बांग्लादेश के शिविर से भारत लाई गईं म्यामांर की 4 युवतियां, जम्मू में बेचने की थी तैयारी; ग्वालियर-अलीगढ़ में दो बिचौलिए गिरफ्तार
पुलिस ने बांग्लादेश के कुतुपालोंग शरणार्थी शिविर से अवैध रूप से भारत लाई गईं चार म्यांमार युवतियों को ग्वालियर और ...और पढ़ें

ग्वालियर जीआरपी की गिरफ्त में बांग्लादेश से लाई गईं चारों युवतियां और म्यामांर के दोनों बिचौलिए (बैठे हुए)। (सौजन्य : जीआरपी)
HighLights
बांग्लादेश शिविर से लाई गईं चार म्यांमार युवतियां बरामद।
ग्वालियर और अलीगढ़ से दो बिचौलिए गिरफ्तार किए गए।
युवतियों को जम्मू में बेचने और शादी कराने की योजना थी।
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। बांग्लादेश के कुतुपालोंग शरणार्थी शिविर से कथित तौर पर अवैध तरीके से भारत लाई गईं म्यांमार की चार युवतियों को पुलिस ने बरामद किया है। मामले में दो बिचौलियों को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपित म्यांमार के मूल निवासी हैं और लंबे समय से भारत में अवैध रूप से रह रहे थे।
जांच में सामने आया है कि युवतियों को कथित तौर पर दुर्गम रास्तों से सीमा पार कराकर भारत लाया गया था। इसके बाद उन्हें जम्मू ले जाकर बेचने और वहां शादी कराने की योजना थी। कार्रवाई के दौरान एक आरोपित को ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से पकड़ा गया, जबकि उसकी निशानदेही पर दूसरे आरोपित को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से चारों युवतियों के साथ गिरफ्तार किया गया।
ट्रेन में सफर कर रहा था पहला आरोपित
रेलवे पुलिस के स्पेशल डीजी राजाबाबू सिंह के मुताबिक, भोपाल स्थित जीआरपी कंट्रोल रूम से मिली सूचना के आधार पर स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस की जांच की गई। ट्रेन के जनरल कोच में सफर कर रहे 25 वर्षीय मुबीन को ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर उतारकर हिरासत में लिया गया।
पूछताछ में सामने आया कि मुबीन म्यांमार के बूशीदंग थम्बाजार का रहने वाला है और हैदराबाद के रायल कॉलोनी, बालापुर में अपने परिवार के साथ रह रहा था।
निशानदेही पर अलीगढ़ में दबिश
पुलिस पूछताछ में मुबीन ने अपने साथी मोहम्मद हसन (35) के बारे में जानकारी दी। उसने बताया कि हसन चार युवतियों के साथ अलीगढ़ में किराये के मकान में ठहरा हुआ है।
इसके बाद पुलिस टीम ने अलीगढ़ में दबिश देकर मोहम्मद हसन को पकड़ा और उसके कब्जे से चार युवतियों को बरामद किया। इनमें दो नाबालिग भी बताई गई हैं।
दुर्गम रास्तों से सीमा पार कराने का दावा
पुलिस के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि युवतियों को बांग्लादेश के कुतुपालोंग शरणार्थी शिविर से कथित तौर पर पहाड़ी और दुर्गम रास्तों के जरिए भारतीय सीमा में दाखिल कराया गया था।
आरोपितों पर युवतियों को जम्मू ले जाकर बेचने और वहां उनकी शादी कराने की योजना बनाने का आरोप है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
भाषा बनी चुनौती, गूगल ट्रांसलेटर से हुई पूछताछ
बरामद युवतियों को केवल बंगाली और असमिया भाषा आती है। ऐसे में पुलिस के सामने उनसे पूछताछ करना चुनौतीपूर्ण था। अधिकारियों ने गूगल ट्रांसलेटर और द्विभाषी की मदद से युवतियों से बातचीत की।
पूछताछ के दौरान युवतियों ने कथित तौर पर उन्हें भारत लाए जाने और बेचने की योजना के बारे में जानकारी दी। ग्वालियर जीआरपी थाना प्रभारी दीपशिखा तोमर के अनुसार, मामले की विस्तृत जांच और पूछताछ जारी है। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं।
