विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

न भाई, न हमवतन... फिर भी हैं जिगरी यार! कूनो में अलग-अलग देशों के दो चीतों की दोस्ती ने विशेषज्ञों को चौंकाया

Published: Mon, 21 Sep 2026 07:51 PM (IST)

कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मे नर चीता KNG-23 और बोत्सवाना से लाए गए नर चीता CCB-4 के बीच ...और पढ़ें

कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मा केएनजी-23 और बोत्सवाना से लाया गया सीसीबी-4 चीता बने जिगरी दोस्त। (सौजन्य- कूनो प्रबंधन)

कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मा केएनजी-23 और बोत्सवाना से लाया गया सीसीबी-4 चीता बने जिगरी दोस्त। (सौजन्य- कूनो प्रबंधन)

HighLights

  1. भारत में जन्मा KNG-23 और बोत्सवाना का CCB-4 दोस्त बने।

  2. दोनों चीते साथ रहते हैं, शिकार करते हैं और भोजन साझा करते हैं।

  3. अलग-अलग देशों के चीतों की यह दोस्ती व्यवहारिक अध्ययन का विषय।

डिजिटल डेस्क, श्योपुर। अक्सर देखा जाता रहा है कि सगे भाई या बचपन से साथ रहने वाले चीतों में दोस्ताना संबंध हो जाते हैं, लेकिन कूनो नेशनल पार्क में उन दो चीतों के बीच पक्की दोस्ती हो गई है जो अलग-अलग देशों के हैं। वह साथ रहते हैं, साथ मिलकर जानवरों का शिकार करते हैं और एक-दूसरे के लिए किसी भी जानवर से भिड़ने को तैयार हो जाते हैं। इन चीतों की यह अनोखी दोस्ती कूनो नेशनल पार्क में चर्चा का विषय बन गई है।कूनो में चीता परियोजना में शामिल अधिकारियों ने दोनों चीतों की अनोखी दोस्ती की कहानी बयां की है।

एक भारत में जन्मा, दूसरा बोत्सवाना से आया

यह कहानी भारत में चीता निर्वा से जन्मे नर चीता केएनजी-23 और बोत्सवाना से लाए गए नर जीता सीसीबी-4 की है। दोनों चीते न तो भाई हैं और न ही एक साथ पले-बढ़े हैं, लेकिन अलग-अलग देशों से आने के बावजूद दोनों अब एक-दूसरे के साथ सहज नजर आ रहे हैं। कूनो के अधिकारियों के अनुसार, चीता केएनजी-23 को मार्च 2026 को मामूली चोट के कारण परिवार से अलग किया गया था। इसी दौरान उसका संपर्क सीसीबी-4 से हुआ।

बाड़ हटाई तो नहीं हुई लड़ाई, साझा किया शिकार

दोनों के बीच नजदीकी बढ़ी। बाद में केएनजी-23 को परिवार के साथ जंगल में छोड़ा गया, लेकिन जुलाई के अंत में दोबारा घायल होने के बाद उसे उपचार के लिए वापस लाया गया। उस समय सीसीबी-4 भी अकेला था। इसके बाद दोनों को फिर करीब रखा गया। बाड़ हटाकर दोनों को साथ लाया गया तो मुलाकात शांतिपूर्ण रही। शिकार उपलब्ध कराने पर दोनों ने बिना किसी आक्रामकता के भोजन साझा किया। इसके बाद केएनजी-23, सीसीबी-4 का पीछा करने लगा।

दूसरे चीतों से चुनौती मिली तो भी साथ

दोनों एक-दूसरे की नजरों से दूर होने पर आवाज देकर संपर्क करते हैं। दूसरे चीतों से चुनौती मिलने पर एक-दूसरे का साथ देने के संकेत भी दिखे। दोनों एक-दूसरे की ग्रूमिंग भी करने लगे हैं। असली टेस्ट तब हुआ जब उनके सामने शिकार रखा गया- दोनों ने बिना लड़ाई, बिना गुर्राए एक ही शिकार को शेयर किया। उसके बाद से एक-दूसरे के पीछे-पीछे चलना, साथ शिकार और साथ खाना, एक ओझल हो तो दूसरा चिरपिंग (चीतों की संपर्क वाली आवाज) करके बुलाना देखा गया।

यह भी पढ़ें- चीतों की बढ़ती संख्या ने बढ़ाया क्रेज, 1 अक्टूबर से फिर खुलेगा कूनो; पिछले सीजन में पहुंचे थे 9000 से ज्यादा पर्यटक

क्या स्थायी गठबंधन में बदलेगी यह दोस्ती?

फील्ड टीम के मुताबिक नर चीतों में गठबंधन आमतौर पर एक ही लिटर के सगे भाइयों के बीच बनता है। ऐसे में अलग-अलग देशों में जन्मे और असंबंधित दो नर चीतों का इस तरह साथ रहना खास है।

अब नजर इस बात पर है कि केएनजी-23 और सीसीबी-4 की यह दोस्ती कितने समय तक कायम रहती है और क्या यह आगे चलकर स्थायी गठबंधन का रूप लेती है। यदि ऐसा होता है, तो कूनो में बनी यह जोड़ी चीता व्यवहार के अध्ययन के लिहाज से एक असाधारण उदाहरण बन सकती है।