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ग्वालियर में 11 मदरसे रजिस्टर्ड, लेकिन दारुल कुरआन का नाम लिस्ट में नहीं; 26 बच्चे रेस्क्यू

Published: Mon, 26 Oct 2026 09:13 PM (IST)

ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर बाल आयोग की कार्रवाई में 26 बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जहां मान्यता के ...और पढ़ें

ग्वालियर के मदरसे से 26 बच्चों का रेस्क्यू।

ग्वालियर के मदरसे से 26 बच्चों का रेस्क्यू।

HighLights

  1. ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर बाल आयोग की कार्रवाई।

  2. बिना मान्यता संचालित मदरसे से 26 बच्चों का रेस्क्यू।

  3. बच्चों के साथ मारपीट और क्रूरता के आरोप सामने आए।

डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। मध्य प्रदेश में 1000 से ज्यादा मदरसे संचालित हो रहे हैं, लेकिन हॉस्टल और मान्यता को लेकर अभी सभी की पड़ताल बाकी है। राज्य बाल आयोग की टीम ने जितने मदरसों में जांच की, वहां अधिकतर में धार्मिक शिक्षा तो अनिवार्य मिली, लेकिन बच्चे स्कूल जाते हैं या नहीं, यह स्थिति साफ नहीं थी। शासन की सूची में शामिल हजार से ज्यादा मदरसों में ग्वालियर जिले के 11 मदरसे हैं, लेकिन AG ऑफिस वाला मदरसा इसमें शामिल नहीं था।

अगर इस मदरसे को लेकर बाल संरक्षण अधिकार आयोग पर शिकायत नहीं आती तो यह कभी पता नहीं चल पाता कि यह मदरसा बिना किसी मान्यता व दस्तावेजों के संचालित हो रहा है। ग्वालियर जिले में ही नहीं, कुछ समय पहले मुरैना के खड़ियाल मदरसे में भी बुरे हालात मिले थे और श्योपुर में साढ़े तीन सौ बच्चे मदरसे में रजिस्टर्ड मिले, जहां एक आंगन व एक ही कमरा मिला।

बाल आयोग ने किया रेस्क्यू

मप्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने बाल कल्याण समिति, महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस के साथ मिलकर AG ऑफिस स्थित दारूल कुरआन मदरसे पर छापेमार कार्रवाई की थी। यहां से 26 बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें आठ बच्चियां थीं। सभी को बाल गृहों में रखवाया गया है।

आठ बच्चियों ने जो आयोग व अधिकारियों के सामने क्रूरता की कहानी सुनाई, उससे सभी हैरत में पड़ गए। यहां बच्चियों के साथ मारपीट की जाती थी और उल्टा तक लटकाया जाता था। पांच-पांच सौ उठक-बैठक की सजा दी जाती थी। बच्चियों ने कलेक्टर व आयोग की अध्यक्ष के सामने बयान दिए, जिसमें बाजी नजमा, साबिर व अनस के नाम लिए, जो प्रताड़ित करते थे। बालकों के साथ भी मारपीट होती थी।

बच्चियों से बातचीत की कैमरे से निगरानी

यह भी सामने आया कि जब बाल आयोग की अध्यक्ष बच्चियों से कमरे में बात कर रही थीं तो वहां कैमरा लगा हुआ था। छोटी बच्चियों से जब सवाल पूछे जा रहे थे तो कुछ बच्चियां ऊपर लगे कैमरे की ओर देख रही थीं। मौके पर बाजी नजमा नहीं मिली और बच्चियां इसलिए तब कुछ नहीं बोल रही थीं क्योंकि बाजी कैमरे के जरिए पूरा नजारा देख रही थी। आयोग की टीम व अधिकारियों ने कैमरे की एक्सेस का कक्ष पूछा, लेकिन किसी ने नहीं बताया। बच्चियों ने यह भी बताया कि बाजी ने कहा था कि इन लोगों को कुछ बताया तो बाद में हड्डियां तोड़ दी जाएंगी।

कलेक्टर बंगले और CWC कार्यालय पर हंगामा

बच्चों को वापस दिए जाने की मांग को लेकर मदरसे के बच्चे व बच्चियों के अभिभावक सोमवार को कलेक्टर बंगले के बाहर पहुंच गए। यहां बैठकर प्रदर्शन कर बच्चों को दिए जाने की मांग की। इसके बाद यहां एएसपी, TI व अधिकारी पहुंचे और अभिभावकों को समझाया कि यह मामला बाल कल्याण समिति का है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही बच्चे मिलेंगे। वहीं बाल कल्याण समिति के कार्यालय पर भी अभिभावक जुट गए और बच्चों को वापस देने की मांग की।

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बच्चों को लौटाने की प्रक्रिया शुरू

दारूल कुरआन मदरसे के मामले में बाल कल्याण समिति के स्तर पर जांच चल रही है। बच्चों के माता-पिता का सत्यापन किया जा रहा है, जिसे सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट कहा जाता है। कुछ बच्चों के माता-पिता ने पते व जानकारी सही नहीं दी, जिस कारण SIR समय पर नहीं हो सकी।

सोमवार को माता-पिता से सही पते व जानकारी ली गई और SIR पूरी होते ही मंगलवार से बच्चों को वापस देने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। पुलिस को भी बच्चियों के बयान के आधार पर रिपोर्ट भेजी जाएगी, जिसके बाद संबंधित थाने की पुलिस इस मामले में FIR दर्ज करेगी।