संघ विचार परिवार से मातृशक्ति को प्रभावी ढंग से जोड़ने पर मंथन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचार परिवार से मातृशक्ति को प्रभावी ढंग से जोड़ने पर महिला समन्वय की अखिल भारतीय बैठक में गहन मंथन किया गया।

आरएसएस की बैठक में शामिल महिलाएं। (फाइल फोटो।)
HighLights
मातृशक्ति को संघ विचार परिवार से प्रभावी ढंग से जोड़ने पर मंथन।
महिला प्रतिनिधियों ने वर्षभर के कार्यों के अनुभव साझा किए।
पंच परिवर्तन और सामाजिक समरसता के प्रयासों की समीक्षा की गई।
जेएनएन, ग्वालियर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचार परिवार से मातृशक्ति को और अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने की आवश्यकता पर महिला समन्वय की अखिल भारतीय बैठक में गहन मंथन किया गया।
महिला प्रतिनिधियों ने वर्षभर किए गए कार्यों को लेकर अनुभव साझा करते हुए मातृशक्ति की अपेक्षित सहभागिता न होने पर चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही मातृशक्ति की सहभागिता बढ़ाने के लिए जमीनी स्तर पर नए प्रयासों और कार्ययोजना पर विचार किया गया।
बैठक के उद्घाटन सत्र में संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा कि समाज विभिन्न घटकों से मिलकर बना है।
समरसता से ही समाज और राष्ट्र का हित संभव है। स्त्री और पुरुष, दोनों की भूमिकाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन महत्व समान है। समाज जीवन सह-अस्तित्व से चलता है।
संघ के शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन को लेकर किए जा रहे प्रयासों की भी बैठक में समीक्षा की गई।
चर्चा हुई कि पंच परिवर्तन का समाज में कितना प्रभाव हुआ है और सामाजिक समरसता के प्रयास जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी रहे हैं। प्रतिनिधियों ने समूहों में चर्चा करके अनुभवों के आधार पर निष्कर्ष निकालने का प्रयास किया।
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