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चंबल में रेत माफिया पर AI का शिकंजा: 45 मीटर ऊंचे टावर से होगी 5 किमी तक निगरानी, हाईवे पर भी लगेंगे ‘डिजिटल पहरेदार’

By Hariom GoudEdited By: Ravindra Soni
Published: Mon, 26 Oct 2026 05:09 PM (IST)

मुरैना प्रशासन ने चंबल नदी में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का ...और पढ़ें

-तस्वीर एआई से निर्मित।

-तस्वीर एआई से निर्मित।

हरिओम गौड़, मुरैना। चंबल नदी में रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन पर लगाम लगाने के लिए अब तकनीक के जरिए रेत माफिया की निगरानी की जाएगी। सुरक्षा बलों की तैनाती, सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन जैसी व्यवस्थाओं के बावजूद अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगने के बाद मुरैना प्रशासन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सहारा लिया है। रिठौरा घाट पर 45 मीटर ऊंचा एआई टावर तैयार किया गया है, जबकि हाईवे पर अवैध रेत और पत्थरों के परिवहन की पहचान के लिए दो एआइ ई-चेकगेट भी लगाए गए हैं।

तीनों व्यवस्थाओं का फिलहाल 15 दिन का ट्रायल चल रहा है। इनका उद्देश्य घाटों पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों से लेकर सड़कों पर दौड़ने वाले अवैध खनिज परिवहन के वाहनों तक पर नजर रखना है। प्रशासन को उम्मीद है कि तकनीक की मदद से रात के अंधेरे में होने वाले उत्खनन और परिवहन पर भी प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी।

टावर से पांच किलोमीटर के दायरे पर नजर

रिठौरा घाट पर तैयार एआई टावर की लागत करीब सवा करोड़ रुपये बताई गई है। मोबाइल टावर की तरह दिखने वाली इस संरचना पर हाईटेक कैमरे लगाए जा रहे हैं। इसके लिए विशेष सॉफ्टवेयर भी तैयार किया जा रहा है, जो चंबल नदी के घाटों की सामान्य भौगोलिक स्थिति में होने वाले बदलावों को पहचान सकेगा।

सॉफ्टवेयर के जरिए रेत के टीलों और टापुओं की स्थिति में बदलाव, नए गड्ढे बनने या घाट की जमीन में असामान्य परिवर्तन जैसी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। किसी संदिग्ध बदलाव का पता चलने पर कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजने की व्यवस्था की जा रही है।

इस तकनीक में रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन में इस्तेमाल होने वाली जेसीबी, हाइड्रा तथा ट्रैक्टर-ट्राली जैसे वाहनों की पहचान से जुड़ी विशेषताएं भी फीड की जाएंगी। संदिग्ध वाहन घाट पर पहुंचते ही सिस्टम उसकी गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में मदद करेगा।

फोटो-वीडियो बनेंगे कार्रवाई के साक्ष्य

एआई टावर पर लगे कैमरे संदिग्ध गतिविधियों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर सकेंगे। इससे अधिकारियों को मौके पर हर समय कर्मचारियों की तैनाती पर निर्भर रहने के बजाय कंट्रोल रूम से निगरानी करने में मदद मिलेगी।

टावर को चंबल घड़ियाल अभयारण्य के डीएफओ कार्यालय और पुलिस कंट्रोल रूम से जोड़ने की प्रक्रिया भी की जा रही है। ट्रायल के दौरान दिन और रात में अलग-अलग समय पर वाहनों तथा अन्य गतिविधियों के जरिए सिस्टम की कार्यक्षमता परखी जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, ट्रायल के दौरान सूचनाएं कंट्रोल रूम तक पहुंचने लगी हैं। बीच में सर्वर से जुड़ी तकनीकी समस्या आई थी, जिसे दुरुस्त कर दिया गया है। हालांकि, व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होगी, इसका वास्तविक आकलन ट्रायल पूरा होने और तकनीक के नियमित संचालन के बाद ही हो सकेगा।

हाईवे पर भी डिजिटल निगरानी 

अवैध उत्खनन के साथ रेत और पत्थरों की ढुलाई पर निगरानी रखने के लिए हाईवे पर भी तकनीकी व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत दो एआइ ई-चेकगेट लगाए गए हैं।

पहला ई-चेकगेट नेशनल हाईवे-43 पर धौलपुर रोड स्थित अल्लाबेली चौकी के पास लगाया गया है। इससे राजघाट, बरवासिन और आसपास के घाटों से होने वाले रेत परिवहन पर नजर रखने में मदद मिलेगी। दूसरा चेकगेट बानमोर क्षेत्र में लगाया गया है, जहां रेत के साथ पत्थरों के अवैध परिवहन की निगरानी की जाएगी।

इन चेकगेट पर रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) तकनीक के माध्यम से वैध परिवहन से जुड़े वाहनों की पहचान की जाएगी। निर्धारित पहचान संबंधी जानकारी नहीं मिलने पर संदिग्ध वाहन की फोटो और वीडियो लेकर कंट्रोल रूम को सूचना भेजी जाएगी, ताकि आगे जांच और कार्रवाई की जा सके।

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रात के अंधेरे में अवैध उत्खनन रोकने की चुनौती

चंबल नदी में अवैध रेत उत्खनन रोकना प्रशासन के लिए लंबे समय से चुनौती बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद घाटों से लेकर हाईवे तक निगरानी बढ़ाई गई है। एसएएफ की दो कंपनियों की तैनाती और पारंपरिक निगरानी के उपायों के बावजूद अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाना आसान नहीं रहा है।

डीएफओ एससी बघेल के अनुसार, एआई टावर और ई-चेकगेट के ट्रायल के दौरान सूचनाएं मिलने लगी हैं। रात में अवैध उत्खनन और परिवहन की निगरानी करते समय कर्मचारियों को जोखिम का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था संदिग्ध वाहनों और गतिविधियों की पहचान कर समय पर कार्रवाई करने में सहायक हो सकती है।