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भाई को बचाने 8 किमी दौड़ा, ₹800 देकर हाइड्रा लाया… फिर भी नहीं बची जान; ग्वालियर शीतला माता मंदिर हादसे की रुला देने वाली कहानी

Published: Sun, 18 Oct 2026 04:01 PM (IST)

शीतला माता मंदिर हादसे में सौरभ की बेबसी का वीडियो सामने आया। ट्रक के नीचे दबे भाई को बचाने के ...और पढ़ें

सौरभ (इनसेट में) तमाम प्रयासों के बावजूद अपने भाई गौरव को नहीं बचा सका। (सौजन्य- इंटरनेट मीडिया)

सौरभ (इनसेट में) तमाम प्रयासों के बावजूद अपने भाई गौरव को नहीं बचा सका। (सौजन्य- इंटरनेट मीडिया)

HighLights

  1. भाई को बचाने सौरभ 8 किमी दौड़ा, लाया हाइड्रा।

  2. ₹800 देकर भी गौरव की जान नहीं बचाई जा सकी।

  3. हादसे में शौर्य शर्मा और ताऊ महेश की भी दुखद मौत।

डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे के बाद सामने आ रहे वीडियो और तस्वीरें उस भयावह मंजर की गवाही दे रहे हैं। इसी बीच बड़ागांव खुरेरी निवासी सौरभ परिहार का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह अपने भाई गौरव परिहार को बचाने के लिए किए गए संघर्ष की कहानी बयां कर रहा है।

भाई ट्रक के नीचे दबा था। उसे बचाने के लिए सौरभ करीब आठ किलोमीटर तक दौड़ा और 800 रुपये ऑनलाइन देकर हाइड्रा लेकर पहुंचा, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद भाई की जान नहीं बच सकी।

बहन का पैर ट्रक के नीचे दबा था 

सौरभ के मुताबिक, वह अपने भाई गौरव, बहन और भाई के दोस्त के साथ शीतला माता मंदिर में मेले के दौरान दर्शन करने पहुंचा था। भाई का दोस्त गाड़ी में ही रुक गया, जबकि सौरभ अपने भाई और बहन के साथ मंदिर की ओर चला गया। इसी दौरान हादसा हो गया।

सौरभ ने बताया कि हादसे के बाद उसने देखा कि उसकी बहन का पैर ट्रक के टायर के नीचे दबा हुआ था। भाई कहीं दिखाई नहीं दिया। उसे आशंका हुई कि भाई भी ट्रक के नीचे फंसा है। इसके बाद वह मदद जुटाने के लिए दौड़ पड़ा। उस वक्त उसके सामने एक ही लक्ष्य था— किसी तरह भाई को ट्रक के नीचे से बाहर निकालना।

पुलिस से लगाई गुहार, फिर खुद हाइड्रा लेने पहुंचा

सौरभ ने बताया कि रास्ते में उसे पुलिसकर्मी मिले। उसने उनसे ट्रक उठाने के लिए क्रेन या हाइड्रा बुलाने की गुहार लगाई। पुलिसकर्मियों ने कुछ ही मिनटों में मदद पहुंचने की बात कही, लेकिन सौरभ इंतजार करने के बजाय मदद की तलाश में आगे बढ़ता रहा।
रास्ते में कुछ लोगों ने उसे लिफ्ट दी, जबकि कई वाहन नहीं रुके। आखिरकार वह विक्ट्री फैक्ट्री पहुंचा और ऑनलाइन 800 रुपये देकर हाइड्रा लेकर घटनास्थल पर पहुंचा। ट्रक को उठवाया भी गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उसका भाई जिंदगी की जंग हार चुका था।

सौरभ की आपबीती उस बेबसी को सामने लाती है, जब अपनों की जान बचाने के लिए इंसान हर संभव कोशिश करता है, लेकिन वक्त हाथ से निकल जाता है।

शौर्य और ताऊ की मौत, परिवार के अन्य सदस्य घायल

इस हादसे में 15 वर्षीय शौर्य शर्मा और उसके ताऊ महेश की मौत हो गई। शौर्य अपने परिवार के साथ मेले में आया था। हादसे में उसके परिवार के अन्य सदस्य भी प्रभावित हुए हैं। शौर्य के पिता संजय शर्मा, मां और परिवार के अन्य सदस्यों का ट्रॉमा सेंटर में उपचार चल रहा है।

यह परिवार मूल रूप से श्योपुर जिले के सहसराम गांव का रहने वाला है और कुछ समय से ग्वालियर में रह रहा है। मेले में दर्शन करने पहुंचे परिवार के लिए यह दिन कभी न भूलने वाला दुख बन गया।

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'ऐसा लगा, जैसे तेज तूफान आ गया हो'

हादसे में घायल शिवपुरी जिले के बरैठ गांव की 20 वर्षीय जाह्नवी ने भी उस खौफनाक मंजर को याद किया। वह अपनी बहन साक्षी और सहेली भावना के साथ शीतला माता मंदिर में दर्शन करने आई थी। हादसे में उसका पैर फ्रैक्चर हो गया।

जाह्नवी के मुताबिक, ट्रक के भीड़ में घुसते ही ऐसा लगा, जैसे तेज तूफान आ गया हो। किसी को कुछ समझने का मौका नहीं मिला। देखते ही देखते अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इसी दौरान वह भी गिर पड़ी। उसे याद नहीं कि उसके पैर पर कौन गिरा, लेकिन हादसे में उसका पैर टूट गया।

जाह्नवी ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वाले शौर्य और उसके ताऊ महेश भी उसी के गांव के रहने वाले थे।