ई-रिक्शा पर अब मनमानी नहीं! 60 दिन में बनेगी राष्ट्रीय नीति, MP को 120 दिन में तय करने होंगे नियम
ग्वालियर हाई कोर्ट ने शहरों में बढ़ते ई-रिक्शा से हो रही यातायात अव्यवस्था पर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने केंद्र ...और पढ़ें

सड़क पर दौड़ते ई-रिक्शा। (फाइल फोटो)
HighLights
हाई कोर्ट ने ई-रिक्शा संचालन पर राष्ट्रीय नीति बनाने को कहा।
केंद्र सरकार को 60 दिन में नीति तैयार करने का निर्देश।
मध्य प्रदेश सरकार 120 दिन में अपनी राज्य नीति अधिसूचित करेगी।
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। शहरों में बढ़ते ई-रिक्शा और उससे पैदा हो रही यातायात अव्यवस्था को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बड़ा हस्तक्षेप किया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को 60 दिनों के भीतर ई-रिक्शा संचालन के लिए राष्ट्रीय नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस नीति के आधार पर देशभर में ई-रिक्शा की संख्या, उनके संचालन के रूट और रूट परमिट की व्यवस्था तय की जा सकेगी।
हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को भी 10 सितंबर से 120 दिनों के भीतर प्रदेश की व्यापक ई-रिक्शा नीति अधिसूचित करने के निर्देश दिए हैं। राज्य को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप राष्ट्रीय नीति में जरूरी बदलाव करने की छूट रहेगी।
कितने ई-रिक्शा चलेंगे, कहां चलेंगे: तय होगा नियम
प्रस्तावित राष्ट्रीय नीति में ई-रिक्शा की संख्या को नियंत्रित करने के साथ उनके लिए निर्धारित रूट और रूट परमिट की व्यवस्था का ढांचा तैयार किया जाएगा। इससे सड़कों की क्षमता के अनुसार किसी शहर में ई-रिक्शा की संख्या निर्धारित करने और अत्यधिक यातायात दबाव वाले मार्गों को व्यवस्थित करने का रास्ता साफ होगा।
अभी अलग-अलग शहरों में ई-रिक्शा संचालन को लेकर एकरूप और स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने से यातायात प्रबंधन की चुनौती बनी हुई है। नई राष्ट्रीय नीति के जरिए इन नियमों को एक व्यापक ढांचे में लाने की तैयारी है।
स्थानीयता के मुताबिक अलग हो सकते हैं नियम
केंद्र की नीति लागू होने के बाद मध्य प्रदेश सरकार को अपनी स्थानीय जरूरत और परिस्थितियों के अनुसार नियम तय करने की छूट होगी। यानी प्रदेश के अलग-अलग शहरों में ई-रिक्शा की संख्या और रूट एक जैसे होना जरूरी नहीं होगा।
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में यातायात दबाव, सड़क क्षमता और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए अलग-अलग रूट और संख्या निर्धारित की जा सकती है। हालांकि राज्य सरकार को निर्धारित समयसीमा के भीतर अपनी व्यापक नीति अधिसूचित करनी होगी।
10 साल से चल रहे ई-रिक्शा
यह मामला हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका के जरिए पहुंचा था। निशा गुर्जर की याचिका में कहा गया था कि करीब 10 वर्षों से ई-रिक्शा का संचालन हो रहा है, लेकिन इनके लिए स्पष्ट और प्रभावी नियमन नहीं होने के कारण कई शहरों में जाम और यातायात संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
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याचिका में परमिट और शुल्क का भुगतान कर ई-रिक्शा संचालित करने वाले वाहन मालिकों पर संभावित नियमों के प्रभाव का मुद्दा भी उठाया गया था। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने भी ई-रिक्शा के रूट और परमिट के नियमन को व्यापक स्तर की समस्या माना।
राष्ट्रीय नीति बनेगी आधार, राज्य तय करेंगे स्थानीय नियम
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका का निराकरण करते हुए केंद्र और राज्य दोनों के लिए समयसीमा तय की है। अब केंद्र की प्रस्तावित नीति देशभर में ई-रिक्शा संचालन के लिए आधारभूत ढांचा तैयार करेगी, जबकि राज्य सरकारें अपनी स्थानीय जरूरतों के मुताबिक उसमें आवश्यक प्रावधान जोड़ सकेंगी।
