कूनो से आई बुरी खबर: नामीबियाई चीता गौरव की मौत, वंशवृद्धि में था अहम योगदान
मौत की वजह स्पष्ट नहीं, कूनो प्रबंधन ने कहा- बीमार हालत में 12 दिन पहले किया था रेस्क्यू। -10 साल ...और पढ़ें

गौरव चीता (फाइल फोटो- कूनो प्रबंधन)
HighLights
चीते की मौत के समय को लेकर उठे गंभीर सवाल।
चीतों की वंशवृद्धि में गौरव का था महत्वपूर्ण योगदान।
कमजोर और डिहाइड्रेशन के कारण इलाज के दौरान दम तोड़ा।
डिजिटल डेस्क, श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में सोमवार शाम एक चीते की मौत हो गई। लगभग 10 वर्ष के इस नामीबियाई चीते गौरव ने शाम चार बजे उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। उसकी मृत्यु का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। पार्क प्रबंधन के अनुसार, उसे 12 सितंबर को जंगल में बेहद कमजोर और सुस्त अवस्था में देखा गया था। इसके बाद बाड़े में लाकर इलाज किया जा रहा था।
गौरव उन आठ चीतों में से था, जो 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से भारत लाए गए थे। अब नामीबिया से लाए गए दो चीते ही बचे हैं। कूनो में चीतों की कुल संख्या 51 रह गई है। चार चीते मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य में हैं।
गंभीर व्याधियों से ग्रस्त था
कूनो प्रबंधन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, चिकित्सकीय जांच में गौरव की हालत काफी चिंताजनक पाई गई। उसके शरीर की मांसपेशियां कमजोर हो चुकी थीं और गंभीर डिहाइड्रेशन की स्थिति थी। तत्काल जरूरी दवाएं देने के साथ सपोर्टिव केयर शुरू की। इसके बाद उसे क्वारंटीन बोमा (बाड़ा) में रखा गया।
प्रारंभिक जांच में किसी पुरानी बीमारी से ग्रसित होने की आशंका जताई गई थी। उपचार के बावजूद उसकी सेहत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। कूनो अधिकारियों का कहना है कि अब पोस्टमार्टम के साथ शरीर से लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला में जांच कराई जाएगी।
कूनो में वंशवृद्धि का हीरो था गौरव
नामीबियाई चीता गौरव (पहला नाम एल्टन) और उसका भाई शौर्य (फ्रेडी) की जोड़ी को 'रॉकस्टार ब्रदर्स' कहा जाता था। इनका नाम नाम ब्रिटिश सिंगर एल्टन जान और फ्रेडी मर्करी पर रखे गए थे। कूनो में वंशवृद्धि की शुरुआत में इसकी अहम भूमिका रही है। कूनो प्रबंधन के अनुसार, नामीबियाई मादा ज्वाला के सबसे पहले मार्च 2023 में जो चार शावक पैदा हुए थे, वह गौरव के ही थे। इसके बाद दक्षिण अफ्रीकी चीता निर्वा के साथ ब्रीडिंग से अप्रैल 2025 को पांच शावक जन्मे थे।
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यह प्रोजेक्ट चीता के लिए मील का पत्थर था, क्योंकि दो अलग-अलग महाद्वीपीय लाइनेज (नामीबिया और साउथ अफ्रीका) का मिक्स हुआ, जिससे इनब्रीडिंग का खतरा कम और जीन पूल मजबूत हुआ। गौरव 10 साल से ज्यादा जीया, जो चीतों के लिए काफी लंबी उम्र मानी जाती है। उसके भाई शौर्य की मौत लगभग ढाई साल पहले 16 जनवरी 2024 को इसी तरह हो गई थी।
मौत कब हुई, इसको लेकर सवाल
कूनो प्रबंधन के अनुसार, चीते की मौत सोमवार शाम हुई, हालांकि इससे एक दिन पहले ही भोपाल के वन्यजीव सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे ने इस चीते की मौत को लेकर एक्स पर पोस्ट किया था, जिसमें कहा गया था कि चीते की मौत चार दिन पहले ही हो चुकी है और उसका शव भी फ्रीजर में रखा है। ऐसा माना जा रहा है कि 17 सितंबर को भारत में चीतों की वर्षगांठ, उसके एक दिन बाद चार शावकों के जन्म और 20 सितंबर को मंदसौर में मुख्यमंत्री द्वारा चीता छोड़े जाने के कार्यक्रम के चलते इस सूचना की छिपा कर रखा गया।
