आकर ऐसे लोगों का सहयोग करते हैं, जिन्हें देखकर खुशी होती है कि लोग एक-दूसरे का दुख-दर्द समझते हैं। मेरी इच्छा है कि यह कड़ी इसी तरह जुड़ती रहे और इतनी लंबी हो जाए कि प्रत्येक व्यक्ति एक-दूसरे के लिए खड़ा हो जाए।
