सड़क की गुणवत्ता पर हाई कोर्ट सख्त, NHAI के 26 करोड़ के भुगतान पर रोक; हाईवे किनारे शराब दुकान पर भी सवाल
मप्र हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सख्त रुख अपनाते हुए एनएचएआई के ठेकेदार को ...और पढ़ें

ग्वालियर हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)
HighLights
हाई कोर्ट ने सड़क गुणवत्ता पर NHAI भुगतान रोका।
ठेकेदार को 26 करोड़ रुपये के भुगतान पर रोक लगी।
हाईवे किनारे शराब दुकानों पर कोर्ट ने चिंता जताई।
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर दायर जनहित याचिका पर मप्र हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सड़क निर्माण से जुड़े मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से ठेकेदार को किए जाने वाले करीब 26 करोड़ रुपये के भुगतान पर रोक लगा दी है। सड़क के नमूनों की जांच रिपोर्ट संतोषजनक नहीं मिलने के बाद कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश दिया।
इसी सुनवाई के दौरान सिकरौदा चौराहे के पास हाईवे किनारे संचालित शराब दुकान का मुद्दा भी सामने आया। कोर्ट ने हाईवे के समीप शराब दुकानों के संचालन को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए संबंधित नीति पर स्वत: संज्ञान लिया है। मामले में शासन से सात दिन के भीतर स्पष्ट जवाब मांगा गया है।
सड़क के नमूनों की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
यह जनहित याचिका कैलाश चंद अग्रवाल ने दायर की है। इसमें बेटी बचाओ चौराहा से गुढ़ा-गुढ़ी का नाका सहित शहर की विभिन्न सड़कों के निर्माण और उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे।
पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट के निर्देश पर एक आयोग का गठन किया गया था। आयोग ने सड़क के अलग-अलग हिस्सों से नमूने लेकर उनकी तकनीकी जांच कराई। आयोग के अध्यक्ष गौरव समाधिया की ओर से एनएसवी निरीक्षण और सड़क के नमूनों से संबंधित रिपोर्ट भी कोर्ट के समक्ष पेश की जा चुकी है।
सभी सैंपल की रिपोर्ट नकारात्मक, रोका भुगतान
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ के समक्ष हुई। कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार सड़क निर्माण के लिए लिए गए नमूनों की जांच संतोषजनक नहीं रही। सभी रिपोर्ट नकारात्मक आने के बाद हाई कोर्ट ने NHAI की ओर से ठेकेदार को किए जाने वाले करीब 26 करोड़ रुपये के भुगतान पर रोक लगा दी।
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हाईवे किनारे शराब दुकान पर कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान सिकरौदा चौराहे के पास हाईवे से सटी शराब दुकान का मुद्दा भी सामने आया। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि हाईवे के समीप शराब दुकानों के संचालन की अनुमति किस नीति के तहत दी जा रही है।
खंडपीठ ने शराब दुकानों से संबंधित नीति को लेकर स्वत: संज्ञान लेते हुए शासन से इस संबंध में सात दिनों के भीतर स्पष्ट जवाब मांगा है। अब अगली सुनवाई में शासन को बताना होगा कि हाईवे के समीप शराब दुकानों के संचालन को लेकर क्या नियम और सुरक्षा मानक लागू हैं।
