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MP के चीता लैंडस्केप में 10 तेंदुओं के शिकार मामले में कोर्ट में परिवाद दायर, वाइल्ड लाइफ एसओएस संचालक से साढ़े नौ घंटे पूछताछ

Published: Tue, 29 Sep 2026 11:30 PM (IST)

मध्य प्रदेश के चीता लैंडस्केप में 10 तेंदुओं के शिकार मामले में शिवपुरी कोर्ट में परिवाद दायर किया गया है। ...और पढ़ें

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HighLights

  1. चीता लैंडस्केप में 10 तेंदुओं के शिकार पर कोर्ट में परिवाद।

  2. वाइल्ड लाइफ एसओएस संचालक कार्तिक सत्यनारायण से लंबी पूछताछ।

  3. 10 आरोपित गिरफ्तार, तेंदुए के अंग और फंदे जब्त।

डिजिटल डेस्क, शिवपुरी। मध्य प्रदेश के अति संवेदनशील चीता लैंडस्केप में 10 तेंदुओं के शिकार के मामले में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवपुरी के समक्ष कोर्ट में परिवाद दायर किया है।

30 जुलाई को शुरू हुई थी बड़ी कार्रवाई

प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव के निर्देश पर चल रहे अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ अभियान में 30 जुलाई को बड़ी कार्रवाई हुई थी। एसटीएसएफ भोपाल, एसटीएसएफ शिवपुरी, कूनो वन्यप्राणी मंडल और श्योपुर वन मंडल की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर दो आरोपितों की निशानदेही पर तेंदुए की 42 हड्डियां जब्त की थीं। जांच में संगठित गिरोह का हाथ सामने आया था।

दस गिरफ्तार, तेंदुए के अंग, फंदे और चाकू बरामद

अब तक हरियाणा, मध्य प्रदेश और दिल्ली के 10 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनके पास से तेंदुए के भारी मात्रा में अवयव, शिकार में उपयोग होने वाले छह घातक फंदे और एक चाकू भी जब्त हुआ है। पुलिस के अनुसार गिरोह ने श्योपुर और मुरैना में 10 तेंदुओं का शिकार किया था, जो चीता लैंडस्केप क्षेत्र में आता है।

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कार्तिक सत्यनारायण से साढ़े नौ घंटे पूछताछ

शिकार से जुड़े मामले में वाइल्ड लाइफ एसओएस के संचालक कार्तिक सत्यनारायण भी सोमवार को शिवपुरी स्थित एसटीएसएफ कार्यालय पहुंचे, जहां वन प्रशासन की विशेष कार्य बल की टीम ने उनसे करीब साढ़े नौ घंटे तक पूछताछ की। दरअसल जो आरोपित पकड़े गए हैं उनका कार्तिक की संस्था से संबंध रहा है।

पूछताछ के बाद मीडिया से बातचीत में कार्तिक सत्यनारायण ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उनके और उनके संगठन के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने पूरे मामले को एक गहरी साजिश बताया और कहा कि वह अपने स्तर पर भी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इसके पीछे किसका हाथ है। कार्तिक का कहना था कि वह पिछले करीब 30 वर्षों से वन्यजीवों को बचाने के काम में जुटे हैं और उनकी पूरी टीम ईमानदारी से संरक्षण के लिए काम करती रही है।