मिहिर भोज गुर्जर थे या क्षत्रिय? 5 साल की जांच के बाद हाई कोर्ट में पेश हुई सीलबंद रिपोर्ट; अब निष्कर्षों पर होगी सुनवाई
सम्राट मिहिर भोज को गुर्जर या क्षत्रिय समाज से जोड़ने के विवाद में पांच साल बाद हाई कोर्ट में गठित ...और पढ़ें

ग्वालियर हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)
HighLights
सम्राट मिहिर भोज विवाद पर हाई कोर्ट में रिपोर्ट पेश।
पांच साल बाद गठित कमेटी ने सीलबंद रिपोर्ट सौंपी।
अगली सुनवाई में रिपोर्ट के निष्कर्षों पर होगा विचार।
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। सम्राट मिहिर भोज को गुर्जर या क्षत्रिय समाज से जोड़ने को लेकर चल रहे विवाद में करीब पांच साल बाद अहम घटनाक्रम सामने आया है। हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित कमेटी की सीलबंद रिपोर्ट अब न्यायालय में पेश कर दी गई है। शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेडकर ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जा चुकी है। अब अगली सुनवाई में रिपोर्ट के निष्कर्षों पर विचार किया जाएगा।
यह मामला वर्ष 2021 में राहुल साहू की ओर से दायर जनहित याचिका के जरिए हाई कोर्ट पहुंचा था। ग्वालियर में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के नाम के साथ ‘गुर्जर’ शब्द लिखे जाने के बाद उनके सामाजिक परिचय को लेकर गुर्जर और क्षत्रिय समाज के बीच विवाद सामने आया था।
2021 में बनी थी जांच कमेटी
विवाद की पड़ताल के लिए हाई कोर्ट ने 24 सितंबर 2021 को एक कमेटी गठित की थी। ग्वालियर संभाग आयुक्त को कमेटी का अध्यक्ष और ग्वालियर रेंज के आइजी को उपाध्यक्ष बनाया गया था। इसके अलावा गुर्जर और क्षत्रिय समाज के एक-एक प्रतिनिधि को भी कमेटी में शामिल किया गया था।
कमेटी को ऐतिहासिक दस्तावेजों, साहित्य और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों समाजों के दावों की जांच करनी थी। इसके साथ ही यह पहलू भी देखना था कि सार्वजनिक धन से स्थापित किसी राष्ट्रीय नायक की प्रतिमा के नाम के साथ जाति का उल्लेख संवैधानिक भावना के अनुरूप है या नहीं।
इतिहासकारों की रिसर्च और दोनों पक्षों के अभ्यावेदन शामिल
शासन की ओर से प्रस्तुत स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार कमेटी ने इतिहासकारों की रिसर्च, विभिन्न स्थानों से जुटाई गई जानकारी और दोनों समाजों की ओर से दिए गए अभ्यावेदनों को अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है। अब यही रिपोर्ट न्यायालय के सामने सीलबंद रूप में है और इसके निष्कर्षों के आधार पर मामले की आगे की दिशा तय होगी।
मिहिर भोज के कथित वंशज ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान अरुणोदय सिंह ने खुद को सम्राट मिहिर भोज का वंशज बताते हुए कमेटी की प्रक्रिया पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि रिपोर्ट तैयार कर ली गई, लेकिन कमेटी ने उनका पक्ष नहीं सुना। उन्होंने इसी आधार पर रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। हालांकि शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कमेटी अपनी रिपोर्ट पहले ही सीलबंद लिफाफे में न्यायालय में प्रस्तुत कर चुकी है।
विधायक साहब सिंह गुर्जर की ओर से भी पक्ष रखा गया
विधायक साहब सिंह गुर्जर की ओर से पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता राजीव शर्मा ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि विधायक के क्षेत्र में गुर्जर समाज की बड़ी आबादी है। समाज के लोग अपनी समस्याएं और अपनी बात लेकर जनप्रतिनिधि के पास आते हैं। उनका कहना था कि इसी वजह से विधायक को ‘साफ्ट टारगेट’ बनाया जा रहा है।
2021 का कानून-व्यवस्था संबंधी आदेश अभी प्रभावी
मामले में हाई कोर्ट का वर्ष 2021 में कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर दिया गया आदेश फिलहाल प्रभावी है। उस समय प्रशासन को सार्वजनिक स्थानों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही दोनों समाजों से संयम बरतने की अपेक्षा की गई थी।
अब पांच साल बाद कमेटी की सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट में पेश होने के बाद उसकी सामग्री और निष्कर्ष अगली सुनवाई में अहम रहेंगे। न्यायालय रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर विचार करेगा।
