चीता के शिकार में दो सगे भाई गिरफ्तार, मुरैना से STF ने बरामद की लाइसेंसी बंदूक
कूनो नेशनल पार्क के बाहर 19 महीने के चीते के शिकार मामले में दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया गया ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
कूनो चीता शिकार मामले में दो भाई गिरफ्तार।
लाइसेंसी दोनाली बंदूक से किया था शिकार, बरामद।
कूनो नेशनल पार्क के बाहर चीते को मारी थी गोली।
डिजिटल डेस्क, श्योपुर। कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकले 19 माह के चीता के शिकार के मामले में दो भाइयों को गिरफ्तार किया गया है। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के अनुसार, दोनों आरोपियों ने शिकार के लिए अपनी लाइसेंसी दोनाली टोपीदार भरमार बंदूक का इस्तेमाल किया था। मुरैना के जंगल से बंदूक बरामद कर ली गई है।
मोबाइल लोकेशन से आरोपियों तक पहुंची एसटीएफ
बता दें कि 25 अक्टूबर को श्योपुर वनमंडल के विजयपुर वन परिक्षेत्र के नितनवास इलाके के जंगल में चीता घायल मिला था। सर्जरी के दौरान उसकी मौत हो गई। उसके शरीर से बंदूक के निकले छर्रे निकले। इससे शिकार की पुष्टि हो गई। राज्य शासन द्वारा गठित एसटीएफ ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर पड़ताल की तो 31 अक्टूबर को मुरैना के नवलपुरा-बेहरारा निवासी भगवान सिंह को गिरफ्तार किया।
सूअर का शिकार करने गए थे जंगल
उससे पूछताछ में पता चला है कि वह 24 अक्टूबर को भाई प्रीतम सिंह के साथ जंगली सूअर का शिकार करने जंगल में पहुंचा था। इसी दौरान चीता दिखा तो गोली चला दी, लेकिन उसे उस दिन ले जा नहीं पाए। एसटीएफ ने प्रीतम सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9 और 51 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
वहीं, भगवान सिंह के दामाद ब्रिजेंद्र मोगिया को चीता के शिकार के अगले दिन पहाड़गढ़ की वन विभाग ने जंगली सूअर के मीट के साथ पकड़कर जेल भेजा था।
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नाले में मारी थी गोली, इसलिए नहीं मिले थे खून के निशान
दोनों शिकारियों ने नितनवास इलाके के एक नाले में चीता को गोली मारी थी। नाले में पानी और घनी झाड़ियां होने के कारण शुरुआत में ब्लड के सेंपल नहीं मिले, हालांकि बाद में कुछ किलोमीटर की दूरी पर ब्लड के सैंपल मिले। लैब में की गई जांच में इसकी पुष्टि हो गई है कि ब्लड चीता का ही था।