कूनो में चीतों की मौत पर फिर सवाल: बीमार होने का देर से क्यों चलता है पता? 'गौरव' की मौत के बाद उपचार-निगरानी पर उठे गंभीर प्रश्न
कूनो नेशनल पार्क में चीता गौरव की मौत के बाद चीतों की निगरानी और उपचार व्यवस्था पर फिर सवाल उठे ...और पढ़ें

कूनो में चीता (फाइल फोटो)
HighLights
चीता गौरव की मौत से कूनो में निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल।
वन्यजीव कार्यकर्ता ने मृत चीतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मांग की।
चीता परियोजना में बीमारी का समय पर पता लगाना बड़ी चुनौती।
डिजिटल डेस्क, श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापना योजना के तहत चीतों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन लगातार हो रही मौतों के बीच उनकी निगरानी और उपचार व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। सोमवार को चीता गौरव की मौत के बाद यह सवाल फिर चर्चा में है कि बीमार चीतों की गंभीर स्थिति का पता समय रहते क्यों नहीं चल पा रहा है।
कूनो में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जब बीमार या घायल चीतों को उपचार के लिए अस्पताल लाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने अब सूचना के अधिकार (RTI) के तहत एक जनवरी 2024 से अब तक मृत चीतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी है। उनका उद्देश्य मौत के कारणों और उपचार व्यवस्था से जुड़े तथ्यों की जानकारी हासिल करना है।
गौरव की हालत गंभीर होने के बाद चला बीमारी का पता
कूनो प्रबंधन के अनुसार, चीता गौरव 12 सितंबर को निगरानी दल को बीमार नजर आया था। जांच के दौरान उसकी किडनी संबंधी परेशानी समेत अन्य समस्याएं सामने आईं। प्रबंधन का कहना है कि उस समय तक उसकी हालत काफी गंभीर हो चुकी थी।
स्थिति इतनी नाजुक थी कि डॉक्टरों के लिए बार-बार बेहोश कर चेकअप करना और दवाएं देना भी जोखिम भरा था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही चीतों की स्वास्थ्य निगरानी के जरिए समस्या पकड़ में आ जाए तो क्या उपचार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
कूनो प्रबंधन की ओर से अब तक मृत चीतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मृत्यु के विस्तृत कारण नियमित रूप से सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसी को लेकर वन्यजीव कार्यकर्ता ने आरटीआई के माध्यम से रिपोर्ट मांगी है।
मौतों के वास्तविक कारण, बीमारी की प्रकृति और उपचार के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद ही इस पर स्पष्ट तस्वीर बन सकेगी कि मौतों के पीछे प्राकृतिक कारण, संक्रमण, आपसी संघर्ष, चोट या अन्य वजहों की कितनी भूमिका रही।
29 अफ्रीकी चीतों में 10 की मौत
चीता पुनर्स्थापना परियोजना के तहत दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से भारत लाए गए चीतों में अब तक 29 में से 10 की मौत हो चुकी है। वहीं कूनो में जन्मे 53 शावकों में से 17 की मौत हुई है।
परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, चार वर्ष की अवधि में चीतों और भारत में जन्मे शावकों की जीवित रहने की स्थिति अंतरराष्ट्रीय अनुभवों की तुलना में पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। इसके बावजूद बीमारी या चोट का समय रहते पता लगना और तत्काल उपचार उपलब्ध कराना परियोजना की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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कूनो में अब तक चीतों की मौत के प्रमुख मामले
26 मार्च 2023: मादा चीता साशा की मौत। कारण किडनी संक्रमण बताया गया।
23 अप्रैल 2023: नर चीता उदय की मौत। कार्डियक आर्टरी फेल होने की बात सामने आई।
9 मई 2023: मादा चीता दक्षा की मेटिंग के दौरान घायल होने के बाद मौत।
23 और 25 मई 2023: ज्वाला के तीन शावकों की मौत।
11 जुलाई 2023: चीता तेजस की आपसी संघर्ष में मौत।
14 जुलाई 2023: नर चीता सूरज की मौत; संघर्ष में घायल होने की बात बताई गई।
2 अगस्त 2023: चीता धात्री का शव मिला; संक्रमण को मौत की वजह बताया गया।
16 जनवरी 2024: नर चीता शौर्य की मौत।
5 अगस्त 2024: गामिनी के एक शावक की मौत; रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर की बात सामने आई।
27 अगस्त 2024: नर चीता पवन का शव नाले में मिला।
28 नवंबर 2024: निर्वा के दो शावकों के शव क्षत-विक्षत हालत में मिले।
12 मई 2026: मादा चीता केजीपी-12 के चार शावक मांद के पास मृत मिले।
1 जून 2026: केजीपी-11 घायल अवस्था में मुरैना के जंगल में मिला और बाद में उसकी मौत हो गई।
चीता परियोजना के सामने अब चुनौती सिर्फ चीतों की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि उनकी बीमारी और चोट का शुरुआती स्तर पर पता लगाकर समय पर उपचार सुनिश्चित करने की भी है। गौरव की मौत के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट और निगरानी व्यवस्था से जुड़े सवाल एक बार फिर केंद्र में आ गए हैं।
कूनो में चीते सहित अन्य वन्यजीवों के उपचार या निगरानी में कोई लापरवाही नहीं है, यही कारण है कि देश का चीता प्रोजेक्ट पूरी तरह से सफल है। गौरव चीते को डाक्टरों ने बचाने के खूब प्रयास किए, विदेश के चीता विशेषज्ञों से लगातार संपर्क में रहे। वन्यजीव संस्थान, देहरादून की भी सेवाएं नियमित ली जाती हैं। चीता के किडनी में कई सारे इशु थे, इसलिए उसे बचाया नहीं जा सका। पोस्टमार्टम को लेकर जो भी सवाल हैं, विभाग निर्धारित प्रारूप व मापदंड में उनके जवाब देगा।
डा. समीता राजौरा, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ, मध्य प्रदेश।
