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नलखेड़ा के मां बगलामुखी मंदिर के नाम पर फर्जी समिति से दान वसूली का आरोप, कलेक्टर ने बैठाई जांच

Published: Wed, 08 Jul 2026 05:45 PM (IST)

नलखेड़ा के मां बगलामुखी मंदिर में एक फर्जी समिति द्वारा दान वसूली के आरोपों पर कलेक्टर ने जांच समिति गठित ...और पढ़ें

मां बगलामुखी मंदिर में चंदा चोरी का आरोप।

मां बगलामुखी मंदिर में चंदा चोरी का आरोप।

HighLights

  1. नलखेड़ा मां बगलामुखी मंदिर में दान वसूली पर गंभीर आरोप।

  2. फर्जी समिति बनाकर श्रद्धालुओं से नकद, आभूषण दान लिए गए।

  3. कलेक्टर ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की, सात दिन में रिपोर्ट।

डिजिटल डेस्क, इंदौर। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में भी दान संग्रह को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि मंदिर के नाम पर एक अशासकीय (फर्जी) समिति बनाकर श्रद्धालुओं से नकद राशि और सोने-चांदी के आभूषण दान के रूप में लिए गए तथा इसके बदले रसीदें भी जारी की गईं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर प्रीति यादव ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बीएस सोलंकी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को सात दिन के भीतर पूरे मामले की जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मंदिर के रजत सुंदरीकरण के नाम पर कुछ लोगों ने समिति बनाकर मंदिर परिसर में ही श्रद्धालुओं से दान एकत्रित किया। चूंकि मां बगलामुखी मंदिर शासकीय प्रबंधन के अधीन संचालित होता है, इसलिए निजी लोगों द्वारा समिति बनाकर दान संग्रह किए जाने पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कलेक्टर प्रीति यादव ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सात दिन में सौंपनी होगी रिपोर्ट

जांच समिति में जिला पंचायत सीईओ बीएस सोलंकी के अलावा जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी और नलखेड़ा नगर परिषद की मुख्य नगरपालिका अधिकारी मिनी अग्रवाल को सदस्य बनाया गया है। समिति दान संग्रह की प्रक्रिया, नकद राशि तथा स्वर्ण-रजत के लेखे-जोखे और लगाए गए आरोपों की जांच कर सात दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

मंदिर परिसर में ही काटी जा रही थीं रसीदें

बताया जा रहा है कि संबंधित समिति मंदिर परिसर में ही श्रद्धालुओं से दान लेकर रसीद जारी कर रही थी। जबकि मंदिर का प्रबंधन शासन के अधीन है और इसके अध्यक्ष एसडीएम (डिप्टी कलेक्टर) तथा सचिव तहसीलदार होते हैं। मंदिर कार्यालय का संचालन आउटसोर्स कर्मचारियों के माध्यम से किया जाता है और प्रशासनिक अधिकारी समय-समय पर मंदिर का निरीक्षण भी करते हैं। इसके बावजूद लंबे समय तक निजी समिति द्वारा दान संग्रह किए जाने के आरोपों ने मंदिर प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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पांडवकालीन सिद्धपीठ है मां बगलामुखी मंदिर

आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में लखुंदर नदी के तट पर स्थित मां बगलामुखी मंदिर देश के प्रमुख सिद्धपीठों में माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि महाभारत युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर युधिष्ठिर ने यहां मां बगलामुखी की आराधना की थी। मंदिर में मां बगलामुखी के साथ मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की स्वयंभू प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। यह सिद्धपीठ तंत्र साधना और न्यायालयी मामलों में सफलता की कामना के लिए देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।