विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

राजस्थान की तर्ज पर बुंदेलखंड के 5 ऐतिहासिक किलों का होगा कायाकल्प, टीकमगढ़ को टूरिज्म हब बनाने की तैयारी

By Manish AsatiEdited By: Ravindra Soni
Published: Tue, 13 Oct 2026 07:55 PM (IST)

टीकमगढ़ जिले के पांच ऐतिहासिक किलों को राजस्थान की तर्ज पर पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इस ...और पढ़ें

बल्देवगढ़ का ऐतिहासिक किला।

बल्देवगढ़ का ऐतिहासिक किला।

HighLights

  1.  दो किले पर्यटन विभाग] एक पुरातत्व विभाग को सौंपा(

  2. राजस्थान मॉडल पर किलों का होगा विकास और संरक्षण।

  3. स्थानीय रोजगार सृजित होंगे और बुंदेली संस्कृति को बढ़ावा।

मनीष असाटी, टीकमगढ़। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरोहरों को पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। राजस्थान की तर्ज पर टीकमगढ़ जिले के पांच ऐतिहासिक किलों को संरक्षित कर पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए जिला प्रशासन ने वैज्ञानिक तरीके से किलों के संरक्षण, पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने और पर्यटन सर्किट तैयार करने का प्रस्ताव मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग को भेजा है।

योजना के तहत बल्देवगढ़ और मोहनगढ़ के किले पर्यटन विभाग को सौंपे जा चुके हैं, जबकि अस्तौन का किला पुरातत्व विभाग को हस्तांतरित किया गया है। वहीं, पचेर घाट के किले को पर्यटन विभाग के अधीन करने की प्रक्रिया जारी है। इस पहल का उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के साथ उन्हें पर्यटन और स्थानीय रोजगार का केंद्र बनाना है।

किलों के आसपास विकसित होंगी पर्यटन सुविधाएं

राजस्थान में ऐतिहासिक किलों और हवेलियों को पर्यटन से जोड़कर रोजगार के नए अवसर तैयार किए गए हैं। इसी मॉडल पर बुंदेलखंड के किलों को विकसित करने की योजना है। यहां हेरिटेज वॉक, लाइट एंड साउंड शो, बुंदेली व्यंजन केंद्र और स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए हाट बाजार जैसी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है।

इन गतिविधियों से पर्यटकों को बुंदेलखंड के इतिहास, स्थापत्य और संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। साथ ही, स्थानीय गाइड, लोक कलाकारों, हस्तशिल्प कारीगरों और छोटे कारोबारियों के लिए कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं।

होम-स्टे से लेकर बुंदेली व्यंजनों तक को मिलेगा बढ़ावा

किलों को पर्यटन सर्किट से जोड़ने पर जिले में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। इससे स्थानीय खानपान, पारंपरिक हस्तशिल्प और क्षेत्रीय उत्पादों की मांग बढ़ सकती है। पर्यटकों के ठहरने के लिए होम-स्टे जैसी सुविधाओं को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
इस पहल से बुंदेली संस्कृति और परंपराओं को व्यापक पहचान मिलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालांकि, योजना को धरातल पर उतारने के लिए संरक्षण और विकास से जुड़े प्रस्तावों पर आगे की कार्रवाई अहम होगी।

ramgarh kila 21415

पांचों किलों की अपनी अलग ऐतिहासिक पहचान

बल्देवगढ़ का किला: विशाल किलेबंदी और अत्यधिक तेज आवाज करने वाली तोप के लिए प्रसिद्ध है।
मोहनगढ़ का किला: तालाब के बीच स्थित यह किला अपनी अनूठी भौगोलिक स्थिति के कारण खास पहचान रखता है।
चंद्रपुरा का किला: यहां की प्राचीन बावड़ी और ग्रामीण विरासत इसे ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती हैं।
पचेर घाट का किला: धसान नदी के किनारे स्थित इस किले का ऐतिहासिक रूप से सामरिक महत्व रहा है।
अस्तौन का किला: तात्या टोपे से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों के कारण यह किला विशेष महत्व रखता है।

यह भी पढ़ें- माचिस की डिबिया जितनी 350 पन्नों की गीता! टीकमगढ़ में पूर्व विधायक ने सहेजकर रखी है 130 साल पुरानी दुर्लभ प्रति

बुंदेलखंड को मिल सकती है नई पर्यटन पहचान

पांचों किलों का योजनाबद्ध संरक्षण और विकास होने पर टीकमगढ़ को ऐतिहासिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिल सकती है। इससे पर्यटकों को बुंदेलखंड की विरासत देखने का अवसर मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

ऐतिहासिक संपदाओं को खंडहर होने से बचाने के साथ स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना प्राथमिकता है। इससे ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते खुल सकेंगे।
- विवेक श्रोत्रिय, कलेक्टर, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश