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पटवारी की नौकरी का सपना दिखाकर 50 लाख ठगे, फर्जी ज्वाइनिंग लेटर देकर बेरोजगारों को फंसाया; ग्वालियर में तीन पर केस

Published: Mon, 26 Oct 2026 11:04 PM (IST)

ग्वालियर में पटवारी की सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवकों से करीब 50 लाख रुपये ठगे गए हैं। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र।

प्रतीकात्मक चित्र।

डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। मध्य प्रदेश में पटवारी की सरकारी नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर बेरोजगार युवकों से करीब 50 लाख रुपये ठगने का मामला सामने आया है। अब तक सात पीड़ित पुलिस के पास पहुंच चुके हैं, जबकि ठगी की रकम और प्रभावित युवकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। आरोप है कि ठगों ने खुद को व्यापम का कर्मचारी और एसटीएफ का आरक्षक बताकर युवकों को भरोसे में लिया। थाटीपुर थाना पुलिस ने तीन आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।

बड़े अधिकारियों से संपर्क का दावा कर जीता भरोसा

पुलिस के अनुसार, सिटी सेंटर के महलगांव निवासी राजवीर सिंह तोमर और उसके साथियों की मुलाकात दिसंबर 2023 में अरविंद नरवरिया से हुई थी। आरोप है कि अरविंद ने बड़े अधिकारियों से नजदीकी होने का दावा कर युवकों को सरकारी नौकरी लगवाने का भरोसा दिया।

इसके बाद उसने प्रदीप गौतम से मुलाकात कराई, जिसे व्यापम का कर्मचारी बताया गया। वहीं, गोवर्धन तोमर को एसटीएफ का आरक्षक बताकर पेश किया गया। इन दावों के जरिए युवकों को विश्वास दिलाया गया कि पटवारी भर्ती में उनका चयन कराया जा सकता है।

भोपाल में परीक्षा का झांसा, फिर दिखाई फर्जी चयन सूची

आरोपितों ने युवकों को भोपाल ले जाकर कंप्यूटर परीक्षा कराने का झांसा दिया। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर फर्जी चयन सूची दिखाई गई। भरोसा मजबूत करने के लिए दस्तावेज सत्यापन के नाम पर भोपाल, जबलपुर और भिंड के कलेक्टर कार्यालयों में भी बुलाया गया, जहां युवकों के हस्ताक्षर कराए गए।

इतना ही नहीं, आरोपितों ने कथित रूप से फर्जी ज्वाइनिंग लेटर भी दिए, ताकि युवकों को लगे कि उनकी सरकारी नौकरी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस तरह भर्ती और नियुक्ति का पूरा घटनाक्रम वास्तविक बताकर उन्हें जाल में फंसाए रखने का आरोप है।

किस्तों में खातों और फोन-पे पर जमा कराए रुपये

पुलिस को मिली शिकायतों के मुताबिक, आरोपितों ने अलग-अलग किस्तों में बैंक खातों और फोन-पे नंबरों के जरिए करीब 50 लाख रुपये जमा करवाए। युवकों को उम्मीद थी कि जल्द ही उन्हें पटवारी के पद पर नियुक्ति मिल जाएगी।

लेकिन एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी जब नौकरी नहीं मिली, तो पीड़ितों ने अपनी रकम वापस मांगी। आरोप है कि तब आरोपितों ने रुपये लौटाने से इन्कार कर दिया। इसके बाद पीड़ितों ने पुलिस से शिकायत की।

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रिश्तेदारों को भी नौकरी दिलाने का दावा

फरियादियों ने पुलिस को बताया कि इस मामले में एक व्यक्ति फोन पर खुद को यादव बताता था। वह कथित तौर पर अपने संपर्कों का हवाला देकर युवकों के रिश्तेदारों को भी सरकारी नौकरी दिलाने का दावा करता था। पुलिस शिकायत में बताए गए मोबाइल नंबर और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है।

थाटीपुर थाना पुलिस ने तीन आरोपितों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस अब कथित लेनदेन, फर्जी दस्तावेजों और आरोपितों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ ठगी के शिकार अन्य युवकों के सामने आने की संभावना भी जताई जा रही है।