ओरछा के ऐतिहासिक जहांगीर महल का बदलेगा नाम, अब 'वीर सिंह महल' करने की तैयारी; शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव
मध्य प्रदेश के ओरछा स्थित ऐतिहासिक जहांगीर महल का नाम बदलकर 'वीर सिंह महल' करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. ...और पढ़ें

ओरछा स्थित जहांगीर महल।
HighLights
ओरछा के जहांगीर महल का नाम बदलने की तैयारी।
पुरातत्व विभाग ऐतिहासिक साक्ष्यों की पड़ताल कर रहा है।
महल का निर्माण राजा वीर सिंह ने 1626 में कराया था।
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। मध्य प्रदेश की पर्यटन नगरी ओरछा के सबसे चर्चित ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल जहांगीर महल का नाम बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। करीब 400 वर्ष पुराने इस महल का नाम इसके निर्माण कराने वाले बुंदेला शासक राजा वीर सिंह के नाम पर करने का प्रस्ताव प्रशासन ने तैयार कर लिया है। प्रस्ताव जल्द ही शासन को भेजा जाएगा।
नाम परिवर्तन की कवायद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पिछले ओरछा दौरे के बाद तेज हुई। मुख्यमंत्री ने महल के नाम को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा था कि यदि जहांगीर यहां आए ही नहीं थे तो महल का नाम उसके वास्तविक निर्माता राजा वीर सिंह के नाम पर होना चाहिए। इसके बाद निवाड़ी कलेक्टर ने जहांगीर महल का नाम ‘वीर सिंह महल’ करने का प्रस्ताव तैयार किया है।
पुरातत्व विभाग जुटा रहा ऐतिहासिक साक्ष्य
प्रस्ताव शासन को भेजने से पहले पुरातत्व विभाग महल के इतिहास से जुड़े दस्तावेजों और साक्ष्यों की पड़ताल कर रहा है। इसमें महल के निर्माण, बुंदेला शासक वीर सिंह और मुगल सम्राट जहांगीर से जुड़े प्राचीन अभिलेखों का अध्ययन किया जा रहा है।
अधिकारियों का फोकस इस बात पर भी है कि महल के नामकरण और जहांगीर के यहां आने से संबंधित ऐतिहासिक दावों की वास्तविकता क्या है।
1626 में हुआ था महल का निर्माण
बेतवा नदी के किनारे स्थित यह महल बुंदेला स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 236 कमरों वाले इस महल का निर्माण राजा वीर सिंह ने वर्ष 1626 में कराया था।
बताया जाता है कि वीर सिंह मुगल सम्राट जहांगीर को अपना मित्र मानते थे। इसी वजह से उन्होंने महल का नाम जहांगीर के नाम पर रखा। मान्यता है कि जहांगीर ओरछा आए थे और इस महल में राजा वीर सिंह के मेहमान के तौर पर एक दिन ठहरे थे। इसी के बाद महल की पहचान ‘जहांगीर महल’ के रूप में स्थापित हो गई।
हालांकि इतिहास को लेकर एक अलग मत भी सामने आता रहा है। कुछ इतिहासकारों का दावा है कि जहांगीर इस महल में आए ही नहीं थे। इसी ऐतिहासिक दावे के आधार पर महल के नाम को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
इसी आधार पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी कह चुके हैं कि यदि जहांगीर यहां आए ही नहीं थे तो महल का नाम उसके वास्तविक निर्माता राजा वीर सिंह के नाम पर किया जाना चाहिए।
