40 हजार करोड़ की सिंधिया संपत्ति विवाद में नया ट्विस्ट, प्रतिमा देवी की आपत्ति मंजूर; 7 अक्टूबर को होगी बहस
ग्वालियर जिला न्यायालय ने सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े विवाद में प्रतिमा देवी ...और पढ़ें

सिंधिया परिवार की संपत्ति बंटवारे का मामला कोर्ट में विचाराधीन। (फाइल फोटो)
HighLights
कोर्ट में पेश एक हजार पन्नों के रिकार्ड का भी अध्ययन शुरू।
सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद।
संपत्ति विवाद के मामले पर 7 अक्टूबर को विस्तृत बहस होगी।
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े बहुचर्चित विवाद में गुरुवार को नया मोड़ आ गया। जिला न्यायालय ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मावती राजे सिंधिया की पुत्री प्रतिमा देवी की ओर से प्रस्तुत आपत्ति को स्वीकार कर लिया है। अब इस आपत्ति और उनके दावे पर सात अक्टूबर को विस्तृत बहस होगी। न्यायालय ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को अगली सुनवाई पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
प्रतिमा देवी ने अपनी आपत्ति में कहा है कि संपत्ति विवाद से संबंधित न्यायिक प्रक्रिया में उन्हें उचित रूप से पक्षकार नहीं बनाया गया और उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर भी नहीं मिला। उन्होंने यह भी दावा किया कि वसीयत और संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की पूरी जानकारी उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई।
नेपालगंज के पते पर भेजे नोटिस पर उठाया सवाल
प्रतिमा देवी ने अदालत के समक्ष कहा कि उन्हें भेजे गए नोटिस नेपाल के नेपालगंज स्थित पते पर भेजे गए थे, जबकि वह करीब 20 वर्षों से काठमांडू में रह रही हैं। इसी आधार पर उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया में उन्हें एकतरफा यानी एक्स पार्टी किए जाने पर भी सवाल उठाया है।
गुरुवार को हुई सुनवाई में प्रतिमा देवी स्वयं अदालत में उपस्थित नहीं हुईं। उनकी ओर से उनके दामाद प्रतीक कारकी न्यायालय पहुंचे और पक्ष रखा।
मामले में अंग्रेजी भाषा में तैयार करीब एक हजार पन्नों का रिकॉर्ड भी अदालत के समक्ष पेश किया जा चुका है। संपत्ति विवाद से जुड़े पुराने दस्तावेजों और रिकॉर्ड की व्यापकता को देखते हुए न्यायालय ने इनका अध्ययन शुरू कर दिया है। प्रतिमा देवी की आपत्ति और दावे पर बहस के बाद ही अदालत आगे का निर्णय करेगी।
मां के हिस्से पर उत्तराधिकार का दावा
प्रतिमा देवी का मुख्य तर्क है कि उनकी दिवंगत मां पद्मावती राजे सिंधिया संपत्ति में हिस्सेदार थीं। ऐसे में उनके उत्तराधिकारियों के अधिकारों को नजरअंदाज कर संपत्ति के बंटवारे या उससे जुड़े समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता।
वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पूर्व मंत्री यशोधरा राजे की ओर से प्रतिमा देवी की आपत्ति का जवाब पहले ही न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है।
दूसरे पक्ष का तर्क है कि संपत्ति बंटवारे और समझौते की पूर्व प्रक्रिया के दौरान प्रतिमा देवी ने अपनी सहमति दी थी और स्वयं को इस प्रक्रिया से अलग रखा था। ऐसे में अब मामले के अंतिम चरण में आपत्ति दर्ज कराने के औचित्य पर सवाल उठाया गया है।
